fifty shades darker novel in Hindi: क्रिस्टियन मेरे पैरों में घुटनों के बल झुका बैठा है और लगातार खाली और ठंडी निगाहों से घूर रहा है, ये नजारा तो हाथ में गन लिए डोल रही लीला के नजारे से भी ज्यादा दिल दहला देने वाला है। एक तो शराब का हल्का नशा और फिर ये सब। मेरी खोपड़ी बुरी तरह से भन्ना गई है। ऐसा लग रहा है कि दिल के कई टुकड़े हो जाएंगे।
मैंने गहरी सांस ली। नहीं, नहीं! ये सब गलत है। बहुत गलत है।
“क्रिस्टियन ऐसा मत करो। मैं ऐसा कुछ नहीं चाहती।”
वह मुझे बिना हिले-डुले उसी तरह देखता रहा।
हाय मेरा बेचारा फिफ्टी! मेरा कलेजा कचोट उठा। मैंने इसकी क्या हालत कर दी। मेरी आंखों से आंसू बहने लगे।
“तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। मुझसे बात करो।” मैंने हौले से कहा।
उसने एक बार पलकें झपकाईं।
“तुम मुझसे क्या कहना चाहोगी?” एक पल को तो उसे बोलते सुनकर अच्छा लगा पर मैं उसे इस तरह बोलते नहीं सुनना चाहती। कभी नहीं!
मेरे गालों से आंसू बहने लगे और उसे लीला की तरह दयनीय दशा में देखकर मेरी बोलती बंद हो गई। एक ताकतवर इंसान जो भीतर से एक छोटे बच्चे की तरह है, जिसे दुनिया की यातना और उपेक्षा का दंश सहना पड़ा…जो खुद को अपनी प्रेमिका और परिवार के प्यार के लायक नहीं मानता… मेरा बेचारा लड़का… सच सोचकर ही मेरा दिल चूर-चूर हो गया।
मेरे दिल में उसके लिए एक साथ तड़प और हमदर्दी पैदा हुई और ऐसा लगा कि कहीं मेरा ही दम न घुट जाए। मुझे उसे वापिस लाना ही होगा। मेरा अपना क्रिस्टियन कहां गया?
मैं तो कभी किसी की मालकिन बनने के बारे में सोच भी नहीं सकती। सोचकर हीजी मिचला जाता है। ऐसा करने से तो मैं उस औरत की तरह हो जाउंगी, जिसने उसके साथ यह सब किया था।
मैंने अपने कंधे झटके। मैं ऐसा करने के लिए सोच भी नहीं सकती। मैं ऐसी नहीं हूं।
मैंने इस मुश्किल हालात से निकलने का एक हल खोज ही लिया। मैं खुद भी उसके आगे घुटनों के बल बैठ गई। बेशक घुटनों पर फर्श से चोट भी लगी पर इस तरह हम दोनों बराबर हो गए। उसे उसके सदमे से निकालने का यही एक तरीका हो सकता था।
उसका एकटक घूरना जारी रहा।
“क्रिस्टियन तुम्हें ये सब करने की कोई जरूरत नहीं है। मैंने तुमसे कहा था न कि मैं कहीं नहीं जा रही। मैंने तुमसे हजारों बार यह बात कही होगी। मैं तो चाहती हूं कि इन सब बातों को पचाने के लिए मुझे थोड़ा वक्त मिल जाए… कुछ वक्त जो मेरा अपना हो। तुम हमेशा बदतर बातों की कल्पना क्यों करते हो?” दिल में दर्द की एक लहर-सी उठी क्योंकिमैं जानती हूं कि उसमें अपने-आप को नीचा और ओछा दिखाने की प्रवृत्ति है।
एलीना के शब्द मेरे कानों में गूंज उठे, क्या वह जानती है कि तुम अपने बारे में कितनी नकारात्मक राय रखते हो? अपने मुद्दों के बारे में क्या सोचते हो?
