fifty shades darker novel in Hindi: “तुम मुझसे शादी करोगी?” वह हौले से बुदबुदाया।
मैंने घबराकर हामी भरी। बेशक उसकी प्रतिक्रिया ऐसी ही तो होनी थी। वह समझता क्यों नहीं कि मैं उससे कितना प्यार करती हूं।
“अपने मुंह से दोहराओ।” उसने हुक्म दिया।
“हां, मैं तुमसे शादी करूंगी।” वह आगे आया और किसी उमंग से भरपूर युवा की तरह मुझे बांहों में भरकर यहां-वहां झुलाने लगा। अरे! वह तो अक्सर ऐसा बर्ताव नहीं करता। आज उसका उछाह थामे नहीं थम रहा। मैंने उसे बांहों से थाम लिया और मैं अपने हाथों से उसकी फड़कती मांसपेशियों को महसूस कर सकती हूं। उसकी हंसी की छूत मानो मुझे भी लग गई है। मैं एक ऐसी लड़की बन गई हूं, जो अपने आशिक के नशे में पूरी तरह से चूर हो, जिसे दुनिया में किसी और चीज़ की परवाह न रही हो। उसने मुझे उठाकर एक गोल चक्कर दिया और नीचे उतारकर, दोनों हाथों में मेरा चेहरा भर लिया। उसकी आंखें एक अलग सी खुशी से चमक रही हैं।
“बेबी! भले ही कितने चार्ली टैंगो बिगड़ जाएं पर वे मुझसे तुमसे दूर नहीं कर सकते।”
“चार्ली टैंगो के बारे में तो मैंने सुना था कि बहुत ही बढ़िया यूरोकॉप्टर है पर आज हुआ क्या?” उसके चेहरे पर भी कुछ अनजान से साए लहराते दिखाई दिए। क्या वह मुझे कुछ बताएगा? मैंने उसकी आंखों में झांका।
“एक मिनट! यह तो तुमने मुझे डॉ. की भेंट से पहले ही दे दिया था।” उसने चाबी के छल्ले को हाथ में लेकर कहा।
“ओह! वह बात को कहां ले जा रहा है? मैंने सीधा-सा मुंह बनाकर सिर हिलाया।
उसका मुंह खुला का खुला रह गया।
मैंने कंधे झटके। “मैं तुम्हें एहसास दिलाना चाहती थी कि भले ही डॉ. जो भी कहे, मैं तुम से ही शादी करूंगी।”
क्रिस्टियन ने आश्चर्य से पलकें झपकाईं। “तो कल शाम, जब मैं तुमसे जवाब मांगता रहा तो वह मेरे पास पहले से ही था।” वह मायूस हो गया। मैंने मुस्कुराते हुए उसकी प्रतिक्रिया भांपनी चाही। उसने बालों में हाथ फिराए तो मैं समझ गई कि अब तो..
“तो मुझे इतनी परेशानी में रखा? मिस स्टील! मेरे साथ ही ऐसा खेल?” उसकी आंखें एक दुष्टता से चमक उठीं और चेहरे पर वही जाने-पहचाने भाव आ गए। लगता है कि मुझे मेरी गलती की बड़ी हसीन सजा मिलने वाली थी।
मैं सावधानी से एक कदम पीछे हट गई।
“मुझसे भागना चाहती हो”
“अच्छा जी! तो मैं तुम्हें अभी धर पकड़ूंगा।” उसकी आंखें एक आंनदी भाव से दमक रही हैं। मैंने एक और कदम भरते हुए भागना चाहा पर बेकार रहा। उसने मुझे एक ही झटके में जकड़ लिया और मैं खुशी और हैरानी से चिल्लाई। उसने मुझे कंधे पर लादा और नीचे हॉल में ले गया।
“क्रिस्टियन!” मैंने हौले से कहा। हालांकि जोंस तक हमारी आवाज़ नहीं जा सकती पर हमें याद तो रखना होगा कि आज हम अकेले नहीं हैं। मैंने हिम्मत करते हुए, उसके पिछवाड़े पर धौल जमा दी। उसने भी ठीक वही किया।
“आउच!” मैं चिल्लाई।
“नहाने का वक्त हो गया।” उसने कहा।
“मुझे नीचे उतारो।” मैंने कहा पर यह तो मुझे भी पता था कि वह मनमानी करने में विश्वास रखता है। अगर वह नीचे नहीं उतारना चाहता तो नहीं उतारेगा। पता नहीं क्यों मुझे जोरों की हंसी आने लगी।
“मुझे नीचे उतारो।”
“मिस स्टील! आपका हुक्म सिर आंखों पर!” उसने मुझे बाथरूम में जाकर उतारने की बजाए मेरे जूते उतार दिए, जो तेज आवाज़ के साथ नीचे आ गिरे। फिर उसने अपनी जेब से बंद फोन, चाबियां, पर्स और की-चेन निकालकर रखा और मुझे बाथरूम में ठंडे पानी की बौछार के नीचे कर दिया।
