Why Kolkata is called the ‘Science City of India’
Why Kolkata is called the ‘Science City of India’

Overview:कोलकाता के ऐतिहासिक सफर, संस्थानों और इनोवेशन कल्चर पर एक विस्तृत नजर

कोलकाता को ‘भारत का साइंस सिटी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह ऐतिहासिक संस्थानों, प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, मजबूत रिसर्च कल्चर, उन्नत शिक्षा प्रणाली और विज्ञान को आम जन-जन तक पहुंचाने की क्षमता का केंद्र है। यहां की वैज्ञानिक ऊर्जा ने देश में शिक्षा, तकनीक और नवाचार की दिशा तय की है, और यही कारण है कि कोलकाता आज भी भारत की वैज्ञानिक धड़कन के रूप में पहचाना जाता है।

Why Kolkata Is Called The ‘Science City of India’ : कोलकाता सिर्फ संस्कृति, साहित्य और कला का शहर नहीं है, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक विरासत का भी एक मजबूत स्तंभ है। लंबे समय से इसे ‘साइंस सिटी ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, क्योंकि यहां विज्ञान से जुड़े संस्थान, शोध केंद्र, शिक्षा मॉडल और इनोवेशन की सोच ने देश की दिशा बदलने में अहम योगदान दिया है। यहां की वैज्ञानिक गतिविधियाँ न केवल प्रतिभाओं को निखारती हैं, बल्कि नई खोजों का आधार भी बनती हैं। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों कोलकाता को यह विशेष पहचान मिली और इससे भारत की शिक्षा व नवाचार के क्षेत्र में क्या बदलाव आए।

विज्ञान की ऐतिहासिक राजधानी

The historic capital of science
The historic capital of science

कोलकाता में विज्ञान की शुरुआत आज से नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल से हुई थी। एशिया का पहला आधुनिक विश्वविद्यालय कलकत्ता विश्वविद्यालय, देश की प्रथम विज्ञान संस्थान– इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस (IACS), और प्रसिद्ध बोस इंस्टीट्यूट जैसी संस्थाओं ने विज्ञान को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। यहां जगदीश चंद्र बोस, सी.वी. रमन, सत्येंद्र नाथ बोस जैसे महान वैज्ञानिकों ने अपने खोजकार्य से भारत का नाम दुनिया में रोशन किया।

शोध और आविष्कार का हब

A hub of research and innovation
A hub of research and innovation

कोलकाता में आज भी अग्रणी संस्थान मौजूद हैं—जैसे S.N. Bose National Centre for Basic Sciences, Indian Statistical Institute (ISI), IIT Kharagpur (निकट क्षेत्र) और IICS। इन संस्थानों में हो रहे रिसर्च से चिकित्सा, भौतिकी, गणित, डाटा साइंस और पर्यावरण विज्ञान जैसी कई शाखाओं में महत्वपूर्ण खोजें सामने आती रहती हैं। यहां का मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम इसे अन्य शहरों से अलग खड़ा करता है।

भारत की विज्ञान शिक्षा का केंद्र

कोलकाता की शिक्षा व्यवस्था विज्ञान की समझ को बुनियाद से मजबूत करती है। स्कूल स्तर पर प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक गतिविधियों पर विशेष जोर दिया जाता है। विश्वविद्यालय और संस्थान छात्रों को रिसर्च-ग्रेड लैब, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, फेलोशिप और मेंटरशिप के अवसर उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है कि देश के विभिन्न राज्य और बाहर के छात्र भी उच्च शिक्षा के लिए कोलकाता को प्राथमिकता देते हैं।

साइंस सिटी कोलकाता

कोलकाता की पहचान साइंस सिटी से भी मजबूत होती है—एक विशाल विज्ञान थीम पार्क, जहाँ वैज्ञानिक सिद्धांतों को मनोरंजक तरीके से समझाया जाता है। डायनेमिक हॉल, स्पेस थिएटर, अंडरवॉटर झोन, 3D शो और लाइव साइंस डेमो जैसी गतिविधियाँ बच्चों और युवाओं में विज्ञान के प्रति उत्सुकता जगाती हैं। विज्ञान को सरल और रोचक तरीके से पेश करने की यह पहल पूरे भारत में अनोखी है।

इनोवेशन और स्टार्टअप कल्चर में कोलकाता की बढ़ती भूमिका

पिछले कुछ सालों में कोलकाता में वैज्ञानिक स्टार्टअप्स, टेक इनक्यूबेटर्स और इनोवेशन हब तेजी से बढ़े हैं। डाटा एनालिटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में नई कंपनियां उभर रही हैं। विश्वविद्यालय और निजी संस्थान मिलकर युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए संसाधन और मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। यह शहर को एक उभरते साइंस-टेक हब के रूप में स्थापित कर रहा है।

भारत की वैज्ञानिक सोच पर कोलकाता का व्यापक प्रभाव

कोलकाता ने केवल शोध ही नहीं, बल्कि देश की विज्ञान नीति, शिक्षा और नवाचार संस्कृति को भी प्रभावित किया है। यहाँ से निकले वैज्ञानिकों और शोधों ने भारत की तकनीकी प्रगति को नई रफ्तार दी है। चाहे वह राष्ट्रीय विज्ञान दिवस से जुड़े योगदान हों या नोबेल पुरस्कार विजेताओं की कथाएँ—कोलकाता हर कदम पर विज्ञान की रोशनी फैलाता रहा है।

मेरा नाम वंदना है, पिछले छह वर्षों से हिंदी कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हूं। डिजिटल मीडिया में महिला स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन, बच्चों की परवरिश और सामाजिक मुद्दों पर लेखन का अनुभव है। वर्तमान में गृहलक्ष्मी टीम का हिस्सा हूं और नियमित...