“ओह क्रिस्टियन! मैं तो आज शाम अपने घर जाने की बात कर रही थी और तुमने मुझे पूरी बात कहने का मौका ही नहीं दिया। मैं सुबकी भरने लगी और उसके चेहरे पर डर के साए लहरा गए।
“सोचने का वक्त चाहिए……अभी हम एक-दूसरे को जानते भी नहीं और तुम्हारी जिंदगी की यह सब बातें…… मुझे इनसे उबरने में वक्त लगेगा… लीला भी अब खतरा नहीं रही इसलिए मैंने घर जाने की बात कही थी।”
वह मुझे देखे जा रहा था इसलिए मान सकते हैं कि सुन भी रहा होगा।
“लीला के साथ तुम्हें देखकर मुझे झटका सा लगा। मैं देख सकती थी कि उसके साथ तुम्हारी जिंदगी कैसी रही होगी……मुझे लगा कि तुम उसी दुनिया के हो। मैं तुम्हारे लायक नहीं और बहुत जल्द ही तुम मुझसे अब जाओगे और मुझे छोड़ दोगे… मेरा भी लीला वाला हाल होगा। मैं भी एकसाया बन रह जाऊंगी क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूं। अगर तुमने मुझे छोड़ दिया तो मेरी दुनिया में अंधेरों के सिवा कुछ नहीं होगा और मैं इसी बात से डर गई हूं……”
मैंने महसूस किया कि उसके सुनने की उम्मीद में ही मैं इतना बोल गई थी। मेरी मुश्किल एक ही है, मुझे समझ नहीं आता कि वह मुझे पसंद क्यों करता है?
“पता नहीं, तुम्हें मैं आकर्षक क्यों लगती हूं। तुम कितने सुंदर, दयालु, दौलतमंद, अच्छे और दूसरों का ध्यान रखने वाले हो और मैं तो कुछ भी नहीं। मैं वह सब नहीं कर सकती, जो तुम्हें पसंद है। वह सब नहीं दे सकती, जो तुम चाहते हो। तुम मेरे साथ खुश कैसे रह सकते हो? मैं तुम्हारा साथ कैसे निभा सकती हूं? मैं कभी समझ नहीं सकी कि तुमने मुझमें क्या देखा। तुम्हें उसके साथ देखते ही मेरे दिमाग में यह सब बातें आई थीं।”
ओह…! उसकी ठंडी नजर! मुझसे बात करो।
समझ नहीं आ रहा कि उसे पास जा कर छू लूं या दूर से ही बात करूं। पता नहीं कि वह मुझसे कहना क्या चाहता है। मैं उसे ताकते हुए इंतजार करने लगी।
मैं इंतजार करती रही।
और इंतजार करती रही।
मैंने एक बार और विनती की। प्लीज़!
अचानक ही उसने पलकें झपकाई।
“मैं बहुत डर गया था।” वह हौले से बोला।
शुक्र है, उसने जुबान तो खोली। भीतर बैठी लड़की ने आरामकुर्सी से पीठ टिकाकर जिन का बड़ा-सा घूंट भरा।
वह अब बात कर रहा है। दिल को सुकन सा आ गया। मैंने अपने को संभालना चाहा पर इसी खुशी में भी आंसू छलक ही गए।
“जब मैंने ईथन को बाहर देखा तो जान गया कि जरूर कोई बात है। तुम अन्दर कैसे गईं। मैं और टेलर कार से लपके। अन्दर तुम हथियारबंद लीला के सामने निहत्थी खड़ी थीं और उस एक पल में मैं हजारों मौतें मर गया। एना, तुम्हें कोई धमका सकता है… मेरा यह डर आंखों के आगे नाच उठा। मैं तुमसे, अपने-आप से, टेलर से… सब से खफा था।”
“पता नहीं था कि वह कैसे पेश आएगी पर उसे एक पल देखने के बाद मैं जान गया कि खराब दिमागी हालत वाली लीला को संभालने का क्या तरीका हो सकता था। मैंने वही किया जो उस समय के हिसाब से मुझे सही लगा। वह हमेशा से ही बहुत चुलबुली और नटखट रही थी…।” उसके बारे में सुनना बिल्कुल नहीं भा रहा था पर इस समय क्रिस्टियन का बोलना जरूरी था।
“… वह तुम्हें चोट पहुंचा सकती थी और ये मेरी गलती होती।” क्रिस्टियन ने कहा और चुप हो गया।
“पर उसने कुछ कहा तो नहीं और ऐसे हालात में तुम्हारी कोई गलती न होती।” मैंने उसे उत्साहित करते हुए कहा
तब मुझे समझ आया कि उसने वह सब मुझे सलामत रखने के लिए और शायद लीला को संभालने के लिए भी किया क्योंकि वह उसकी परवाह करता है। उसने मुझसे कहा कि वह मुझसे प्यार करता है पर उस समय मुझे कितनी रूखाई और कठोरता से मेरे ही घर से निकाल दिया।
“मैं बस यही चाहता था कि तुम खतरे से दूर चली जाओ और तुम वहां से नहीं गईं।” उसने होंठ भींच कर गुस्से से कहा।
देखकर अच्छा लगा। तानाशाही क्रिस्टियन लौट रहा था।
उसने बंद आंखें खोलीं और बोला,”तुम मुझ छोड़कर नहीं गई थीं?”
“नहीं!”