“क्रिस्टियन!” मैं जोर से चिल्लाई।
ओह! पानी ठंडा है और मैं पूरी तरह से भीग गई हूं। सारे कपड़े गीले होने के बावजूद मेरी हंसी नहीं रुक रही। इस बार जोर से चिल्लाई तो उसने नीचे उतार दिया। उसकी अपनी सफेद कमीज़ और सूट की पैंट भी भीग गए हैं। उसने अपने दोनों हाथों में मेरा चेहरा थामा और एक चुंबन दिया। उसके यह चुंबन इतना प्यारा और मीठा है कि मैं भीगने का एहसास भी भूल गई हूं। अब गर्म पानी की बौछार के नीचे हम दोनों! बस इस दुनिया में कोई और नहीं है। वह लौट आया है, वह सही-सलामत है, वह मेरा है।
मेरे हाथों ने उसकी कमीज़ को पीछे खींच दिया जिससे उसकी छाती के बाल दिखने लगे। उसके मुंह से आह निकली पर उसके होठों से मेरे होंठ अलग नहीं हुए।
मैंने बटन खोले तो उसने जिप खोल कर मेरी पोशाक नीचे सरका दी। उसकी जीभ, मेरी जीभ से अठखेलियां कर रही है और मेरा पूरा शरीर उसके लिए तरस उठा। मैंने उसकी कमीज पकड़कर खींची तो कई बटन टूट कर गिर गए। मैंने उसे धकेलते हुए दीवार से सटा दिया और कमीज बेड़ियों की तरह उसकी कलाई में अटक गई।
“अच्छा! मुझे जकड़ लिया पर कफलिंक तो खोलो।”
मैंने गर्म पानी की बौछार के नीचे, उसके कफलिंक खोले और उन्हें नीचे गिरने दिया। शर्ट उसके बदन से अलग हो गई और उसकी आंखें उस गर्म पानी की तरह ही सुलग रही हैं। वह लगातार मुझे देखे जा रहा है। उसने मेरी गर्दन के पास वाले हिस्से से गीले बाल हटाए और अपनी जीभ से उस हिस्से को चूमने व चूसने लगा।
वह धीरे-धीरे मुझे पोशाक से अलग करता गया और चुंबनों की बौछार जारी रही।
“तुम कितनी सुंदर हो।”
मेरी बाजुएं, मेरी पोशाक व अंतर्वस्त्रों में उलझी हैं। मैंने अपने-आप को आगे किया और उसके हवाले कर दिया। मैं चाहती हूं कि वह मेरे बदन से खेले। मैं उसके उभार को महसूस कर सकती हूं। पर वह मुझे अपनी पैंट क्यों नहीं उतारने दे रहा?
जब उसके हाथ मेरे वक्षस्थल से खेलने लगे तो मेरी सारी सोच बदल गई और मैं इस नए आंनद के बीच झूमने लगी। उसने मुझे चूमते हुए, सारे कपड़े इस तरह उतारे कि वे उसकी कमीज के पास, नीचे एक ढेर में बदल गए।
मैंने वहां रखा बॉडी वॉश उठा लिया। मैंने जैल को हाथों में लिया और उसकी छाती के पास ले जा कर अपना अनकहा प्रश्न दोहराया। वह जान गया कि मैं क्या करना चाहती थी। उसने मुझे देखकर आगे बढ़ने का संकेत दिया।
मैंने साबुन लिया और उसकी छाती पर मलने लगी। वह स्थिर खड़ा रहा। एक ही पल बाद, उसके हाथों ने मेरे नितंबों को जकड़ लिया पर उसने मुझे अपने और पास खींच लिया।
“क्या यह ठीक है?” मैंने हौले से पूछा
हां। मुझे याद आ गया कि हम दोनों ऐसे ही कितनी बार एक साथ नहा चुके हैं पर अब मैं उसे छू सकती हूं। मैंने उसके शरीर के एक-एक हिस्से को बड़े ही आराम से साफ किया और मेरे हाथ उसकी पैंट की बेल्ट पर आकर टिक गए।
“मेरी बारी।” उसने वहां रखा शैंपू उठाया और अपने हाथों में ले लिया।
उसने अपने हाथों में लगे शैंपू को मेरे बालों में लगाया और अपनी लंबी अंगुलियों से मालिश सी करने लगा। ओह! इतने तनाव के बाद मुझे यही चाहिए था।
मैंने उसकी हंसी सुनकर एक आंख खोली तो वह बोला।
“तुम यही चाहती थीं न?”
