fifty shades of grey novel in Hindi: धीरे-धीरे मेरी बाहरी जगत की सुध लौटी। ये सब कितना अनूठा है। मानो मैं हवा में हल्की होकर तैर रही हूं। मेरे अंग फूलों से भी हल्के हो गए हैं। मेरा सिर उसकी छाती पर है और मैं उसकी दिव्य सुगंध में खोई हुई हूं। ताज़ी धुली लिनन की कमीज़ और कोई महंगा बॉडी वाश,इस ग्रह की सबसे कामोअटोजक गंध…क्रिस्टियन। मैं हिलना नहीं चाहती, मैं चाहती हूं कि अनंतकाल तक इसी सुगंध के बीच पड़ी रहूं। मैंने उसकी टी-शर्ट पर नाक फिराई। काश! हमारे बीच में टी-शर्ट न होती, मैंने अचानक ही अपना हाथ उसकी छाती पर फैला दिया। आज पहली बार उसे छूने का सुख पाया है। उसका सीना……कितना मजबूत है! उसने एक हाथ से मेरा हाथ जकड़ लिया पर इस असर को घटाने के लिए उस हाथ को अपने मुंह तक ले गया और प्यार से चूमने लगा। फिर इस तरह पलटा कि मुझे देख सके
“ऐसा मत करो।” वह हौले से बोला
“कोई तुम्हारे शरीर को स्पर्श करे, तुम्हें बुरा क्यों लगता है?” मैं उसकी आंखों को देखते हुए हौले से बोली
“क्योंकि एनेस्टेसिया मैंने जिंदगी के पचासों कड़वे रंग देखे हैं।”
ओह……उसकी ईमानदारी ने तो मुझे हत्थे से उखाड़ दिया। मैंने पलकें झपकाईं।
“मेरा जिंदगी के साथ बड़ा ही कठोर परिचय रहा है। मैं ये बातें विस्तार से बता कर तुम्हारे दिल पर भार नहीं डाला चाहता। बस तुम ऐसा मत करो।” उसने मेरे नाक से अपनी नाक टकराई और मुझसे परे हो गया।
“मेरे हिसाब से तो सारे बेसिक पूरे हो गए हैं। तुम्हें कैसे लगे?”
वह अपने-आप से पूरी तरह प्रसन्न दिख रहा था और ऐसा लगा मानो अपनी चेकलिस्ट में उसने एक और सही का निशान लगाया हो। मैं अब भी ‘जिंदगी के साथ कठोर परिचय’ वाले वाक्य से जूझ रही हूं। ये सब तो कुंठित कर देने वाला है-मैं और सब जानने के लिए मरी जा रही हूं पर वह मुझे कुछ और नहीं बताएगा। मैंने उसकी तरह अपना सिर एक ओर झुकाया और मुस्कुराने की भरपूर कोशिश की।
“अगर तुम एक मिनट के लिए सोचो, मैं मान लेती हूं कि तुमने अपना नियंत्रण मुझे सौंप दिया है पर मेरी जीपीए पर तो ध्यान ही नहीं दिया…वैसे इस भ्रम के लिए मेहरबानी।”
“मि स्टील! तुम्हारे पास सिर्फ एक खूबसूरत चेहरा ही नहीं है और अब तक तुम छह बार उस चरम सुख को पा चुकी हो, जिसमें हर बार तुम्हारे साथ मैं शामिल था।” उसने बड़े ही खिलवाड़ केे साथ डींग मारी।
मैं खिसियाने के साथ-साथ लजा गई। ओह! यह तो सारा हिसाब रखता है।
“क्या तुम्हारे पास मुझे बताने के लिए कुछ है?” उसकी आवाज़ में अचानक ही सख़्ती आ गई।
मैंने भौं नचाई। हो गया कबाड़ा
“मैंने आज सुबह एक सपना देखा।”
ओह? वह मुझे घूरने लगा।
हो गई गड़बड़! क्या मैं मुसीबत में हूं?
“मैंने आज नींद में ही उस सुख……।” मैंने अपनी आंखों पर हाथ रख लिया। उसने कुछ नहीं कहा। मैंने कनखियों से देखा तो उसके चेहरे पर हंसी की रेखाएं दिखीं।
“अच्छा, क्या नींद में ही?”
“हां, उस सपने ने मुझे जगा दिया।”
“बेशक! यही हुआ होगा पर तुम सपने में कर क्या रही थीं? तुम्हारे साथ कौन था?”
कबाड़ा..
“तुम”
“मैं कर क्या रहा था?”
मैंने फिर से आंखों पर हाथ रख लिया और छोटे बच्चे की तरह पल भर को यह मान लिया कि अगर मैं उसे नहीं देख सकती तो वह भी मुझे नहीं देख सकता।
“एनेस्टेसिया! मैं क्या कर रहा था? मैं दोबारा नहीं पूछूंगा।”
“तुम्हारे हाथ में एक चाबुक था।”
उसने मेरी बाजू हटाई।
“सचमुच?”
“हां!” मैं लाल पड़ गई।
“अब भी तुम्हारे लिए कुछ उम्मीद है।” वह हौले से बोला
“मेरे पास बहुत सारे हैं।”
“भूरे चमड़े से मढ़ा हुआ”
वह हंस दिया-“अभी तो नहीं है पर बेशक मैं ला सकता हूं।”
उसने आगे बढ़कर मुझे चूमा और अपने कपड़े उठा लिए।
नहीं!!!! वह जा रहा है।
घड़ी पर नज़र मारी। अभी तो नौ बजकर चालीस मिनट हुए थे। मैं भी बिस्तर से उठी और कपड़े पहनकर, पलंग पर ही आलथी-पालथी लगाकर बैठ गई। मैं उसे जाने नहीं देना चाहती। मैं क्या कर सकती हूं?
“तुम्हारे पीरियड कब से हैं।” उसने मेरी सोच में बाधा दी।
“क्या?”
“मुझे ये सब चीजें इस्तेमाल करने से उलझन होती है।” उसने इस्तेमाल किया हुआ कंडोम परे रखा और जींस चढ़ा ली।
वैसे मैंने जवाब नहीं दिया तो वह मुझे उम्मीद भरी निगाहों से ताकने लगा। अरे! ये कैसी व्यक्तिगत बातें भी पूछ लेता है।
“अगले सप्ताह।” मैंने हाथों को घूरते हुए कहा।
“तुम्हें अपने लिए कोई गर्भ-निरोधक साधन चुनना होगा।”
ये कितना तानशाह है। मैं उसे खाली नज़रों से घूरती रही। वह अपने जूते और जुराबें पहनते हुए पलंग पर ही बैठ गया।
“क्या तुम्हारा कोई डॉक्टर है?”