उसने आंखें बंद कीं और पूरा शरीर सुकून से नहा गया। फिर वह आंखें खोल कर बैठ गया। उसके चेहरे पर दुख और उदासी के भाव साफ देखे जा सकते थे।
“मैंने सोचा था कि एना, मैं पूरी तरह से तुम्हारा हूं पर तुम्हें इस बात का एहसास दिलाने के लिए मुझे क्या करना होगा। तुम्हें कैसे यकीन दिला दूं कि मैं तुमसे ही प्यार करता हूं।”
“क्रिस्टियन! मैं भी तुमसे प्यार करती हूं पर तुम्हें इस रूप में देखकर लगता है कि मैं ही तुम्हारी इस हालत की जिम्मेदार हूं।”
“नहीं एना! ये बात नहीं है। तुम तो मेरी लाइफ लाइन हो।” उसने मेरी हथेली चूम कर कहा।
उसने अचानक मेरा हाथ अपनी छाती पर रख लिया। उसकी सांसें गहरा गईं और मैं अपने हाथ के नीचे उसके तेजी से धड़कते दिल को महसूस कर सकती थी।
ओह मेर फिफ्टी! उसने आज मुझे अपने-आप को छूने का मौका दिया है। मेरा अपना दिल बेकाबू हुआ जा रहा है।
उसने मेरा हाथ छोड़ा तो मैं उसे हौले से उसकी छाती पर फिराने लगी। उसने अपनी सांस रोक ली। यह देखकर मैं अपना हाथ हटाने लगी तो वह बोला।
“नहीं!” उसने एक बार फिर से मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया। “हाथ मत हटाओ।”
उसके ये शब्द मेरे दिल के आर-पार हो गए। मैंने एक हाथ से उसकी कमीज के बटन खोले और छाती उघाड़ दी।
उसने थूक निगला और शांत भाव से बैठा रहा। पता नहीं, वह अब भी अपने-आप को गुलाम समझ रहा है या सामान्य हो गया है?
मैं सोचने लगी कि क्या मुझे ऐसा करना चाहिए क्योंकि मैं उसे शारीरिक या मानसिक, किसी भी तरह की यातना नहीं देना चाहती।
मैंने छाती के पास हाथ ले जाकर मन ही मन उसकी इजाजत मांगी।
उसने मेरे मन का प्रश्न भांपकर कहा, “हां!”
मैंने छाती पर हाथ रखा तो उसका चेहरा एक अजीब से दर्द के एहसास से बदल सा गया। यह सब देखना मेरे बस से बाहर था इसलिए मैंने हाथ हटा लिया पर उसने फिर से मेरे हाथ को छाती पर ले जा कर रख दिया।
“नहीं, हाथ मत हटाओ। मैं तुम्हारा स्पर्श चाहता हूं।”
मैंने अपने हाथ को उसकी छाती पर प्यार से रखा और फिर एक मीठा-सा चुंबन दिया। वह एक आह भरकर रह गया। मैंने देखा कि वह मेरे चुंबन को सहन करने की कोशिश कर रहा था। मैंने एक और चुंबन दिया और फिर उसके शरीर पर पड़े उन दागों को एक-एक कर चूमने लगी। मैं जाने कब से ऐसा करने के लिए तरस रही थी।
अगले ही पल हमारे मुंह आपस में मिल गए और हम एक-दूसरे को चूमने लगे। मेरी अंगुलियां उसके बालों में जा गुंथीं। “ओह एना!” अचानक ही मैं फर्श पर उसके नीचे थी। मैंने उसका चेहरा छुआ तो पता चला कि वह रो रहा था।
“ओह! क्रिस्टियन तुम रो रहे हो। प्लीज रोना बंद करो।”
“जब मैंने तुमसे कहा था कि मैं तुम्हें कभी छोड़कर नहीं जाउंगी तो उस बात का कोई मतलब था। अगर मेरी वजह से तुम्हें ऐसा लगा कि मैं जा रही हूं तो इसके लिए तुमसे माफी चाहती हूं… मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जा सकती। मैं तुमसे प्यार करती हूं और करती रहूंगी।”
वह मेरे चेहरे को ताकने लगा और उसकी उदासी से मेरा दम घुटने लगा।
“क्रिस्टियन!”