“हम्म?”
“मैं भी!” उसने मेरा माथा चूम लिया और मेरे माथे व सिर की मालिश सी करने लगा। “घूम जाओ।” मैंने वही किया, जो उसने कहा था।
ओह! मेरे सिर में उसकी अंगुलियों का स्पर्श! क्या इससे प्यारा एहसास भी कोई होता होगा? फिर उसने मुझे पानी की बौछार के नीचे कर दिया।
“अपना सिर पीछे कर लो।”
मैंने उसका काम खत्म होने के बाद कहा, “मैं तुम्हें हर जगह से नहलाना चाहती हूं।”
उसने मुस्कुराते हुए हाथ खड़े कर दिए मानो कहा रहा हो कि मैं तुम्हारा हूं, चाहे जो मर्जी कर लो।
मैंने एक ही पल में बाकी कपड़े उसके शरीर से अलग कर दिए और स्पंज व बॉडी वॉश उठा लिया।
“ओह! ऐसा लगा कि आपको मुझे देखकर खुशी हुई है।”
“मिस स्टील! मुझे तो हमेशा आपको देखकर खुशी होती है।”
मैंने स्पंज पर साबुन लगाकर उसे, उसके शरीर के हर हिस्से की यात्रा पर रवाना कर दिया और फिर मेरा स्पंज..
ओह! मैं उसकी इन नज़रों को पहचानती हूं। जब वह मुझे ऐसे देखता है तो… मेरे भीतर बैठी लड़की बहुत रोने-बिसूरने के बाद गहरे लाल रंग की लिपस्टिक लगाए सामने खड़ी है।
अचानक ही उसे कुछ याद आ गया। आज तो शनिवार है! वाह!”
उसने इतना गहरा चुंबन दिया कि मुझे सांस लेना भारी पड़ने लगा और उसके हाथ मेरे शरीर पर बड़ी तेजी से रेंगने लगे। उसने एक हाथ से मेरे गीले बालों को थाम रखा है। उसकी अंगुलियां …।
“आह!” मैंने सिसकारी भरी।
“हां। बेबी, अपनी टांगें मेरे आसपास लपेट लो।” मैं उसकी गर्दन से लिपट गई। उसने मुझे फव्वारे की दीवार से सटा दिया और घूर-घूर कर देखने लगा। मैंने पलकें मूंदीं तो आदेश आया।
“आंखें खोलो, मैं तुम्हें देखना चाहता हूं।”
उसने मुझे देखते-देखते मेरे शरीर पर अपना अधिकार कर लिया और मैं उसकी त्वचा के स्पर्श से खिल उठी। वह एकबारगी थमा और बोला, “एनेस्टेसिया! तुम मेरी हो।”
“हमेशा! हमेशा तुम्हारी!”