मैंने गर्दन हिला दी। हम फिर से बड़ी जमीन-ज़ायदाद किस्म की बातों पर आ गए थे।
वाह! इसका मूड पल में बदलता है।
उसने कहा “मैं अपने डॉक्टर को तुम्हारे यहां रविवार से पहले भेज दूंगा या तुम उसे वहीं रविवार को मिल सकती हो। जो तुम्हें ठीक लगे?
चलो कोई दवाब नहीं है। वह इनके लिए भी पैसे चुकाएगा……क्या करें, वह इसे अपने फायदे के लिए करने जा रहा है।
“तुम्हारे यहां।” इसका मतलब रविवार को हमारे मिलने की गारंटी हो जाएगी।
“अच्छा! मैं तुम्हें समय बता दूंगा।”
“क्या तुम जा रहे हो?”
“मत जाओ……मेरे साथ रहो, प्लीज़”
“हां।”
क्यों?
“तुम वापिस कैसे जाओगे?” मैं हौले से बोली
“टेलर मुझे ले जाएगा।”
“मैं गाड़ी चला सकती हूं। मेरे पास बहुत प्यारी नई गाड़ी है।”
उसने मुझे घूरा और चेहरे पर गरमाहट के भाव आ गए।
“बहुत अच्छी बात है पर इस समय तुमने बहुत पी रखी है।”
“क्या तुमने मुझे जान कर ज्यादा पिलाई थी?”
“हां।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुम हर चीज़ के बारे में जरूरत से ज्यादा सोचती हो और अपने सौतेले पिता की तरह बड़बोली हो। तुम्हारे अंदर एक बूंद शराब जाते ही बड़बड़ाने लगती हो। मैं चाहता था कि तुम दिल खोल कर अपने मन की बात कहो। वरना तुम चुप रहतीं और मैं कुछ भी न जान पाता।”
“तुम्हें क्या लगता है कि तुम हमेशा मेरे साथ ईमानदार होते हो?”
मैं कोशिश करता हूं और यह तभी कारगर होगा जब हम दोनों ही एक-दूसरे के साथ ईमानदारी बरतेंगे।”
“मैं चाहूंगी कि तुम यहीं रहो और इसे भी इस्तेमाल करो।” मैंने दूसरा पैकेट उठाकर दिखाया।
वह मुस्कुराया और आंखों में अजीब-सी चमक आ गई।
“एनेस्टेसिया! मैंने आज रात यहां बहुत सी सीमाएं लांघ ली हैं। मुझे जाना ही होगा।
मैं तुमसे इतवार को मिलूंगा। मैं तुम्हारे लिए नया अनुबंध बनवा कर तैयार रखूंगा और फिर हम सही मायनों में मौज कर सकते हैं, खेल सकते हैं।”
खेल, तौबा! मेरा कलेजा उछलकर मुंह को आ गया।
“मैं तुम्हारे साथ कुछ अनूठा करना चाहता हूं पर तब तक नहीं, जब तक तुम अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं कर देतीं, तभी तो मैं जान पाऊंगा कि तुम तैयार हो।” ओह! अगर मैं हस्ताक्षर न करूं तो यह सब कुछ दिन इसी तरह और चल सकता है?”
“हां! तुम ऐसा कर सकती हो पर मेरे लिए भारी पड़ेगा।”
क्यों? कैसे? मेरे भीतर बैठी लड़की अचानक ही जागी और पूरे ध्यान से सुनने लगी।
उसने चिढ़ाया-“सब कुछ काफी बदतर हो सकता है। पता है, बम के धमाके, कारों का पीछा, अपहरण वगैरह-वगैरह।
“तुम मुझे अगवा करा लोगे?”
“अरे हां।” वह हंसा
“मेरी मर्जी के बिना बंदी बना लोगे।” ओह! ये सब कितना हॉट होगा।
“हां। हमेशा के लिए तुम मेरी बंदी बन जाओगी।”
ओह! मैं तो गई काम से। उसकी हर अदा दिलकश जान पड़ती है।
“तो तुम्हारे पास कोई चुनाव नहीं बचता।” उसने व्यंग्यात्मक मुस्कान दी।
“हां, ठीक ही कहा।” मैं खुद को आंखें नचाने से नहीं रोक पाई।
“ओह! एनेस्टेसिया स्टील, क्या तुमने अभी मुझे देखकर फिर से आंखें नचाईं।” हो गया कबाड़ा। वह पलंग के छोर पर आ बैठा।
“यहां आओ।” उसने कोमल सुर में कहा।
मेरा रंग पीला पड़ गया। …इसने तो बात का बुरा मान लिया। मैं बिना हिले-डुले उसे ही घूर रही थी।
“मैंने अभी कहीं भी हस्ताक्षर नहीं किए हैं।” मैं हौले से बोली।
“मैंने तुम्हें बताया था न कि मैं क्या करूंगा। मैं अपने शब्दों पर कायम रहने वालों में से हूं। मैं तुम्हें नितंबों पर मारने जा रहा हूं और फिर एक बार हम शारीरिक संबंध बनाएंगे। देखा, दूसरे पैकेट की जरूरत पड़ ही गई।”
मैं वहीं बुत बनी खड़ी हूं। क्या मुझे वहां से भाग जाना चाहिए? क्या हमारे रिश्ते का संतुलन यही है? यहीं और अभी? क्या मैं उसे मनमानी करने दूं या साफ न कह दूं, बात खत्म कर दूं? मुझे ये भी पता है कि मेरे इंकार के बाद बात हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। मेरे भीतर बैठी लड़की गिड़गिड़ाने लगी-उसकी बात मान ले, हर्ज भी क्या है। मेरे भीतर बैठी सयानी लड़की को मेरी तरह लकवा मार गया है।
ये उपन्यास ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं – fifty shades of grey(फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे)
“मैं इंतज़ार कर रहा हूं। वह बोला। मैं बहुत धीरज वाला इंसान नहीं हूं।”
ओह, इसके प्यार के लिए क्या-क्या करना होगा। मैं हांफ रही हूं। पूरे शरीर में रक्त हिलोरें ले रहा है और टांगों में जैसे जान ही नहीं बची। मैं धीरे से सरक कर उसके पास हो गई।
“गुड गर्ल। अब खड़ी हो जाओ।”
ओह…क्या यह ड्रामा बंद नहीं हो सकता? मैं यकीन से नहीं कह सकती कि यह सबसह भी पाऊंगी या नहीं? मैं लड़खड़ाई और उसकी फैली हथेली पर कंडोम का पैकेट रख दिया। अचानक उसने मुझे अपनी गोद में पेट के बल लिटा दिया। मेरा पूरा धड़ पलंग पर था। मेरी दोनों टांगे उसकी एक टांग के नीचे दबी थीं। उसने एक हाथ से मुझे इस तरह पकड़ लिया कि मैं हिल न सकूं।
ओह! ये हो क्या रहा है?
