Why do ancestors get angry?
Why do ancestors get angry?

Ancestors Angry: यदि आपके जीवन में आर्थिक कष्टï है सन्तान का पढ़ाई में मन नहीं है सन्तान नालायक है, बेटे-बेटी का विवाह नहीं हो रहा है, व्यापार में हानि हो रही है, हर कार्य में असफलता प्राप्त हो रही है, रोग पीछा नहीं छोड़ रहा है। घर में कलह रहती है तो जान जायें कि पितर (पूर्वज) नाराज हैं। पितरों (पूर्वजों) का अर्थ होता है, मनुष्य के माता-पिता दादी बाबा आदि।

  1. आप सुपत्र होने का धर्म न निभाकर कुपुत्र हो रहे हैं।
  2. आप पितरों (पूर्वजो) के पुत्र-पुत्री के लिये प्रयास न करके केवल अपने परिवार का कल्याण में संलग्न है।
  3. पुत्र होने के नाते अपने जीवन काल में पितरों (पूर्वजों) ने जो सात्त्विक इच्छायें आपको बताकर पूरी करने की आपसे अपेक्षा की थी उनको पूरी न करना।
  4. पितरों (पूर्वजों) द्वारा लिये गये कर्ज आदि को न चुकाना।
  5. सबसे अहम पूर्वज की मृत्यु के बाद उसके जीवित जीवनसाथी जो आपकी मां-पिता, दादी बाबा हो सकते हैं उनका सम्मान सहित पालन पोषण न करना।
  6. पूर्वजों को जिन कार्यों को करने से कष्टï होता था उन्हें ही करना।
  7. बुआ-फूफा, बहन-बहनोई का सम्मान न करके उनसे बैर भाव रखना।
  8. पूर्वजों का श्राद्ध तपर्ण आदि न करना।

पितृ नाराज हैं, इसकी पुष्टिï लग्न कुंडली से भी जानी जाती है कुछ ज्योतिषीय योग निम्न प्रकार हैं-

  1. अष्टïम भाव में सूर्य व पंचम में शनि हो तथा पंचमेष राहु से युतिकर रहा हो और लग्न पर भी पापी ग्रहों का प्रभाव हो।
  2. पंचम में सिंह राशि हो पंचम या नवम भाव में पापी ग्रह हो व सूर्य भी पापी ग्रहों से युत या हष्टï हो तो सन्तान कष्टï पूर्वजों द्वारा दिया जाता है।
  3. कुंडली में शनि लग्न में स्थित हो एवं लग्नेश पर राहु व केतु प्रभाव हो और चन्द्र सूर्य नीच राशि में स्थित हो तो पूर्वज मानसिक परेशानी देते हैं।
  4. शनि अशुभ भावेश होकर चन्द्र से युति या दृष्टिï संबंध बनाये या शनि के नक्षत्र में चन्द्र हो तो भी पूर्वज नाराज होते हैं।
  5. कुंडली में द्वितीय भाव से परिवार धन, पंचम से इष्टï एवं संतान, उच्च शिक्षा नवम् से भाग्य पिता एवं द्वादश से मरने के बाद गति एवं शैश्यासुख आदि का विचार किया जाता है। जब इन भावों के कारकों व भावेशों पर अशुभ पापी ग्रहों का प्रभाव हो, भाव कारक व भावेशनिर्बल, अस्त हो एवं केतु भी नीच राशि का होकर प्रभाव डाल रहा हो तो पूर्वज नाराज होकर परिवार, धन, सन्तान, उच्चशिक्षा, भाग्य गृहकलह आदि देते हैं।
  6. यदि आप उपर वर्णित कष्टïों से मुक्ति चाहते हैं तो जिन समान्य कारणो से पितर (पूर्वज) नाराज हैं उनका परिमार्जन करें तथा ज्योतिष कारणों से ऊऋण होने के लिए निम्न उपाय करें इससे पितर (पूर्वज) प्रसन्न होकर अपनी प्रेममय दृष्टिï से आपका जीवन खुशहाल बना देंगे-
  7. घर में होने वाले प्रत्येक आयोजन में पूर्वजों को याद कर सामर्थ्य अनुसार भोजन, वस्त्र आदि का दान करना।
  8. अमावश्या को दान करें।
  9. दक्षिण दिशा की ओर पैद करके न सोयें।
  10. श्राद्ध पक्ष में विधिपूर्वक श्राद्ध-तपर्ण आदि करें तथा गरीबों, विकलांगों, सफाईकर्मी, गाय, ब्राह्मïणों, कौआ, कुत्ता आदि को भोजन दें।
  11. घर की दक्षिण दिशा में पूर्वजों (पितरों) की फोटो लगायें।
  12. घर के बड़े सदस्यों के प्रतिदिन चरण स्पर्श करें।

मेष- प्रतिदिन पीपल पर सुबह जल चढायें तथा शाम को दीपक जलायें।
वृष- दुर्गापूजन करें व कन्याओं को खीर खिलायें।
मिथुन- किसी गरीब कन्या की मदद करें।
कर्क- दूध का दान करें।
सिंह- अन्नदान करें।
कन्या- गीता का पाठ करें।
तुला- सिन्दूर, तेल का दान करें।
वृश्चिक- गुगुल से हवन करें।
धनु- कुलदेवता देवी की पूजा करें।
मकर- शिव पूजन करें।
कुंभ- गीता पाठ करें।
मीन- हनुमान चालीसा का पाठ करें।