उसने एक विजयी मुस्कान दी और बोला, “अब चूंकि तुमने हां कह दिया है इसलिए हम सबको यह बात बता सकते हैं।” उसने मेरे मुंह को अपने हाथों से थामा और धीरे-धीरे हिलने लगा। मैं और मेरा मैन! बस इस दुनिया में हम दोनों के सिवा कोई नहीं है। मैंने अपने शरीर को उसके शरीर की हिलती लय और ताल के हवाले कर दिया है।
उसके दांत मेरे जबड़े, ठोडी और गर्दन के आगे पीछे घूम रहे हैं। मैं उसके साथ से मिले इस भरेपन के एहसास में मग्न हूं और मेरा पूरा शरीर मानो उसके आसपास खिलता जा रहा है।
आज मैं उसे खो सकती थी… मैं उससे प्यार करती हूं… मैं उसे कितना प्यार करती हूं..। मैं अचानक ही उसके लिए प्यार और भावों से घिर गई। मैं अपनी सारी जिंदगी इस इंसान को प्यार करते हुए बिता दूंगी। मैंने इसी सोच के साथ चरम सुख की सीमा को अनुभव किया और उसका नाम ले कर चिल्लाई। मेरे गालों से आंसू लुढ़कने लगे।
वह भी मेरे साथ ही पार उतरा और मुझे सराबोर कर दिया। वह अपना चेहरा मेरी गर्दन में गड़ाए, फर्श पर ही लुढ़क गया, उसने मुझे कसकर जकड़ा हुआ है। मेरे चेहरे और गालों पर पानी से बहते आंसुओं को चूम रहा है।
“मेरी अंगुलियां तो देखो, पानी से सिकुड़ गई हैं।” वह मेरी अंगुलियों को एक-एक कर चूमने लगा।
“हमें अब पानी से बाहर आना चाहिए।”
“मैं यहीं ठीक हूं।” मैंने उसकी टांगों के बीच बैठते हुए कहा और उसने मुझे थाम लिया।
पर कुछ ही मिनटों में मुझे थकान महसूस होने लगी।
पिछले सप्ताह में इतना कुछ घट गया है। लोगों की पूरी जिंदगियों में इतना सब नहीं होता होगा और अब मैं शादी करने जा रही हूं। न चाहने पर भी होठों से हंसी निकल पड़ी।
“मिस स्टील! किस बात से इतनी खुश हैं?” उसने प्यार से पूछा।
“यह सप्ताह कितना व्यस्त रहा?”
उसने खीसें निपोरीं।
“हां, सो तो है।”
“शुक्र है मि. ग्रे कि आप सही-सलामत लौट आए।”
“मैं भी डर गया था।” उसने अपने दिल की बात कही।
“पहले?”
“हां।”
“तो तुमने परिवार को शांत करने के लिए कहानी को बदल कर पेश किया?”
“हां। मैं लैंडिंग के लिहाज़ से बहुत नीचे था पर किसी तरह बात बन गई”।
“हाय! कितनी देर का उतर पड़ा था।”
मेरी आंखें नम हैं। “एना! बस कुछ ही सेकेंड की देर और होती तो… मुझे तो लगा था कि तुम्हें दोबारा नहीं देख सकूंगा।”
मैंने उसे कसकर गले से लगा लिया।
“क्रिस्टियन! मैं तुमसे इतना प्यार करती हूं कि तुम्हारे बिना जीने की कल्पना तक नहीं कर सकती।”
“मैं भी।” उसने उसांस भरी। “तुम्हारे बिना मेरा जीवन कितना खाली रह जाता। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। तुम्हें कभी अपने से दूर नहीं जाने दूंगा।”
“मैं भी तुमसे दूर नहीं जाना चाहती।” मैंने उसकी गर्दन चूमी और उसने मुझे चूम लिया।
एक पल के बाद वह मुड़ा और बोला, “चलो, तुम्हें सुखा दूं। तुम कितनी थकी लग रही हो और मैं भी पस्त हूं।”
मैंने उसके शब्दों के चयन पर अपनी गर्दन एक ओर झुकाई और उसने भी ऐसा ही किया।
“मिस स्टील! कुछ कहना चाहती हैं?”
मैंने गर्दन हिलाई और लड़खड़ाते पैरों से खड़ी हो गई।
मैं पलंग पर बैठी हूं। क्रिस्टियन ने मेरे बाल सुखाने का आग्रह किया। वह इस काम में माहिर है। सुबह के दो बजे हैं और मैं सोने को तैयार हूं। क्रिस्टियन पलंग पर बैठने से पहले, हाथों में की-चेन को ले कर उलट-पुलट रहा है। उसने एक बार फिर से अपनी गर्दन हिलाई मानो उसे यकीन न आ रहा हो।
“ये कितना प्यारा है। मुझे आज तक जन्मदिन का ऐसा तोहफ़ा नहीं मिला। यह तो मेरे हस्ताक्षर किए हुए, गुईसपी डि नटाले के पोस्टर से भी कहीं बेहतर है।”
“मैं तुम्हें पहले ही बता देती पर तुम्हारा जन्मदिन आ रहा था… किसी ऐसे बंदे को दे भी क्या सकते हैं, जिसके पास सब कुछ हो। मुझे लगा कि मैं तुम्हें… अपना-आप ही दे दूं।”
उसने मुझे पीठ की ओर से बांहों में कसा और पलंग पर लेटकर बोला।
“ये बिल्कुल बढ़िया है। तुम्हारी ही तरह!”