“एना! अपने दोनों हाथ सिर के पास ले जाओ।” उसने हुक्म दिया।
मैंने पालन किया।
“तुम्हें पता है कि मैं ऐसा क्यों कर रहा हूं?”
“क्योंकि मैंने तुम्हें देखकर आंखें नचाई थीं?” बमुश्किल गले से आवाज़ फूटी।
“क्या तुम्हें ये विनम्रता लगती है?”
“नहीं।”
“क्या तुम दोबारा ऐसा करोगी?”
“नहीं”
“जब भी तुम ऐसा करोगी तो इसी तरह मार खाओगी। समझीं?”
उसने मेरे कपड़े खिसकाए और नंगी चमड़ी पर, हथेली से जोर से वार किया। ओह! बड़ी जोर से दर्द हुआ। फिर उसने त्वचा को सहलाया और दोबारा तेज वार किया। उसकी हर चोट पर मेरी सांसें उथली और तेज होती जा रही थीं। मेरे मुंह से कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। इसी दौरान मैं जरा सा हिली तो उसकी धमकी आई
“हिलो मत वरना ज्यादा देर तक मार खाओगी।”
फिर उसने सहलाने और मारने के बीच एक ताल सी बना ली। मुझे दर्द पर ध्यान केंद्रित करना भी मुश्किल लगता था। वह किसी एक जगह पर मारने की बजाए अलग-अलग जगह मार रहा था।
ओह! मैं दसवें तमाचे पर कराह उठी। पता नहीं कब अनजाने में ही मैं उसके हाथ की चोटों को गिनने लगी थी। मेरी बार-बार की कराहों पर जवाब मिला।
“बेबी! मेरे सिवा तुम्हारी आवाज़ सुनने के लिए यहां कोई नहीं है।” उसने कुल अठारह बार मारा होगा और फिर वह अपने साथ से मुझे देह-सुख की उन्हीं अंधेरी वहशी गलियों में ले गया, जहां जाने के बाद मुझे कुछ भी याद नहीं रहता था। मेरे साथ-साथ उसने भी कुछ गहरी सांसें भरीं और बोला।
“ओह बेबी! मेरी दुनिया में तुम्हारा स्वागत है।”
हम दोनों कुछ देर वहीं पड़े रहे और अपनी सांसों के काबू आने का इंतज़ार करते रहे। वह हौले से मेरे बाल सहला रहा है और मैं फिर से उसकी छाती पर हूं पर इस बार मुझमें इतनी ताकत नहीं बची कि हाथ उठाकर उसे छू सकूं। ओह…शुक्र है! जान तो बची। वैसे ये इतना बुरा भी नहीं था। मैं उतनी नाजुक भी नहीं, जितनी मैं खुद को समझती थी। क्रिस्टियन अपने नाक से मेरे बाल रगड़ते हुए बोला
“बहुत खूब! बेबी।” उसकी खुशी में भीगे स्वर ने मुझे वही आराम दिया जो उस दिन हीथमैन होटल के नरम मुलायम तौलिए में लपेट कर आया था। मुझे खुशी है कि वह खुश है।
उसने मेरे कपड़े देखकर कहा।
“तुम ऐसे कपड़े पहनकर सोती हो? तुम्हें तो सिल्क और साटिन में होना चाहिए। खूबसूरत लड़की! मैं तुम्हें शॉपिंग के लिए ले जाअंगा।”
“नहीं! मुझे यही पसंद हैं।”
उसने फिर से मेरा सिर चूम लिया।
“देखेंगे।” वह बोला
हम कुछ मिनट या पता नहीं कुछ घंटों तक वहीं ऊंघते रहे, कौन जाने?
“मुझे जाना होगा।” उसने कहा और एक बार फिर से झुककर मेरा माथा चूम लिया।
तुम ठीक हो न?” उसका सुर कोमल था।
मैंने उसके सवाल के बारे में सोचा। मेरे नितंब मार से सूज गए हैं और इस एहसास के अलावा कह सकती हूं कि मार के कारण लाली से दमक भी रहे हैं। कुछ समझ नहीं आ रहा। इस एहसास को बयां नहीं कर पा रही।
“मैं ठीक हूं।” मैं हौले से बोली। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहती।
वह उठा।
“तुम्हारा बाथरूम कहां है?”
“हॉल के बाई ओर।”
उसने इस्तेमाल किए हुए कंडोम उठाए और उसी ओर चल दिया। मैंने किसी तरह उठकर अपनी स्वेटपैंट पहनी। हल्की-सी चुभन महसूस हुई। मैं अपनी ही प्रतिक्रिया के लिए अचंभे में हूं। मुझे याद है, उसने कहा था-ये नहीं याद कि कब कहा था-मैं अच्छी तरह से पिटाई लगाने के बाद बेहतर महसूस करता हूं। वह ऐसा कैसे हो सकता है? मैं तो सचमुच समझ नहीं पा रही। पर हैरानी की बात यह है कि कुछ-कुछ समझ भी आ रहा है। मैं यह भी नहीं कह सकती कि मैंने इस अनुभव का आनंद नहीं लिया। दरअसल अभी इसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता था पर……। मैंने अपने दोनों हाथों में सिर थाम लिया। दिमाग उलझन में है।
क्रिस्टियन ने कमरे में कदम रखा। मैं उसकी नज़रों से नज़रें नहीं मिला सकती। मैं अपने हाथों को घूरने लगी।
“मुझे कुछ बेबी ऑयल मिला है। लाओ तुम्हारेे पीछे मल दूं।”
“क्या?”