“बोलो।”
“ऐसा कौन सा राज है जिसके डर से तुम्हें हमेशा यही लगता है कि उसके पता चलते ही मैं तुम्हारे जीवन से दूर हो जाउंगी? क्रिस्टियन प्लीज़ मुझे बताओ ताकि तुम हमेशा के लिए इस डर से आजाद हो जाओ।”
“एना… उसने रूक कर शब्द तलाशे और बोला, “एना! मैं एक परपीड़क यानी सैडिस्ट हूं। मुझे तुम्हारी जैसी भूरे बालों वाली लड़कियों को चाबुक से पीटना पसंद है क्योंकि तुम सब मेरी उस बदजात मां जैसी दिखती हो मुझे यकीन है कि तुम मेरी बात का मतलब समझ गई होगी।” उसने इतनी फुर्ती से ये बात बता दी मानो कितने दिनों से इसे अपने अन्दर दबाकर रखा था।
मेरी तो दुनिया जैसे वहीं थम गई।
मैंने ऐसी बात की तो कभी उम्मीद तक नहीं की थी। मैंने उसकी ओर देखकर उम्मीद की कि शायद उसकी बात का कोई और मतलब समझ आ जाए।
अचानक ही लीला की बात याद आ गई- मास्टर बहुत बुरे हैं।
मुझे प्लेरूम के बारे में उसके साथ हुई पहली बातचीत याद आई।
“तुमने तो कहा था कि तुम सैडिस्ट नहीं हो।” मैंने अपनी बात सामने रखी।
“नहीं एना! मैंने तुमसे कहा था कि मैं डोमीनेंट हूं।” उसने अपने हाथों को गौर से देखा।
शायद उसे मुझसे झूठ बोलने या अपने राज खुलने से डर लग रहा था।
“जब तुमने ये सवाल पूछा था तो मैं तुम्हारे साथ अलग तरह के संबंध रखना चाहता था।” उसने हौले से कहा।
ये बात मेरे दिल से जाकर टकराई। अगर वह सैडिस्ट है तो वह कोड़ों और चाबुकों के बिना कैसे जी सकेगा? ओह! मैंने अपना सिर हाथों में दे दिया।
“तो ये सच है। मैं तुम्हें वह सब नहीं दे सकती, जो तुम्हें चाहिए है। इसका मतलब है कि हमारी जोड़ी बेमेल है।”
अचानक ही मेरी सारी दुनिया चूर-चूर हो गई थी।
नहीं, नहीं! हम एक साथ नहीं रह सकते। हम ऐसा नहीं कर सकते।
उसने भवें सिकोड़ीं, “नहीं एना, नहीं, बिल्कुल नहीं! तुम कर सकती हो। तुमने मुझे वह सब दिया है, जो मुझे चाहिए था।” मेरा भरोसा करो। उसके एक-एक शब्द से विनती झलक रही थी।
“क्रिस्टियन! मैं तो जान नहीं पा रही कि किस बात पर यकीन करूं और किस बात पर यकीन न करूं।” मैंने रुंध गले से कहा और अपने आंसुओं को रोकने की कोशिश करने लगी।
उसने मुझे इस तरह देखा तो उसकी आंखें विस्फारित हो उठीं।
“एना, मेरा यकीन करो। जब मैंने तुम्हें सजा दी और तुम मुझे छोड़कर चली गईं तो जैसे मेरी दुनिया का नजरिया ही बदल गया। जब मैं कह रहा था कि मैं दोबारा ऐसा महसूस नहीं करना चाहूंगा तो मैं मजाक नहीं कर रहा था। जब तुमने कहा कि तुम मुझे चाहती हो तो ये एक बड़ी बात थी। आज तक मुझसे किसी ने ये सब नहीं कहा था। मैं और डॉ. फिल्न अब भी इस बारे में बात करते हैं कि तुम्हारी इस बात से मुझ पर कैसा असर हुआ। मैं शायद उन सब बातों से बाहर आना चाह रहा हूं।”
ओह! मेरे दिल में उम्मीद की किरण जाग गई। शायद हमारे साथ सब ठीक हो जाए। मैं चाहती हूं कि हमारे बीच सब ठीक हो जाए।
मैंने पूछो, “तुम कहना क्या चाहते हो।”
“मैं यह कहना चाहता हूं कि अब शायद मैं यह सब करना ही नहीं चाहता।”
“तुम यकीन से कैसे कह सकते हो?”
“पता नहीं। तुम्हें चोट पहुंचाने के ख्याल से ही मेरा दिल तड़प जाता है।”
“मैं समझी नहीं। तो तुम्हारे कोड़ों, फटकार और सेक्स करने के उन तरीकों का क्या होगा?”
उसने बालों में हाथ फिराया।
“एना! मैं उन भारी-भरकम बेहूदी और उल्टी हरकतों की बात कर रहा हूं। तुम तो उनके बारे में जानती तक नहीं।”
मेरा हलक सूख गया, मैं जानना भी नहीं चाहती।
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“मुझे पता है। अगर तुम वह सब करने देतीं तो सब ठीक रहता पर तुम नहीं चाहतीं इसलिए मैं उनसे बाहर आना चाहता हूं। मैंने कहा था न कि मैं अपने हाथ में सारी ताकत रखना पसंद करता हूं पर तुम्हारे आने के बाद ऐसी कोई जरूरत नहीं महसूस होती।”
मैंने पूछा, “जब हम मिले थे तब तो तुम मुझसे यही सब चाहते थे न?”