“क्रिस्टियन! मैं कोई बढ़िया या संपूर्ण नहीं एक आम इंसान हूं।”
उसने मेरे बालों में नाक फिराया।
“क्रिस्टियन! तुम पोर्टलैंड से जल्दी इसलिए आना चाहते थे क्योंकि मैं यहां जोंस के साथ अकेली थी इसलिए तुम्हें फोन तक करने का होश नहीं रहा।”
उसने कुछ नहीं कहा।
मैंने मुड़कर देखा, “हद हो गई। क्या तुम नहीं जानते कि आज तुमने मुझे और अपने परिवार को कितना कष्ट दिया है। हम तुम्हें कितना प्यार करते हैं।”
उसने पलकें झपकाईं और शर्मीली सी मुस्कान के साथ बोला, “मुझे अंदाजा भी नहीं था कि तुम सब इतने परेशान हो जाओगे।”
मैंने होंठ भींच लिए, “तुम्हारे मोटे भेजे में यह बात कब आएगी कि हम सब तुम्हें कितना चाहते हैं।”
“मोटा भेजा।” उसकी आंखें हैरानी से फैल गईं।
“मोटा भेजा?”
“जी हां।”
“मुझे तो नहीं लगता कि मेरा भेजे की हड्डियां ज्यादा मोटी हैं।”
“मैं गंभीर हूं। मेरी बात का मज़ाक मत करो। मैं अब भी नाराज़ हूं। शुक्र है कि तुम सही-सलामत लौट आए हो… जब मैं सोचती हूं, सोचती हूं… तुम जानते हो कि मेरे मन का डर क्या था?”
उसकी आंखें मुलायम हो आईं।
“माफ़ कर दो न प्लीज़!”
“तुम्हारी बेचारी मॉम! मैं तो उन्हें तुमसे मिलते देखकर भावुक हो उठी थी।”
“हां, मैंने भी उन्हें कभी इस रूप में नहीं देखा। हां, अक्सर वे अपने पर काबू रखती हैं पर आज तो…।”
“देखा? सब तुम्हें कितना प्यार करते हैं? अब तो तुम्हें इस बात पर यकीन करने लग जाना चाहिए।” मैंने आगे झुककर उसे एक चुंबन दिया और कहा, “हैप्पी बर्थ-डे क्रिस्टियन! मुझे खुशी है कि आज यह दिन मनाने के लिए हम दोनों साथ हैं। वैसे तुमने देखा नहीं है कि मैंने तुम्हारे कल के लिए क्या इंतज़ाम किया है…मतलब आज के लिए!”
“और भी कुछ है…?”
“जी हां, मि. ग्रे! पर आपको उसके लिए इंतज़ार करना होगा।”
मैं अचानक ही किसी बुरे सपने से जगी। नब्ज़ तेज चल रही है। मैंने मुड़कर देखा तो उसे आराम से सोता पाया। मेरे मुड़ने से, वह भी हिला और मेरे ऊपर अपनी बाजू रखते हुए, कंधे पर सिर टिका दिया।
कमरे में रोशनी है। सुबह के आठ बजे हैं। क्रिस्टियन तो कभी इतनी देर तक नहीं सोता। मैंने अपने धड़कते दिल को काबू किया। क्या ये पिछली रात का असर है?
मैंने देखा। वह आ गया है। वह सुरक्षित है। मैंने गहरी सांस के साथ उसके प्यारे से चेहरे को निहारा।
वह नींद में तो और भी कम उम्र दिखता है। आज वह एक साल और बड़ा हो गया है। मैंने अपने उपहार को याद करते हुए, खुद को गले से लगा लिया। ओह……वह सुनकर क्या करेगा? शायद मैं उसका नाश्ता यहीं ले आऊं। पर जोंस भी तो यहीं है।
मैंने जोंस को बार स्टूल पर नाश्ता करते पाया। मैं उसे देखते ही लजा गई। वह जानता है कि मैंने अपनी रात क्रिस्टियन के साथ बिताई है। मैं इतना क्यों शरमा रही हूं। कपड़े तो पहने हुए हैं। मैं अपनी साटिन की पोशाक में हूं।
“मोर्निग जोंस!”