“नहीं! मैं ठीक हो जाऊंगी।”
एनेस्टेसिया! “उसने चेतावनी दी। मैं अपनी आंखें नचाते-नचाते एकदम ही संभल गई। मैं पलंग की ओर मुंह करके खड़ी हो गई। उसने मेरे साथ बैठकर पैंट नीचे की और हल्के सधे हाथों से बेबी ऑयल मलने लगा। मन ही मन मैं सोच रही थी कि किस हिस्से में हाथ छूने से ज्यादा आराम आएगा। मेकअप रिमूवर से लेकर सूजी हुई नितंब को आराम पहुंचाने के लिए-किसने सोचा था कि यह तरल पदार्थ इतना काम आएगा।
मुझे तुम्हारे शरीर पर अपने हाथ अच्छे लग रहे हैं।” उसने हौले से कहा। मुझे भी कहना पड़ा-मुझे भी!”
“हो गया!”उसने मेरी पैंट ऊपर खिसका दी।
मैंने घड़ी पर नज़र मारी। 10:30 हो गए हैं।
“मैं जा रहा हूं।”
मैं तुम्हें छोड़ आती हूं।” मैं अब भी उससे नज़रें नहीं मिला पा रही।
वह मेरा हाथ थाम कर बाहर वाले दरवाज़े तक ले गया। खुशकिस्मती से केट आज घर पर नहीं है। वह अपने परिवार और ईथन के साथ डिनर ले रही होगी। मुझे खुशी है कि मेरी ये बदतर हालत देखने के लिए वह आसपास नहीं है।
“क्या तुम्हें टेलर को बुलाना नहीं होगा?” मैंने नज़रें चुराते हुए कहा
“टेलर नौ बजे से यहीं है। मेरी तरफ देखो।” उसने गहरी सांस ली।
मैंने नज़रें मिलानी चाहीं और इस दौरान वह मुझे हैरानी से देखता रहा।
“तुम रोई नहीं।” वह हौले से बोला और मुझे कसकर गले से लगाकर चूमा।
वह मेरे होठों के पास आकर फुसफुसाया-रविवार। इन शब्दों में एक वादे के साथ-साथ धमकी भी छिपी थी।
मैंने उसे उसकी बड़ी काली ऑडी में जाते देखा। वह पीछे नहीं मुड़ा। मैंने दरवाजा बंद किया और उस अपार्टमेंट के लिविंग रूम में खड़ी यहां-वहां ताकने लगी, जिसमें मैंने बस अब दो रातें और बितानी थीं। एक ऐसी जगह, जहां मैं पिछले चार साल से बड़े ही मज़े से रहती आई थी…। और आज पहली बार, शायद पहली बार मैंने खुद को यहां अकेला और असहज पाया। क्या अब तक मैं इस बात से भी अनजान थी कि मैं कौन हूं? मैं जानती हूं कि अंदर ही अंदर बहुत सारे आंसू सैलाब बन कर उमड़ने को तैयार हैं। मैं क्या कर रही हूं? विडंबना तो यह है कि मैं आराम से बैठकर रो भी नहीं सकती। मुझे संभलना ही होगा। बेशक रात ज्यादा हो गई है पर मैंने मॉम को फोन करने की सोची।
“हनी, कैसी हो तुम? ग्रेजुएशन समारोह कैसा रहा?” उन्होंने फोन उठाते ही कहा और उनकी आवाज़ से मेरे दिल को मलहम सा लग गया।
“सॉरी! आपको देर से फोन किया।”
वे ठिठकीं।
“एना? क्या बात है बेटा?” वे अब भी गंभीर हो गई थीं।
“कुछ नहीं मॉम! बस आपकी आवाज़ सुनने को मन कर रहा था।”
वे एक पल के लिए चुप रहीं।
“एना, क्या बात है? प्लीज़ मुझे बताओ।” उनकी आवाज़ बहुत ही तसल्ली और सुकून दे रही है और मैं जानती हूं कि वे मेरी कितनी परवाह करती हैं। अचानक ही आंसू बहने लगे। मैं पिछले कुछ दिनों में कई बार रो चुकी हूं।
“प्लीज़ एना!”उन्होंने एक बार फिर से कहा
“ओह मॉम! एक पुरुष मित्र की बात है।”
उसने क्या किया तेरे साथ?” उनके स्वर में नाराज़गी दिखी।
नहीं ऐसा कुछ नहीं। बल्कि……ओह हो गया कबाड़ा! मैं उन्हें चिंता में नहीं डालना चाहती। मैं तो बस यही चाहती थी कि उन पलों में किसी अपने का साथ मिल जाता।
“एना! तुम मुझे चिंता में डाल रही हो।”
“मैंने एक बड़ी सांस ली। मैं उस पर फिदा हूं पर वह मेरी टाइप का इंसान नहीं है और पता नहीं कि हम एक हो भी पाएंगे या नहीं?”
“ओह डार्लिंग! काश मैं वहां तुम्हारे साथ होती। सॉरी! मैंने तुम्हारी ग्रेजुएशन भी मिस कर दी। खैर, हनी! मर्द थोड़े अलग किस्म के और चालबाज़ होते हैं। ये बिल्कुल अलग तरह की प्रजाति है। तुम उसे कब से जानती हो?”
क्रिस्टियन तो सचमुच बिल्कुल ही अलग तरह की प्रजाति है। एक अलग ग्रह का बाशिंदा।
“ओह! करीब तीन हफ्ते हो गए।”
“एना डार्लिंग! तुम इतने कम समय में किसी इंसान को कैसे पहचान सकती हो? उसके साथ सहजता से पेश आओ और जब तक यह तय न कर लो कि वह तुम्हारे लायक है भी या नहीं, उसे खुद से एक हाथ की दूरी पर ही रखो।”
वाउ……मॉम तो अंतर्यामी हैं पर उन्होंने ये बात बताने में काफी देर कर दी। क्या वह सचमुच मेरे लायक है? ये भी बड़ी दिलचस्प खोज होगी। मैं तो हमेशा से यही सोचती आई हूं कि क्या मैं उसके लायक हूं।
“हनी! तुम उदास लग रही हो। घर आओ-हमारे पास कुछ दिन के लिए आ जाओ। मैं तुम्हें बहुत याद करती हूं। बॉब को भी खुशी होगी। तुम्हें थोड़ी दूरी से उसके बारे में सोचने का मौका मिल जाएगा। तुम्हें ब्रेक चाहिए। काफी कड़ी मेहनत करती आ रही हो।”
ओह वाह! सुनकर ही कितना अच्छा लग रहा है। मैं जार्जिया भाग जाऊं? कुछ कॉकटेल के साथ सूर्यस्नान का आनंद! मेरी मॉम की हास्यप्रियता…उनकी स्नेही बांहें!
