मेरे बचपन की एक दोस्त, जिसके साथ मेरा बचपन का काफी लंबा समय बीता। हमने जिंदगी के बहुत से उतार- चढ़ाव साथ में देखें , एग्जाम की तैयारी हो या फिर रिजल्ट का इंतज़ार, हम दोनों हर पल साथ ही रहें । हमारी दोस्ती में शामिल था बहुत सारा प्यार और थोड़ी सी तकरार जो हम इसलिए करते थे कि कहीं हमारी खूबसूरत सी दोस्ती को किसी की नज़र न लग जाए। पर एक छोटी सी ग़लतफ़हमी ने हमारे रिश्ते में दरार डाल  दी, जिसके चलते हमारी दोस्ती ने बीच में ही दम तोड़ दिया।
कई बार ऐसा होता है कि हमारा सबसे प्यारा दोस्त हमसे किसी बात पर रूठ जाता है और उसे मानना मुश्किल हो जाता है।यदि आपकी दोस्ती में भी कभी ग्रहण लग जाए और आप उससे बाहर न निकल पा रहे  हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे नायब तरीके, जिनकी बदौलत आप अपने दोस्ती के रिश्ते को ताउम्र तक संभाल  कर रख सकते हैं।

चुनिंदा दोस्त बनाएं
यह एक शाश्वत सत्य है कि आप रोजमर्रा की ज़िन्दगी में मिलने वाले सभी लोगों को अपने दोस्तों की श्रेणी में शामिल नहीं कर सकते हैं। कुछ चुनिंदा लोग जिनकी विचार धाराएं और रहन -सहन हमसे मिलता है, उन्हीं  से दोस्ती की जा सकती है। अपनी दोस्ती को लंबे समय तक जिंदा रखने के लिए ये बेहद ज़रूरी है कि कुछ ख़ास लोगों को ही दोस्त बनाएं। जब दोस्तों की संख्या काम होगी तभी उनकी वैल्यू ज्यादा होगी। आप आमतौर पर उन दोस्तों को अपनी फ्रेंड लिस्ट में शामिल करें, जिनकी रुचियां और आम राय आपके ही  सामान हों।

गेट टुगेदर प्लान करें
भले ही आप कितने भी बिजी क्यों न हों अपने ख़ास दोस्तों के साथ समय -समय पर गेट टुगेदर प्लान करें।  याद रखिये ये आपके वही दोस्त हैं जो कभी आपके सुख -दुःख में आपके साथ थे। आपने अपना कितना समय उनके साथ बिताया होगा लेकिन व्यस्तता की वजह से दूरियां आ गई  हैं ऐसे में उस गेट टुगेदर में अपने गिले  शिकवे दूर करें और उन दोस्तों से फिर से जल्दी मिलने का वादा करें।

गलती की माफ़ी मांगें
कई बार दोस्ती में ग्रहण लगने का कारण हमारी ईगो होता है। हमें पता होता है कि गलती हमारी है फिर भी हम अपने दोस्त से ईगो की वजह से माफ़ी नहीं मांगते हैं। दोस्ती को लंबे समय तक जिंदा रखने के लिए ये बहुत ज़रूरी है कि हम अपनी गलती की माफ़ी मांगें।  ऐसा करने से आपका दोस्त भी जब कोई गलती करेगा तब उसे पता होगा कि उसे आपसे माफ़ी मांगनी है और आपकी दोस्ती टूटने से बच जाएगी।

न हो बदले की भावना
कई बार देखा गया है कि हमारा अच्छा दोस्त किसी वजह से हमसे कांटेक्ट नहीं कर पाता  है या फिर फ़ोन पर बातें नहीं कर पाता है और हम ये सोचकर उससे कांटेक्ट नहीं करते कि जब वो बात नहीं कर पा रहा तो हम क्यों करें? ऐसा करना बिलकुल गलत है। यदि दोस्ती के रंग को और ज्यादा गहरा करना है तो दोस्त की कॉल का इंतज़ार नहीं करना चाहिए बल्कि अपनी तरफ से उससे बात करनी चाहिए।  हो सकता है कि वो किसी परेशानी में हो और आप बदले के चलते उससे बात न कर रहे हों।

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