“हे एना।” उसके चेहरे पर किसी तरह के चिढ़ाने या मज़ाक उड़ाने के भाव नहीं हैं।
“नींद बढ़िया आई?” मैंने पूछा।
“हां, बहुत अच्छा व्यू दिखता है।”
“हां। ये जगह खास है। इस घर के मालिक की तरह!”
“अच्छा सा नाश्ता करना चाहोगे? आज क्रिस्टियन का जन्मदिन है।”
“हां, क्यों नहीं”
“मैं उसके लिए पलंग पर ही नाश्ता ले जा रही हूं।”
“वह उठ गया।”
“नहीं, कल की थकान है।” मैं झट से किचन में चल दी ताकि उसे मेरे गुलाबी गाल न दिखें।
“तुझे बहुत पसंद है न?” जोंस ने कहा।
“जोंस! मैं उससे प्यार करती हूं।”
उसकी आंखें फैल गईं- “उससे प्यार न करने वाली कोई बात तो हो ही नहीं सकती।”
उसने कमरे की ओर संकेत किया।
“जोंस!!!”
“ओह एना! मज़ाक कर रहा हूं।”
हम्म! क्या मुझे हमेशा अपनी इस सोच का सामना करना होगा कि क्या मैं उससे पैसे के लिए शादी कर रही हूं?
“सच्ची, मज़ाक कर रहा हूं। तू उन लड़कियों में से नहीं है जो किसी के पैसे पर मरती हैं।”
“ऑमलेट ठीक रहेगा।” मैं और बहस नहीं करना चाहती थी।
“बिल्कुल।”
“और मेरे लिए?” क्रिस्टियन ने कमरे में कदम रखते हुए कहा। हाय! वह सिर्फ पैजामे में है, जो उसके नितंबों से झूल रहा है।
“जोंस!” उसने गर्दन हिलाई।
“क्रिस्टियन!”
क्रिस्टियन मुझे देखकर दबी हंसी हंसा और मैंने उसे देखकर आंखें सिकोड़ीं। वह जानता है कि वह क्या कर रहा है और मुझे वहां के माहौल को संभालना भारी पड़ गया।
“मैं तो तुम्हारे लिए वहीं नाश्ता बनाकर ला रही थी।”
उसने मेरी ठोडी उठाई और एक बड़ा-सा गीला चुंबन दे दिया। हाय! ये तो ऐसे नहीं करता था।
“गुडमोर्निंग एना!” मैं चाहती थी कि उसे जरा आराम से पेश आने को कहूं पर आज उसका जन्मदिन है। आज तो वह कुछ भी कर सकता है।
“मैं अपने दूसरे उपहार के इंतज़ार में था।” उसने कहा और मेरा चेहरा लाल हो गया। जोंस को देखकर लगा कि उसके गले में कुछ अटक गया हो। मैं मुड़ी और नाश्ता बनाने लगी।
“तो जोंस! आज के क्या प्लान हैं?” क्रिस्टियन ने बारस्टूल पर बैठकर पूछा।
“मैं अपने डैड और एना के डैड, रे से मिलने जा रहा हूं।”
क्रिस्टियन ने त्यौरी चढ़ाई।
“वे एक-दूसरे को जानते हैं?”
“हां, वे सेना में एक साथ थे। मैं और एना कॉलेज में मिले तो उनकी दोस्ती फिर से शुरू हो गई। वे पक्के दोस्त हैं और हम एक साथ मछली पकड़ने जा रहे हैं।”
“मछली पकड़ने?”
“हां, तटीय पानी में अच्छी मछली मिलती है।”
“सही कहा, मैंने और मेरे भाई इलियट ने एक बार पैंतीस पाउंड की मछली पकड़ी थी।”
ये मछली पकड़ने की बात कर रहे हैं। इसमें ऐसा क्या खास है। मैं तो कभी नहीं समझी।
“अच्छा जी! वैसे एना के डैड का तैंतालीस पौंड का रिकॉर्ड रहा है।”
“मज़ाक कर रहे हो। उन्होंने कभी बताया तो नहीं?”
“वैसे जन्मदिन मुबारक हो।”
“ओह थैंक्स! मछली पकड़ने कहां जाओगे?”