“हां बेशक।”
“क्रिस्टियन! क्या मैं तुम्हारे लिए किसी इलाज की तरह रही?”
“नहीं, अभी इलाज नहीं कह सकता……तुम विश्वास नहीं करोगी।”
“हां अब भी मैं यकीन नहीं कर पा रही पर बात थोड़ी अलग-सी है।”
“अगर तुम मुझे छोड़कर न जातीं तो बेशक मैं ये सब महसूस न कर पाता। तुम्हारा जाना मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं रहा। इसी से मुझे एहसास हुआ कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं और जब मैंने कहा था कि मैं हर तरह से तुम्हें अपना बनाना चाहता हूं तो इसमें कोई दो राय नहीं थी।”
मैंने उसे घूरा। मैं तो यकीन नहीं कर सकती। मेरा दिमाग चकरा रहा है और अन्दर ही अन्दर मैं सुन्न पड़ गई हूं।
“तुम अभी तक यहीं हो। मुझे तो लगा था कि तुम्हें यहां से जाते देर नहीं लगेगी।”
“क्यों? क्योंकि मैं सोच सकती हूं कि तुम अपनी मां जैसी दिखने वाली औरतों पर हाथ उठाने वाले कोई मानसिक रोगी हो। तुमने मुझे अपनी बात इसी तरह से समझाई है न?”
वह मेरे कड़े शब्द सुनकर मुरझा-सा गया और बोला,”मैं बात को ऐसे तो न रखता पर ये सच ही तो है।”
उसके भाव देखकर मुझे अपने रूखे बर्ताव पर शर्मिंदगी हुई। मैंने भवें सिकोड़ी और अन्दर ही अन्दर अपराध बोध महसूस करने लगी।
ओह! मैं क्या करने जा रही हूं। मैं अपने फिफ्टी के साथ ये सब क्या करने जा रही हूं?
मुझे उसके बचपन के कमरे वाली उस तस्वीर को याद किया जो उससे मिलती-जुलती थी। शायद वही उसकी मां रही होगी।
मुझे याद आ गया कि मैं भी उसके जैसी ही दिखती हूं। उ फ! ये सब क्या है।
वह मुझे लगातार ताकते हुए यह जानने की कोशिश में है कि मैं क्या करने वाली हूं।
उसने मुझसे कहा कि वह मुझे प्यार करता है पर मैं अभी उलझन में हूं।
ये सब बर्दाश्त के बाहर है। उसने मुझे लीला के बारे में तो यकीन दिला दिया पर अब भी मैं जानती हूं कि वह चाहती तो उसे अपने बस में कर लेती। ये सोच ही मन को कड़वाहट से भर गई।
“क्रिस्टियन! मैं थक गई हूं। क्या हम कल इस बहस को जारी रख सकते हैं? मुझे सोने जाना है।”
“तुम जाना नहीं चाहतीं?” उसने हैरानी से पूछा।
“क्या तुम चाहते हो कि मैं चली जाऊं?”
“नहीं! मैंने सोचा था कि तुम सब जानने के बाद मुझे छोड़कर चली जाओगी।”
उसे लगता था कि उसका काले राज मेरे सामने आते ही मैं उसे छोड़ दूंगी। अब जबकि मैं सब जानती हूं पर फिर भी…।
क्या मुझे चले जाना चाहिए? एक बार उसे छोड़ा था तो मेरी अपनी क्या हालत हो गई थी… मैं उससे प्यार करती हूं… मैं सब जानने के बाद भी उसे चाहती हूं।
“मुझे छोड़कर मत जाना।” वह हौले से बोला।
ओह! मैं रोते हुए चिल्लाई, “मैं कहीं नहीं जा रही।”
“सच?” उसकी आंखें चौड़ी हो गईं।
“मैं तुम्हें कैसे यकीन दिला दूं कि मैं कहीं नहीं जाने वाली। मैं कह क्या सकती हूं?”
“तुम एक काम कर सकती हो?”
“क्या कर सकती हूं?”
“मुझसे शादी कर ला”
क्या? क्या… उसने ये कहा..