“सोमवार को सिएटल में दो इंटरव्यू हैं।”
“ओह! ये तो अच्छी खबर है।”
तभी दरवाजा खुला और केट ने मुझे देखकर दांत निपोरे। उसने मुझे रोता देख तो अचानक उसका चेहरा लटक गया।
“मॉम! मैं चलती हूं। वहां आने के बारे में सोचूंगी। थैंक यू”
“हनी, प्लीज़। उस इंसान से ज़रा दूरी ही रखना। तुम अभी छोटी हो। जाओ और मज़े करो।”
“हां मॉम! लव यू।”
“ओह एना! मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूं। हनी, अपना ध्यान रखना।” मैंने फोन रखकर केट को देखा, जो हैरानी से मुझे ही घूर रही थी।
“क्या उस बेहूदे दौलतमंद भड़वे ने फिर से कुछ कहा?”
“नहीं……मतलब……हां”
“एना! उसे दफा कर दे। जबसे तू उससे मिली है, तेरी जिंदगी में इतने उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। मैंने तो तुझे आज से पहले इस तरह कभी नहीं देखा।” कैथरीन कैवेना के शब्द बिल्कुल साफ तरीके से काले-सफेद रंग के साथ अपनी बात कह रहे थे। वे ग्रे के रहस्यमयी, अमूर्त और अनजाने रंगों से मेरी दुनिया को नहीं रंग रहे थे। मेरी दुनिया में स्वागत है!
“बैठो। ज़रा बात करते हैं। मैं थोड़ी वाइन लाती हूं। ओह! तो तुम शैंपेन ले चुकी हो।” उसने बोतल को देखकर कहा।
मैं उसे देखकर मुस्कुराईं। थोड़ा ध्यान से बैठना पड़ा। उस जगह पर..
“क्या तुम ठीक हो?”
मैंने अपने शरीर को ढीला छोड़कर काउच पर पसरने दिया।
उसने मेरे इस तरीके पर हैरानी नहीं जताई क्योंकि मैं वाशिंगटन स्टेट के सबसे ज्यादा बेहूदे और बेतरतीब किस्म के लोगों में से हूं। कभी सोचा नहीं था कि यही बेहूदगी इस तरह काम आएगी। फिर मैंने अपना ध्यान केट की ओर लगाना चाहा पर उससे पहले हीथमैन की ओर चला गया – अगर तुम मेरी जगह होती तो आज जो हरकत तुमने की है, तुम एक हफ्ते तक बैठने लायक न रहतीं। जब उसने ये कहा था, तब मैं उसका होने के सिवा किसी और बात पर ध्यान ही नहीं दे सकी थी। वह तो बार-बार चेतावनी दे रहा था, मैं ही इतनी अनाड़ी निकली कि किसी भी नोटिस को गंभीरता से नहीं लिया।
केट रेड वाइन और चाय के धुले कप लेकर लौट आई।
“ये ले!”उसने मेरे हाथ में कप पकड़ा दिया। ये बॉली जितनी स्वादिष्ट नहीं है।
“एना! अगर वह वादा निभाने के मामले में टेढा लग रहा है तो उसे भाड़ में जाने दे। हालांकि मुझे भी समझ नहीं आ रहा कि वह तुझसे चाहता क्या है? वहां शमियाने में तो तुझे बाज़ जैसी नज़रों से घूर रहा था। कह सकते हैं कि तुझ पर पूरी तरह से फिदा है पर हो सकता है कि ऐसा दिखावा ही करता हो।”
फिदा? क्रिस्टियन और मुझ पर? “बस दिखावा कर रहा है? हां, यही सच होगा।”
“केट! बात उलझी हुई है। तेरी शाम कैसी रही?” मैंने पूछा।
मैं अब केट से इस बारे में और बात नहीं कर सकती, खासतौर पर और कुछ बताना भी मुश्किल है इसलिए उसके बारे में एक सवाल पूछा और केट चालू हो गई। बैठकर उसकी गप्पें सुनना कितना अच्छा लग रहा है। गर्मागर्म खबर यह है कि ईथन अपनी छुट्टियों के बाद हमारे साथ रहने आ सकता है। बड़ा मज़ा आएगा। पर मुझे नहीं लगता कि क्रिस्टियन इस बात के लिए मंजूरी देगा…खैर! जो भी हो, उसे यह बात माननी ही होगी। मैंने दो कप वाइन लेने के बाद सोने की सोची। आज का दिन बहुत थकाने वाला रहा था। केट ने मुझे गले से लगाया और ईथन को फोन लगाने चल दी।
मैंने दांत साफ करने के बाद लैप ऑन किया। वहां क्रिस्टियन का एक ई-मेल इंतज़ार में था।
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: तुम
डेट: मई 26 2011 23:14
टू: एनेस्टेसिया स्टील
डियर मिस स्टील!
तुम तो सचमुच लाजवाब हो। मैं आज तक तुम जैसी बहादुर, होशियार, सयानी और बुद्धिमान लड़की से नहीं मिला। एक एडविल लो-यह कोई विनती नहीं है। और दोबारा अपनी बीटल मत चलाना। मुझे पता चल जाएगा।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
ओह, मैं अपनी कार दोबारा न चलाअं? मैंने अपना जवाब लिखा:
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: चापलूसी
डेट: मई 26, 2011 23:20
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर मि. ग्रे
चापलूसी आपको कहीं नहीं ले जा सकती पर आप तो हर जगह मौजूद हैं इसलिए आपके बारे में कुछ नहीं कह सकते।
मुझे अपनी बीटल को चलाकर गैराज तक ले जाना होगा ताकि उसे बेचा जा सके। इस बारे में आपका कोई भी बेतुका हुक्म नहीं मान सकती।
एडविल की बजाए रेड वाइन ज्यादा असर दिखाती है।
एना
पी.एस. छड़ी से पीटना मेरे लिए एक कठोर सीमा है।
मैंने सेंड बटन दबा दिया।
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: कुंठित युवती, जिसे अपनी प्रशंशा सुनना भी नही आता
डेट: मई 26, 2011 23:26
टू: एनेस्टेसिया स्टील
डियर मिस स्टील!