मैं बात के दायरे से बाहर आ गई। मैंने क्या लेना है? खैर क्रिस्टियन ने भी देख लिया कि जोंस इतना बुरा भी नहीं है।
जोंस जाने को हुआ तो वे दोनों आपस में काफी सहज हो गए थे। क्रिस्टियन ने टी-शर्ट और जींस बदली और हमारे साथ बरामदे तक आया।
“मुझे यहां रखने के लिए धन्यवाद।” जोंस ने उससे कहा।
“कभी भी आ सकते हो।” क्रिस्टियन मुस्कुराया।
जोंस ने एक छोटी सी गलबांही दी। “एना अपना ध्यान रखना।”
“हां। अगली बार मिलकर धमाल करेंगे।”
“वादा रहा।” उसने कहा और लिफ्ट से उतर गया।
“देखा, वह इतना बुरा भी नहीं है।”
“एना! वह अब भी तुझ पर मरता है पर दोष उसका भी नहीं है।”
“क्रिस्टियन ये सच नहीं है।”
“तुम्हें क्या पता है। वह तुम पर जानोदिल से फ़िदा है।”
“क्रिस्टियन वह एक दोस्त है। बस एक अच्छा दोस्त!” और अचानक ऐसा लगा कि मैं भी उसी सुर में बोल रही हूं, जिस सुर में क्रिस्टियन एलीना की बात करता है। इस सोच ने मन कसैला कर दिया।
क्रिस्टियन ने हाथ उठाते हुए हथियार डालने का अभिनय किया। “मैं लड़ना नहीं चाहता।”
ओह! हम कोई लड़ थोड़ी रहे हैं।
“तुमने उसे बताया नहीं कि हम शादी करने वाले हैं?”
“नहीं। पहले मॉम और रे को बताना चाहती हूं।” शिट! मैंने यह बात कहने के बाद पहली बार इस बारे में सोचा है। मेरे मां-बाप क्या कहेंगे?
क्रिस्टियन ने हामी दी। “एना! तुम सही कह रही हो। मुझे तुम्हारे पिता से पूछना चाहिए।”
“क्रिस्टियन! ये अठारहवीं सदी नहीं है।”
हाय! रे क्या कहेंगे, मैं खुद भी सोचकर डर सी गई।
“ये पारंपरिक तरीका है।” उसने कंधे झटके।
“चलो बाद में बात करेंगे। पहले अपना तोहफ़ा तो ले लो।” मैं उसका ध्यान बंटाना चाहती थी। मेरे उपहार की बात दिमाग में कचर-कचर मचा रही है। आत्मा पर भारी पड़ रही है। जितनी जल्दी उसकी प्रतिअिर्या मिल जाए, उतना ही बेहतर होगा।
उसने मुझे लजीली सी मुस्कान दी और मेरा दिल पिघल गया। क्या मैं कभी इसकी मुस्कान से अघा सकती हूं?
“तुम अपना होंठ काट रही हो।” उसने मुझे अंगुली से छुआ।
पूरे शरीर में सनसनी-सी दौड़ गई। मैं कुछ कहे बिना, उसे हाथ से थामकर अन्दर लेगई। मैंने दो गिअ ट बॉक्स निकाल
े।
“दो?” उसने हैरानी से कहा।
मैंने गहरी सांस ली। ….”मैंने कल वाली घटना से पहले लिया था इसलिए अब इसके बारे में यकीन से नहीं कह सकती…।” मैंने उसे पार्सल पकड़ा दिए।
“क्या मैं खोल सकता हूं?”
क्रिस्टियन ने बॉक्स खोला तो मैंने धीरे से कहा।
चार्ली टैंगो।
वह मुस्कराने लगा। उस बॉक्स में छोटा-सा लकड़ी का हैलीकॉप्टर था, जिसमें सौर अर्जा से चलने वाला, रोटर ब्लेड लगा था। उसने उसे खोला।
“सौर अर्जा? वाह।” इससे पहले कि मैं कुछ कहती। वह पलंग पर बैठकर उसे जोड़ने लगा। फिर उसने उसे हथेली पर रख कर देखा। नीले रंग का लकड़ी का हैलीकॉप्टर। उसने मुझे बच्चों के से उत्साह से देखा और अपना हाथ खिड़की की ओर कर दिया। धूप मिलते ही उसका ब्लेड घूमने लगा।
“ये देखो।” वह बड़े ही दिल से उसे देखने लगा। वाह! क्या तकनीक है। वह सब भुलाकर उसे देखे जा रहा है। वह क्या सोच रहा है।
“पसंद आया।”
“बहुत पसंद आया एना! थैंक्स।”
उसने मुझे चूमा और उसे देखकर बोला। “इसे अपने ऑफिस में ग्लाईडर के साथ रख दूंगा।” उसने धूप से हाथ हटाया तो ब्लेड घूमने बंद हो गए।
मुझे जान कर खुशी हुई कि उसे अपना उपहार पसंद आया। मुझे पता है कि उसे वैकल्पिक तकनीकों से कितना लगाव है। मैं खरीदने की हड़बड़ाहट में यह बात भूल गई थी। उसने उसे दराज में रखा और मेरी ओर मुड़ा।
“जब मैं चार्ली टैंगो को बचाने जाऊंगा तो इसे साथ रखूंगा।”
“क्या उसे बचाया जा सकता है?”