आधे घंटे में दूसरी बार ऐसा हुआ मानो मेरी दुनिया कहीं थम सी गई हो।
हाय! मैंने उस बिखरे हुए इंसान को देखा, जिसे मैं दिल से चाहती हूं। मैं तो उसके कहे पर यकीन नहीं कर पा रही।
शादी? वह मुझसे शादी की बात कर रहा है? क्या वह मजाक कर रहा है? मेरे भीतर से हंसी का एक बबूला सा उठा। मैंने अपनी हंसी रोकने के लिए होंठ काट लिया और जब रहा नहीं गया तो वहीं फर्श पर लेट गई और इतना खुल कर हंसी, जितना सारी जिंदगी में नहीं हंसी थी।
एक पल के लिए एक खिलखिलाती लड़की और बेचारगी के एहसास से भरा लड़का आंखों के आगे आ गए। अगले ही पल मैं आंखों पर हाथ रखे जोर-जोर से रोने लगी।
नहीं-नहीं… ये तो हद हो गई।
जब मेरा हिस्टीरिया थमा तो क्रिस्टियन ने हौले से मेरी बांह हटा दी। उसने मेरे चेहरे पर पड़ा आंसू पोंछा और बोला, “मिस स्टील! आपको मेरा प्रस्ताव इतना मजाकिया लगा?”
मैंने दुलार से उसे सहलाया। ओह! मैं उससे कितना प्यार करती हूं।
“एना! क्या मुझसे शादी करोगी?”
मैं उठ बैठी और घुटनों पर हाथ टिकाकर, उसकी आंखों में झांकते हुए उससे बोली,
“क्रिस्टियन मैं अभी कुछ समय पहले तुम्हारी पुरानी पागल दोस्त से मिली जो हाथ में गन लिए डोल रही थी। फिर मुझे मेरे ही घर से निकाला गया। अब तुमने अपने सारे रंग एक साथ दिखाए।”
उसने कुछ कहने को मुंह खोला पर मैंने उसके मुंह पर हाथ रखकर, उसे चुप करा दिया।
“तुमने अभी-अभी अपने बारे में ऐसी जानकारी दी है, जिसने मेरा दिल दहलाकर रख दिया है और अब तुम शादी करने के लिए कह रहे हो?”
उसने अपनी गर्दन हिलाई मानो बातों को हजम करना चाह रहा हो। शुक्र है, वह सामान्य अवस्था में लौट रहा है।
“हां, मेरे हिसाब से तुमने ताजा हालात का बड़ा अच्छा ब्यौरा दिया है।” वह बोला।
“धीरे-धीरे संतुष्टि पाने वाले विचार का क्या हुआ?” मैंने कहा।
वह बोला, “एना! अब मैं बदल गया हूं और उस विचार को भी त्याग दिया है।”
“देखो क्रिस्टियन, मैंने तुम्हें अभी तीन मिनट पहले ही जाना है और अभी बहुत कुछ जानना बाकी है। मैंने पी रखी है, मुझे भूख लगी है, थकान महसूस हो रही है और मैं सोना चाहती हूं। मुझे तुम्हारे प्रस्ताव पर उसी तरह सोचना होगा, जैसे अनुबंध के बारे में सोचा था।” मैंने बात का रंग बदलने के लिए साथ में यह भी जोड़ दिया- “यह कोई बहुत अच्छा रोमानी प्रस्ताव नहीं था।”
“ओह मिस स्टील! हमेशा की तरह काम की बात कही। तो यह एक इंकार नहीं है?”
मैंने आह भरी, “मि. ग्रे! यह एक इंकार नहीं है पर यह एक हां भी नहीं है। तुम सिर्फ डर के मारे ऐसा कह रहे हो और तुम्हें मुझ पर भरोसा नहीं है।”
“नहीं, मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि अब मैं किसी ऐसी लड़की से मिल चुका हूं, जिसके साथ मैं अपनी पूरी जिंदगी बिताना चाहूंगा।”
ओह! मेरा दिल जैसे धड़कना ही भूल गया। ये बंदा ऐसे अजीब हालात के बीच भी इतनी रोमानी बात कैसे कह गया! मेरा मुंह सदमे के मारे खुला रह गया।
मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरे साथ ऐसा होगा।
मैं उसे देखती रही और वह सही शब्दों की तलाश में लगा रहा।
“क्या मैं इस बारे में सोच सकती हूं… प्लीज! मैं आज की सारी घटनाओं के बारे में सोचने के लिए वक्त चाहती हूं। तुमने ही तो मुझसे धीरज और वक्त मांगा था। ग्रे! मैं भी तुमसे यही चाहती हूं।”
वह आगे झुका और बालों की लट कानों के पीछे कर दी।
“मैं समझ सकता हूं। यह सब रोमानी नहीं था। प्यार-मुहब्बत वाली अदा नहीं थी।” वह मुस्कराया।
मैंने स्वीकृति दी तो वह बोला।
“क्या तुम्हें भूख लगी है?”