मैं कोई चापलूसी नहीं कर रहा। तुम्हें अब सोने जाना चाहिए।
मैं कठोर सीमाओं में तुम्हारी इस सीमा को भी शामिल करता हूं।
ज्यादा शराब मत पीना।
टेलर तुम्हारी गाड़ी बेच कर इसके अच्छे पैसे दिलवा देगा।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: टेलर क्या वह इस काम के लिए सही इंसान है ?
डेट: मई 26, 2011 23:40
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर सर
मैं हैरान हूं कि आप अपने दाएं हाथ कहलाने वाले टेलर को बीटल चलाने जैसे खतरे के लिए भेज रहे हैं और किसी ऐसी युवती को यह खतरा मोल नहीं लेने देंगे, जिसके साथ आप अकसर शारीरिक संबंध बनाते हैं? मैं कैसे यकीन कर सकती हूं कि टेलर मुझे इस कार के लिए अच्छे पैसे दिलवा देगा? वैसे आपको जानने से पहले मैं भी अच्छे मोलभाव करने वालों में जानी जाती थी।
एना
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: सावधान
डेट: मई 26 2011 23:44
टू: एनेस्टेसिया स्टील
डियर मिस स्टील!
मैं समझ सकता हूं कि यह तुम नहीं रेड वाइन बोल रही है और तुम्हारा दिन काफी थकाने वाला रहा।
हालांकि मन तो यही कह रहा है कि वहां आऊं और कुछ ऐसा करूं कि तुम एक शाम की बजाए पूरे सप्ताह तक बैठने के लायक न रहो।
टेलर पहले आर्मी में था और वह मोटर साइकिल से लेकर शरमन टैंक तक कोई भी वाहन चला सकता है। तुम्हारी कार से उसे कोई तकलीफ नहीं होगी।
अब कृपया अपने-आपको एक ऐसी युवती के रूप में प्रस्तुत मत करना, जिसके साथ मैं केवल शारीरिक संबंध बनाना ही पसंद करता हूं क्योंकि इससे मुझे बड़ा गुस्सा आता है और जब मुझे गुस्सा आएगा तो सचमुच तुम मुझे बिल्कुल पसंद नहीं कर पाओगी।
क्रिस्टियन ग्रे
सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: टेलर आप संभल जाए
डेट: मई 26, 2011 23:57
टू: क्रिस्टियन ग्रे
डियर सर
मैं यकीन से नहीं कह सकती कि मैं आपको पसंद भी करती हूं या नहीं, खासतौर पर
इन पलों में…।
मिस स्टील
फॉर्म: क्रिस्टियन ग्रे
सब्जैक्ट: आप संभल जाए
डेट: मई 27, 2011 00:03
टू: एनेस्टेसिया स्टील
तुम मुझे पसंद क्यों नहीं करतीं?
क्रिस्टियन ग्रे सीईओ, ग्रे इंटरप्राइजिस होल्डिंग्स, इंक
फॉर्म: एनेस्टेसिया स्टील
सब्जैक्ट: टेलर आप संभल जाए
डेट: मई 26, 2011 00:09
टू: क्रिस्टियन ग्रे
क्योंकि तुम कभी मेरे पास नहीं ठहरते।
एना
बहुत हो गया। अब जरा वह भी इस बारे में सोचेगा। मैंने एक झटके से लैपी बंद किया।पलंग पर जाने का मन ही नहीं हुआ। मैंने साइड की बत्ती बंद की और छत को घूरने लगी।एक पूरा दिन बीत गया था, एक के बाद एक कितने भावात्मक झटके! रे के साथ समय बिताकर कितना अच्छा लगा। वे अच्छे दिख रहे थे और हैरानी की बात है कि उन्होंने क्रिस्टियन लिए भी मंजूरी दे दी। केट और उसका बड़बोलापन! क्रिस्टियन का भूखे होने के बारे मेंसुनना। ये सब क्या है? और ऊपर से वह कार? मैंने तो अभी तक केट को भी नई गाड़ी के बारे में नहीं बताया। क्रिस्टियन क्या सोच रहा था?
और आज शाम, उसने सच में मुझ पर हाथ उठाया। मुझ पर पूरी जिंदगी में किसी ने हाथनहीं उठाया। मैं किन चक्करों में पड़ गई हूं? केट के आने से थमे हुए आंसू फिर से बहने लगे।मैं किसी ऐसे इंसान को चाहने लगी हूं जो भावात्मक रूप से बिल्कुल ही निराला है। अंदर ही अंदर मैं जानती थी कि उससे दिल लगाकर मुझे दर्द के सिवा कुछ नहीं मिलने वाला। एक ऐसा इसांन
जो खुद ही स्वेच्छा से शरीर से जुड़े नातों में उलझा है। वह ऐसा क्यों है? बचपन में उसने क्या कुछ नहीं झेला होगा, इस सोच ने तो मन को और भी दुखी कर दिया। शायद! अगर वह एक आम इंसान होता तो उसने तुझे पसंद न किया होता, ……मेरी भीतर बैठी लड़की ने भी सताने मेंकसर नहीं छोड़ी। दिल ही दिल में मैं भी जानती थी कि यह बात झूठी नहीं थी। मैंने तकिए में मुंह छिपाया और शायद जिंदगी में पहली बार तकिए में मुंह छिपा कर, फूट-फूटकर रोने लगी।अचानक ही केट की आवाज़ से ध्यान भंग हुआ और मैं अपने गहरे अंधेरे सायों से बाहर आ गई।
“तुम यहां कर क्या रहे हो?”
“खैर! तुम नहीं आ सकते।”
“तुमने उसे कहा क्या है?”
