मैं तब यह नहीं जानती थी कि अगर किसी का कोई अंग टूटा हो तो उसे टुंडा कहते हैं। मैं समझती थी कि टुंडा उन अंकल का उपनाम है। एक दिन मैं उसकी दुकान पर मैगी खरीदने गई। मैंने उन्हें कहा कि टुंडे अंकल…टुंडे अंकल मैगी के दो पैकेट दे दो। वह बड़े गुस्से में बोले कि बेटी तुम्हारे मां-बाप ने तुम्हें बड़ों की इज्जत करना नहीं सिखाया, स्कूल में क्या तुम यही शिक्षा पाती हो। मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने कहा कि मैं आपको अंकल कह रही हूं, इसमें बेइज्जती का सवाल कहां है।
वह दुकानदार बोला कि अंकल कहने के साथ तुम मुझे टुंडा कहकर मेरी अपंगता का मजाक भी उड़ा रही हो। तभी मैं समझी कि टूटी बाजू होने के कारण उसे टुंडा पुकारा जाता था। उस समय मैं इतनी शर्म से लाल हुई कि अनजाने में ही मैं टुंडा उसका उपनाम समझ बैठी थी। खैर, उन से माफी मांग कर और मैगी खरीद कर मैं घर आई, पर अपनी इस नादानी पर मैं बहुत शर्मसार हुई।

2- मीठा किस

हमारी नई-नई शादी हुई थी। संडे वाले दिन मेरे पति ने अपने दोस्तों की फैमिली डिनर पर बुलाया। मैंने काफी उत्साह से कई प्रकार के व्यंजन बनाएं और अपनी बड़ी-सी डाइनिंग टेबल को सुंदर ढंग से व्यंजनों से सजा दिया। खाने के साथ-साथ हंसी-मजाक भी चल रहा था। मेरा बनाया आम का मीठा अचार सबको बहुत पसंद आया। इनके एक दोस्त ने अचार दूर रखा होने के कारण मुझसे मांगा तो मैंने पास बैठी भाभीजी से कहा कि भाई साहब को ‘मीठा किस’ दे दीजिए। मेरा ऐसा कहते ही महफिल में हंसी का फव्वारा छूट पड़ा। सबको हंसते देख जब मैंने अपनी कही बात पर ध्यान दिया तो मैं शर्म से लाल हो गई। असल में मेरे मायके में आम के कद्दूकस करके बनाए मीठी अचार को ‘मीठा किस’ कहते हैं।

3- गर्मी की छुट्टियां

मैं देहरादून ऌगर्मी की छुट्टियों में अपने मामा के घर गई हुई थी, मामा दो दिनों बाद इटली से आने वाले थे और हम सबका बाहर घूमने का प्लान था। मामा के दोनों बच्चे बंटी और मयंक काफी शरारती हैं। पहले मेरा कमरा मामा के बगल में था लेकिन ऐसी खराब होने की वजह से बाद में मामा के बच्चों के कमरे में मेरा इंतजाम हो गया। पलक झपकते ही मामा भी आ गए और हम डियर पार्क और शिव मंदिर घूम कर बेहद खुशी में घर लौटे। मैं रात को अपने कमरे में लाइट बंद कर जल्दी-जल्दी इधर-उधर देख इत्मिनान से कपड़े बदलने लगी कि ऐसा लगा कोई मेरे ऊपर झपटा तो डर के मारे मैं कंबल में छिप गई और लाइट ऑन हो गई और खिलखिलाते हुए दोनों बच्चे अपनी मां के पास जा पहुंचे। मैं भी किसी तरह से कपड़े बदल कर जैसे-तैसे उन्हें धमकाने पहुंची तो बंटी अपनी मां से यानी मेरी मामी से कह रहा था कि मैंने बुआ की फोटो खींचने के लिए जैसे ही फ्लैश ऑन किया कि बुआ डर के मारे कंबल में छिप गईं, आप तो कहती हैं जैसे ही लाइट ऑन करो फोटो खिंच जाती है। मैंने आंखें नीची कर ली मारे शर्म के लाल हो गई, तब तक मामी को सारी बातें समझ आ गई थी और वो मुस्कुरा कर रह गईं।