“हां।”
“तुमने कुछ खाया नहीं?” उसके जबड़े सख्त हो आए।
“नहीं, कुछ नहीं खाया। जब मुझे मेरे ही घर से निकाला गया और मैंने अपने ब्वायफ्रेंड को उसकी पुरानी दोस्त के साथ घुल-मिलकर बैठे देखा तो बेशक भूख तो हवा हो गई थी।”
क्रिस्टियन ने फर्श से उठने में एक पल की भी देर नहीं की।
शुक्र है! हम यहां से तो उठे।
“मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने का इंतजाम करता हूं।
“क्या मैं सोने नहीं जा सकती। बहुत नींद आ रही है।”
उसने मुझे हाथ दे कर उठाया और बोला, “भूखे पेट नहीं सोने दूंगा।”
तानाशाह बॉस लौट आया है।
वह मुझे किचन में ले गया और एक स्टूल पर बिठा दिया। फिर वह फ्रिज में खाने के लिए कुछ खोजने लगा। मैंने घड़ी देखी, रात के साढ़े ग्यारह बजे हैं और सुबह ऑफिस भी जाना है।
“क्रिस्टियन! मुझे सुबह काम पर भी जाना है।”
उसने मेरी बात को अनसुना कर पूछा, “चीज़?”
“अभी नहीं।”
“प्रेटजेल्स?”
“नहीं, बिल्कुल नहीं।”
वह मेरी ओर मुड़ा, “तुम्हें ये पसंद नहीं हैं?”
“नहीं, इस समय रात को नहीं, मैं सोने जा रही हूं। तुम मजे से सारी रात फ्रिज का दौरा करो। मुझे थकान हो रही है और वैसे भी आज का दिन बहुत भारी रहा। एक ऐसा दिन, जिसे मैं भुलाना चाहती हूं।” उसने मुझे घूरा पर मुझे परवाह नहीं है। मैं सोने जा रही हूं।
“मैकरोनी और चीज़!” उसने सिल्वर फॉयल से ढ़का एक सफेद डोंगा उठाकर पूछा। उसका चेहरा कितना मासूम दिख रहा था।
“तुम्हें मैकरोनी और चीज़ पसंद है?” मैंने पूछा।
उसने हां कहा और मेरा दिल पिघल गया। वह अचानक कितना छोटा दिखने लगा है। किसने सोचा होगा कि क्रिस्टियन को बच्चों का खाना पसंद है।
“तुम लोगी?” उसने बड़ी उम्मीद से पूछा। मैं मना नहीं कर सकी और भूख भी तो लगी है।
मैंने एक कमजोर सी मुस्कान के साथ सिर हिलाया। उसने डोंगे को माईक्रो वेव में लगा दिया। मैं स्टूल पर बैठी, इस इंसान को लगातार देख रही हूं। मि. क्रिस्टियन ग्रे, जो मुझसे शादी करना चाहते हैं। वह कितनी आसानी से रसोई के छोटे-मोटे काम कर रहा है ताकि मुझे कुछ खिला सके।
“तो तुम्हें यह काम करना भी आता है”
“हां, थोड़ा-बहुत तो कर ही लेता हूं।”
मैं तो यकीन नहीं कर सकती कि यही बंदा आधे घंटे पहले, मेरे आगे घुटनों के बल बैठा था। उसने प्लेटें लगाईं और मैट्स भी सजा दिए।
“बहुत रात हो गई।”
“कल काम पर मत जाओ।”
“कल तो जाना पड़ेगा। जैक न्यूयार्क जा रहा है।”
क्रिस्टियन ने भवें सिकोड़ीं, “क्या तुम भी इस वीकएंड पर जाना चाहती हो?”
“मैंने मौसम की भविष्यवाणी देखी है। बारिश हो सकती है इसलिए जाना नहीं चाहती।”
“ओह, तो क्या करना चाहती हो?”
तभी हमारा खाना गर्म होने का संकेत मिला।
“अभी तो मैं अपने लिए एक पूरा दिन चाहती हूं। ये सब बातें……इन्होंने मुझे हलकान कर दिया है।”
क्रिस्टियन ने प्लेटों में मैकरोनी परोसी और उसकी खुशबू से ही मुंह में पानी भर आया।
“लीला वाली बात के लिए सॉरी!” वह हौले से बोला।
“तुम सॉरी क्यों कह रहे हो?” मैकरोनी मेरे मुंह में मजे से घुल रही है।
“बेशक तुम्हें तो उसे अपने घर में इस तरह देखकर, बुरी तरह से सदमा लगा होगा। टेलर ने पहले सब देखा था। तब सब ठीक था। वह बहुत शर्मिंदा महसूस कर रहा है।”
“मैं टेलर को दोष नहीं देती।”
“हां, इसमें टेलर की कोई गलती नहीं है। वह बाद में तुम्हें खोजता रहा।”
“पर क्यों?”