“जब से तुमसे मिली है, हमेशा रोती रहती है।”
“तुम यहां नहीं आ सकते।”
क्रिस्टियन अचानक ही मेरे कमरे में आ गया और लाइट जला दी। मैं अपने ही बिस्तर में उकड़ूं हो गई।
“ओह गॉड! एना…उसने एक ही झटके में दोबारा बत्ती बुझा दी और मेरे पास आ गया।
“तुम यहां क्या कर रहे हो?” मैंने सुबकियों के बीच पूछा। केट दहलीज़ पर आकर खड़ी हो गई।
“क्या तू चाहती है कि मैं इस अहमक को अभी यहां से निकाल बाहर करूं?” उसने पूछा और अपनी पूरी कड़वाहट को ज़ाहिर किया।
बेशक क्रिस्टियन भी उसके इस रूखे और अशिष्ट व्यवहार से हैरान हुआ। मैंने गर्दन हिलाई तो उसने आंखें बांधे नचाई। ओह……मि. ग्रे के सामने ऐसा मत कर।
“अगर ज़रूरत हो तो बस आवाज़ लगा देना। उसने और भी हौले से कहा-तुम मेरी शिट लिस्ट में सबसे ऊपर हो और तुम पर मेरी पूरी नज़र है।” वह फुंफकारी। उसने पलकें झपकाई और केट दरवाजा भड़भड़ाते हुए लौट गई।
क्रिस्टियन मुझे हैरानी से देख रहा है और चेहरा राख जैसा हो गया है। उसने अपनी बारीक धारियों वाली जैकेट पहन रखी है और उसने अपनी जेब से एक रूमाल निकालकर आगे कर दिया। शायद मेरे पास पहले भी उसका एक रूमाल रखा है।
“क्या चल रहा है?” उसने हौले से पूछा।
“तुम यहां क्यों आए हो?” मैंने उसके सवाल को अनसुना करते हुए कहा। आंसू चमत्कारी रूप से सूख गए थे पर सूखी सिसकियों से शरीर अब भी कांप रहा था।
“तुम्हारी देख रेख करना भी मेरे रोल का एक हिस्सा है। तुमने कहा कि तुम मुझे यहां चाहती हो इसलिए मैं आ गया हूं। और तुम यहां इस हाल में बैठी हो।” उसने मुझे देखकर हैरानी से पलकें झपकाईं। “बेशक इस हाल के लिए मैं ही जिम्मेदार हूं पर मुझे इसकी वजह नहीं पता? क्या इसलिए कि मैंने तुम्हें चोट पहुंचाई थी?”
मैंने अपने को ऊपर की ओर उठाया और दर्द से कराह उठी। अब मैं उसकी ओर मुंह करके बैठी थी।
“क्या तुमने एडविल ली?”
मैंने गर्दन हिलाई। उसने आंखें सिकोड़ीं, कमरे से बाहर निकल गया। मैंने उसे केट से बात करते सुना पर यह समझ नहीं आया कि वे क्या बात कर रहे थे। वह कुछ ही मिनट में दवाई और पानी के गिलास के साथ लौट आया।
“ये लो।” उसने पलंग पर बैठते हुए हुक्म दागा।
मैंने वही किया, जो कहा गया था।
“मुझसे बात करो।” वह हौले से बोला। तुमने तो कहा था कि तुम ठीक हो। अगर मुझे लगता कि तुम ऐसे पेश आओगी तो मैं तुम्हें कभी छोड़कर न जाता।”
मैं अपने हाथों को घूरती रही। मैं ऐसा क्या कह सकती थी जो मैंने पहले नहीं कहा था। मैं और चाहती हूं। मैं चाहती हूं कि वह मेरे साथ रहे, वह मेरे साथ इसलिए रहे कि उसका भी मन चाहे। अपनी भूमिका निभाने के लिए साथ न दे। मैं नहीं चाहती कि वह मुझे मारे। मुझे इसमें कोई तुक नहीं दिखती।
“मुझे लगा कि तुम ठीक हो और तुमने कहा भी यही था।”
मैं घबरा गई। “मुझे लगा था कि मैं ठीक हूं।”
“एनेस्टेसिया! तुम मुझसे वही बात करोगी, जो मैं सुनना चाहता हूं? ऐसा नहीं हो सकता। इस तरह तो मैं तुम्हारी बात का भरोसा कैसे कर सकता हूं?” मैंने उसे कनखियों से देखा। वह खाली-खाली निगाहों से मुझे ही घूर रहा था। उसने अपने दोनों हाथ बालों में फिराए।
“जब मैंने तुम्हें पीटा और उसके बाद तुमने क्या महसूस किया?”
“मुझे अच्छा नहीं लगा। मैं चाहूंगी कि तुम दोबारा ऐसा न करो।”
“तुमने कब कहा कि तुम्हें ये पसंद नहीं था?”
“तुम्हें ये सब क्यों पसंद है?” मैंने उसे घूरा।
मेरे सवाल ने उसे हैरत में डाल दिया।
“ओह! तुम सचमुच जानना चाहती हो?”
“मुझ पर भरोसा करो। मैं तो पूरी तरह से सम्मोहित हो गई हूं।” मैं अपने स्वर को व्यंग्य से परे नहीं रख सकी।
उसने फिर से आंखें सिकोड़ीं।”
“संभल जाओ।” उसने चेतावनी दी।
“क्या तुम मुझे फिर से मारोगे?” मेरा रंग पीला पड़ गया।
“नहीं, आज रात नहीं।”
ओह……! मैंने और भीतर बैठी लड़की ने चैन की सांस ली।
“तो।” मैंने कहा
“एनेस्टेसिया! मुझे इस काम से मिलने वाला नियंत्रण बहुत भाता है। मैं चाहता हूं कि तुम एक खास तरीके से पेश आओ और अगर तुम ऐसा नहीं करोगी तो मैं तुम्हें सज़ा दूंगा और तुम मेरे तरीके से पेश आना सीख जाओगी। मुझे तुम्हें सज़ा देने में मज़ा आता है। जब से तुमने मुझे इंटरव्यू में समलैंगिक कहा था, तभी से मैं तुम्हें इस तरह मारना चाहता था।
मैं उस सोच से ही खिसिया गई। ओह! वह सवाल पूछ कर तो मैं खुद अपनी ठुकाई लगाना चाह रही थी। तो इस तमाशे के लिए कैथरीन कैवेना ही दोषी है। अगर उसने इंटरव्यू में जाकर वह सवाल पूछा होता तो आज सूजे हुए नितंबों के साथ वह यहां बैठी होती। मुझे ये सोच पसंद नहीं आई। सब कुछ कितना उलझन से भरा है।
“तो मैं जो हूं, तुम मुझे उसे उस रूप में पसंद नहीं करते?”
उसने फिर से हैरानी से देखा-“मुझे लगता है कि तुम जो हो, बहुत प्यारी हो।”
“तो तुम मुझे बदलना क्यों चाहते हो?”
“मैं तुम्हें बदलना नहीं चाहता। मैं चाहता हूं कि तुम शिष्टता से पेश आओ और उन नियमों पर चलो, जो मैंने तुम्हें दिए हैं और मुझे नीचा मत दिखाओ। बस इतनी सी बात है।” वह बोला।
“पर तुम मुझे सज़ा देना चाहते हो?”
