Summary: बच्चे का सम्मान बनाएं रखने के लिए माता पिता उठाएं ये 5 ठोस कदम
किसी कि दी हुई या थोपी हुई सलाह लेने या चुपचाप सुन लेने से अच्छा है, साफ़ तौर पर उसे समझा दें।
Relatives Comment on Parenting: रिश्तेदार और परिवार के कुछ सदस्य कभी न कभी आपके व्यक्तिगत मामलों जैसे बच्चे कि पढाई, उसकी आदतें, या भविष्य को ले कर कोई भी छोटी बड़ी बात को लेकर हस्तक्षेप जरूर करते होंगे। ये एक आम समस्या है, जिसे अक्सर लोग पसंद तो नहीं करते हैं, लेकिन फिर भी ऐसे लोगों को रोकने की कोशिश नहीं करते हैं। बस यही गलती ऐसे लोगों की सोच को बढ़ावा देती है। बेशक आपके उन्हें टोकने का तरीका अपमान रहित होना चाहिए, लेकिन समय रहते ऐसे लोगों को एहसास जरूर दिलाएं ,उनका ऐसा करना आपको पसंद नहीं आ रहा है। अपने बच्चे के लिए आपसे ज्यादा बेहतर कोई और नहीं सोच सकता है , इसलिए उन्हें समझाएं, वो आपके व्यक्तिगत मामलों में दिलचस्पी न दिखाएं। इस तरह के हस्तक्षेप से आपके बच्चे के जीवन में मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में यह जरूरी है कि आप सही तरीके और सही समय पर इस स्थिति का सामना करें
और दूसरों को समझाएं, उनका ऐसा करना किसी भी तरह से ठीक नहीं है।
थोड़ा स्मार्ट बनें

कभी-कभी बच्चों के मामले में रिश्तेदारों द्वारा किए गए हस्तक्षेप को नजरअंदाज करना ही बेहतर रहता है। लेकिन जब ये बात आपके बच्चों के मन में तनाव लाने लगे, तब आपको अपने निजी मामलों को अपने हाथ में ले लेना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति बार-बार आपके बच्चे के किसी भी आदत को लेकर बेवजह रोक-टोक कर रहा है, तो आप स्मार्ट तरीके से अपनी बात को उनके सामने रखें। जिससे सामने वाले को बुरा न लगे, और आप उसकी सीमाएं तय कर सकें।
बच्चे का सम्मान बनाएं रखें
आपके बच्चे का जीवन किसी और के कहने पर ना प्रभावित हो, इस बात का ख़ास ध्यान रखें। कोई भी व्यक्ति जब आपके और आपके बच्चे के रिश्तों के के बीच बार-बार आता है, तो उस समय जरूरी है कि आप अपने अधिकारों को समझें और अपने बच्चे के सम्म्मान का ख्याल रखते हुए सामने वाले को उसकी गलती बताएं । जब आप सामने वाले को उसकी गलती बताएंगे, तब वह समझने का प्रयास करेंगे कि यह आपका व्यक्तिगत मामला है।
नजरअंदाज करें
अपने बच्चों के निजी मामलों में किसी भी व्यक्ति की राय ना लें तो बेहतर है। हर व्यक्ति अपने हिसाब से आपको राय देगा, आपका और उसके सोचने का तरीका अलग होगा। बच्चे को लेकर कोई टिपण्णी करे और आपके रिश्ते के बीच आए ,या अपनी राय ले कर आप पर हावी हो जाए, तब उसे सीधे-सीधे नज़रअंदाज़ करना शुरू कर दें, इस तरह से नज़रअंदाज़ करें कि समाने वाला समझ जाए वो आपकी जिंदगी में मायने नहीं रखता है।
ना कहना सीखें
किसी कि दी हुई या थोपी हुई सलाह लेने या चुपचाप सुन लेने से अच्छा है, साफ़ तौर पर उसे समझा दें। आप अपने बच्चे के वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए अपने पार्टनर के साथ मिलकर बहुत कुछ सोच चुके हैं , इसलिए उसका आपको राय देना आपको बिलकुल पसंद नहीं आ रहा है। अच्छे शब्दों में उसे मना कर दें आगे से आपके व्यक्तिगत मामलों में ना आएं। कभी-कभी चुपचाप सुन लेने से बेहतर है साफ़ शब्दों में ना कह देना।
व्यवहारात्मक दूरी बनाए रखें

अगर परिवार के लोग लगातार आपके व्यक्तिगत मामलों में या आपके पेरेंटिंग के तरीके को ले कर कोई टिपण्णी कर रहे हैं, और समझाने पर भी सुधार नहीं हो रहा है, तो कभी-कभी दूरी बनाए रखना सबसे अच्छा तरीका होता है। यह दूरी रिश्ते को तनाव से बचाकर रखेगी और आप अपने बच्चे के साथ एक अच्छ और सकारात्मक रिश्ता निभा पाएंगे। आपको अपनी निजी-स्वतंत्रता बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि आप रिश्तों को खत्म करें, बल्कि यह सिर्फ समय-समय पर व्यक्तिगत मामलों के लिए स्पेस बनाए रखने की रणनीति है।