“मुझे पता नहीं था कि तुम कहां हो। तम गाड़ी में अपना पर्स और फोन छोड़ गई थीं। हम कैसे पता करते। तुम कहां चली गई थीं?”
“ईथन और मैं सड़क पार वाले बार में थे ताकि घर पर भी नजर रख सकें।”
“अच्छा।” हमारे बीच का हल्का माहौल अचानक ही फिर से बदल गया।
ओह! मैंने बिल्कुल बेलाग भाव से पूछ लिया, “तुमने लीला के साथ अपार्टमेंट में क्या किया?” मैंने उसे देखा और उसका मेकरोनी से भरा चम्मच हवा में ही रह गया।
“तुम सचमुच जानना चाहती हो।”
मेरे पेट में खलबली सी होने लगी। “हां, क्या तुम बताना चाहते हो?”
भीतर बैठी लड़की खाली जिन की बोतल फेंककर आराम कुर्सी पर बैठी मुझे एकटक घूर रही है।
क्रिस्टियन का चेहरा सपाट हो आया और वह हिचककर बोला, “हमने बात की और मैंने उसे नहलाया। मैंने उसे तुम्हारे ही कुछ साफ कपड़े पहना दिए। उम्मीद करता हूं कि तुम बुरा नहीं मानोगी। वह बहुत गलीज़ हुई पड़ी थी।”
हाय! उसने उसे नहलाया!
इसने यह क्या किया। मैं अपनी प्लेट को ताकते हुए भन्ना रही हूं।
मेरे दिमाग का एक हिस्सा समझाना चाह रहा है कि उसने इंसानियत के नाते ऐसा किया होगा क्योंकि उसे नहलाने की जरूरत थी पर जलन का मारा दिल कुछ सुनने को राजी नहीं है।
दिल में तो आया कि बड़े-बड़े आंसू टपका कर रोने लगूं पर किसी तरह अपने को संभाला। वे आंसू मेरा गला घोंटने लगे
“एना! मैं उसके लिए यही कर सकता था।” उसने कहा।
“तुम्हारे मन में अब भी उसके लिए भावनाएं हैं?”
“नहीं।” उसने एकदम कहा और आंखें बंद कर लीं। उसके चेहरे पर दुख के भाव तिर आए। मैंने मुड़कर अपने खाने को देखा। उसे देखने को भी दिल नहीं चाह रहा।
“मैंने उसके लिए वही किया, जो एक इंसान दूसरे के लिए करता।” उसने कहा।
ओह! अब वह मेरी हमदर्दी भी चाहता है।
“एना मेरी ओर देखो।”
मैं नहीं देख सकती। मुझे पता है कि उसे देखते ही मेरे आंसू संभालने मुश्किल हो जाएंगे। ऐसा लगता है कि मेरे भीतर भावनाओं का गुबार इकट्ठा होता जा रहा है। वहां अब कोई और जगह नहीं बची। मैं अब कोई बकवास सुनने के लिए तैयार नहीं हूं। अगर मैं बिफर गई तो बहुत बुरा नतीजा होगा।
क्रिस्टियन ने अपनी सेक्स गुलाम को निर्वस्त्र नहलाया और अब वह इसे इंसानियत का नाता कह रहा है।
“एना।”
“क्या?”
“इस बात का गलत मतलब मत निकालो। मैं तो एक टूटे और बिखरे बच्चे जैसी युवती को संभालने की कोशिश कर रहा था।”
हुंह! ये किसी बच्चे की देख रेख के बारे में जानता ही क्या है। ये सब एक ऐसी औरत के साथ, जिसके साथ उसने कामुकता से भरे यौन संबंध बनाए हुए थे। अचानक ही ऐसा लगा कि थकान के मारे वहीं गिर जाऊंगी। मुझे नींद चाहिए।
“एना……एना प्लीज़!”
“क्रिस्टियन!!! ये एना प्लीज़, प्लीज़ की रट लगाना बंद करो।” मेरे चिल्लाते ही टप-टप आंसू टपकने लगे। आज के लिए बहुत हो गया। मैं सोने जा रही हूं। मैं भावात्मक रूप से भी थक गई हूं। मुझे मेरे साथ अकेला छोड़ दो।
मैं मुड़ी और सोने के कमरे की ओर भागती चली गई। क्रिस्टियन की हैरानी और सदमे से खुली आंखें मेरे आगे नाच रही थीं। मैंने एक ही मिनट में अपने कपड़े उतारे, उसकी टी-शर्ट ली और बाथरूम में चली गई।
शीशे में खुद को देखा तो जैसे पहचान ही नहीं सकी। मैं वहीं फर्श पर गिर गई और खुद को रोक नहीं पाई। गालों से लगातार आंसुओं की झड़ी लग गई।