“हां, मैं ऐसा करना चाहता हूं।”
“मुझे यही तो समझ नहीं आ रहा…।”
उसने एक आह भरी और बालों में हाथ घुमाया।
“एनेस्टेसिया! मैं ऐसा ही हूं। मुझे तुम्हें अपने काबू में रखना है। मैं चाहता हूं कि तुम एक खास तरीके से पेश आओ और अगर तुम ऐसा नहीं करतीं तो मैं फिर से तुम्हें यही सज़ा देने का आनंद लेना चाहूंगा।”
ओह! अब कुछ बात बनती दिख रही है।
“तो तुम मुझे तकलीफ़ देने के लिए यह सब नहीं कर रहे?”
उसने थूक निगला।
“हां ज़रा सा! बस यही देखना चाहता हूं कि तुम इसे सह सकती हो या नहीं पर यही पूरा कारण नहीं है। यह हकीकत है कि तुम मेरी हो और मैं किसी भी तरीके से तुम पर अपना नियंत्रण रख सकता हूं। इससे मुझे उत्तेजना मिलती है। एनेस्टेसिया! देखो, मैं बहुत अच्छी तरह से अपनी बात को समझा नहीं पा रहा। दरअसल…आज से पहले मुझे कभी ऐसा नहीं करना पड़ा। मैंने कभी गहराई से इन बातों पर विचार भी नहीं किया। मैं हमेशा से अपनी जैसी सोच वाले लोगों के बीच ही रहा हूं।” उसने माफी मांगने के लिहाज़ में कंधे झटके। “और तुमने अब भी मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया। उस मार के बाद तुम्हें कैसा लगा था?”
मैं उलझन में हूं।
“एनेस्टेसिया! तुमने कामोत्तेजना अनुभव की थी न?”
उसने मुझे कौतूहल से देखा।
उसका यह सवाल मुझे अपने भीतर छिपी उन गहराईयों तक ले गया, जहां अब भी कोई चाह हिलोरें ले रही है।
“मुझे ऐसे मत देखो।” वह बोला।
मैंने त्योरी चढ़ाई। ओह! अब मैंने क्या कर दिया?
“एनेस्टेसिया! इस समय मेरे पास मेरे पैकेट नहीं हैं और तुम परेशान हो। वैसे तुम्हारी सहेली मुझे जैसा दुष्ट समझती है, मैं वैसा हूं नहीं।”
“तो तुमने उलझन महसूस की?”
मैं उसकी नज़रों तले सिकुड़-सी गई।
“तुम मेल लिखते समय तो पूरी ईमानदारी दिखाती हो। उनसे मुझे तुम्हारे मन की बातें पता चल जाती हैं। तुम बातचीत में ऐसा क्यों नहीं कर सकतीं? क्या मुझसे बहुत डरती हो?”
मैंने मां की रजाई पर एक काल्पनिक बिंदु खोज निकाला और वहीं आंखें गड़ा लीं।
“क्रिस्टियन मैं तुम्हें समझ नहीं पा रही। मेरा और तुम्हारा रिश्ता कुछ ऐसा ही है मानो कोई इकारस उड़ते-उड़ते सूरज के बहुत पास आ गया हो।” मैं हौले से बोली।
उसने सांस छोड़ी
“ओह एनेस्टेसिया! तुम बात को गलत तरीके से पेश कर रही हो। तुमने मुझे सम्मोहित कर रखा है। ये तो साफ नहीं दिखता?”
नहीं, नहीं ऐसा कैसे हो सकता है?…भीतर बैठी लड़की मुंह खोले हैरानी से सब सुन रही है। यहां तक कि मेरे साथ-साथ उसे भी इस बात का यकीन नहीं आ रहा।
“तुमने अब भी मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया। प्लीज़ मुझे ई-मेल लिखना। पर अब तो मैं यहां सोना चाहता हूं। क्या मैं यहां रह सकता हूं?”
“क्या तुम सचमुच यहीं रुकना चाहते हो?” मैं अपनी आवाज़ में बसी उम्मीद को छिपा नहीं पाई।
“तुम चाहती थीं कि मैं तुम्हारे पास आ जाऊं।”
तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।
“मैं ई-मेल लिखूंगी।”
उसने खड़े होकर जेब से ब्लैकबैरी, चाबियां, पर्स और पैसे वगैरह निकाले। ओह! मर्दों को भी जेब में कितना सामान लेकर घूमना पड़ता है। उसने घड़ी, जूते, जुराबें, जींस और जैकेट उतारकर कुर्सी पर रख दिए। वह पलंग के दूसरी ओर आया और लेट गया।
“लेट जाओ।” हुक्म मिला।
मैं भी उसे हैरानी से घूरते हुए रजाई में आ गई। वह यहां ठहर रहा है। लगता है कि मैं सदमे से सुन्न हो गई हूं। वह एक कोहनी पर सिर टिकाकर मुझे घूरने लगा।
“अगर रोना चाहती हो तो मेरे सामने रोओ। मुझे पता होना चाहिए।
“क्या तुम चाहते हो कि मैं आंसू बहाऊं?”
नहीं। बस यह जानना चाहता हूं कि तुम क्या महसूस कर रही हो? मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता। लाइट बंद कर दो। हम दोनों को सुबह काम पर भी जाना है।”
तो…अब भी तानाशाही गई नहीं। पर मैं उलाहना भी नहीं दे सकती; जो भी हो वह मेरे साथ मेरे बिस्तर में है। मैं समझ नहीं पा रही; शायद मुझे उसके सामने ज्यादा रोना-धोना करना चाहिए। मैंने पलंग के साथ वाली लाइट बुझा दी।
“अपना मुंह दूसरी ओर करके लेटो।” वह अंधेरे में हौले से बोला।
मैंने यह जान कर आंखें नचाईं कि वह मुझे अंधेरे में देख नहीं सकता पर वही किया जो, उसने करने को कहा। उसने अपनी एक बांह से मुझे घेरा और अपनी छाती के पास खींच लिया।
“सो जाओ बेबी!” वह बोला और मैंने महसूस किया कि वह अपने नाक को मेरे बालों से सटा कर गहरी सांस ले रहा था।
ओह क्रिस्टियन ग्रे मेरे बिस्तर में, मेरे साथ सो रहा है, मैं उसकी बांहों के घेरे में पूरी तरह से आरामदेह और सुरक्षित महसूस कर रही हूं। मैं राहत भरी गहरी नींद में खो गई।