“देखो, पता लगेगा।”
“मैं उसे बहुत याद करूंगा।”
मुझे उसे इस तरह देखकर जलन महसूस हुई। भीतर बैठी लड़की ने मुंह बनाया और हंसने लगी। मैंने उसे अनदेखा कर दिया।
“दूसरे बॉक्स में क्या है?” उसने बच्चों की तरह उमगते हुए पूछा।
“हाय! पता नहीं, ये उपहार तुम्हारे लिए है या मेरे लिए?”
“मतलब?” उसकी दिलचस्पी और बढ़ गई। उसने उसे हिलाया तो हमने भीतर से किसी सामान की आवाज़ सुनी। उसने मुझे ताका
“तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो?” उसने हैरानी से पूछा।
मैंने कंधे झटक दिए और उसने अपनी भवें सिकोड़ीं।
“मिस स्टील! तुम मुझे हमेशा हैरानी में डाल देती हो।” उसने बड़े ही आराम से बॉक्स खोला तो उसमें से एक छोटा-सा कार्ड निकला। बाकी चीजें एक टिश्यू में लिपटी थीं। उसकी आंखें अचानक ही मेरी आंखों से जा टकराईं। मैं समझ नहीं पाई कि उनमें हैरानी थी या सदमा! कार्ड में लिखा था ।
“तुम्हारे साथ सख्ती से पेश आ सकता हूं।” वह हौले से बोला और मैंने अपना थूक निगला। उसने अपनी गर्दन एक और झुका ली। फिर बॉक्स के सामान को देखने लगा। हल्के नीले टिश्यू को फाड़ा तो उसमें से आंखों पर लगाने वाला मास्क, निप्पल क्लैंप्स, बट्ट प्लग, आई पॉड और सिल्वर ग्रे टाई निकले और साथ ही उसके प्लेरूम की चाबियां भी थीं।
उसने मुझे अजीब सी नज़रों से देखा। हाय! लगता है कि मैंने अच्छा नहीं किया।
“तुम खेलना चाहती हो?” उसने पूछा।
“हां।” मैंने आखिरकार सांस ले ही ली।
“मेरे जन्मदिन की खुशी में?”
“हां।” मैं इससे धीमा बोल सकती थी क्या?
उसके चेहरे पर कई तरह के भाव तिर आए। वैसे मुझे उससे ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी।
“क्या तुम यकीन से कह सकती हो। उसने पूछा
“कोड़े और छड़ियों के बिना।”
ये उपन्यास ‘फिफ्टी शेड्स डार्कर’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – fifty shades darker (फिफ्टी शेड्स डार्कर)
“मैं समझता हूं।”
“हां, फिर तो मैं यकीन से कह सकती हूं।”
उसने अपनी गर्दन हिलाई और बॉक्स के सामान को फिर से देखने लग।
“सेक्स की दीवानी मिस स्टील! खैर, हम इन चीज़ों से बहुत कुछ कर सकते हैं।” इस बार उसने मुझे ताका तो उसकी आंखों के भाव बदल गए थे। वह कितना अजीब-सा दिखने लगा। उसने अपना हाथ मेरी ओर बढ़ाया।
“अभी!” इस बार यह उसकी ओर से विनती नहीं थी। मेरे पेट की मांसपेशियां ऐठने लगीं।
मैंने अपने हाथ को उसके हाथ में दे दिया।
“आओ।” उसने हुक्म दिया। मैं उसके साथ सोने के कमरे में आ गई। मेरा दिल उछल कर बाहर आने को तैयार था। मेरे भी पूरे शरीर में वासना सुलग उठी थी।
