भारत अपने ऐतिहासिक स्मारकों और चौंका देने वाली स्थापत्य कला के लिए मशहूर है। हमारी स्थापत्य कला हमारी समृद्ध जीवनशैली का परिचय देती है। इन्हीं शानदार ऐतिहासिक स्मारकों में शामिल है कर्नाटक के हम्पी का विट्ठल मंदिर। यह मंदिर अद्भुत स्थापत्य कला का उदाहरण है। इसकी कई ऐसी बातें हैं जिन्हें जानकर और देखकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे। इस समर हाॅलीडे में कुछ अलग और बेहतरीन देखना चाहते हैं तो चले आइए हम्पी।
एक मंदिर जहां नहीं हैं भगवान

इस ऐतिहासिक मंदिर से कई किवदंतियां और कहानियां जुड़ी हैं। कहा जाता है कि विजयनगर के राजा रामराय एक बार भगवान विट्ठल के दर्शन करने पंढरपुर में गए थे। भगवान विट्ठल की सुंदर मूर्ति को देखकर वे इतने मोहित हो गए कि उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान उनके साथ विजयनगर चलें। राजा की प्रार्थना और भक्ति भाव देखकर श्री विट्ठल प्रसन्न हो गए और वे विजयनगर आने को तैयार हो गए। जिसके बाद इस सजीव सी दिखने वाली मूर्ति को विजयनगर लाया गया। यहां एक विशाल और सुंदर मंदिर का निर्माण करवाया गया। इसके बाद मूर्ति को यहां प्रतिष्ठित किया गया। लेकिन अपने भगवान के चले जाने से पंढरपुर के भक्त बहुत उदास हो गए। सभी ने भगवान विट्ठल के परम भक्त भानुदास से मूर्ति को वापस लाने की विनती की। कहा जाता है कि भानुदास विजयनगर गए और अपनी भक्ति से भगवान का हृदय परिवर्तन कर दिया। जब राजा को यह बात पता चली तो उन्होंने भानुदास को मूर्ति वापस लौटाने का निश्चय किया। यही कारण है कि हम्पी के विट्ठल मंदिर में भगवान की प्रतिमा नहीं है। यह मंदिर आज भी खाली है।
वास्तुकला का चमत्कार

15वीं शताब्दी में बना यह मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर का कोना-कोना यहां के मूर्तिकारों और कारीगरों की रचनात्मकता को दिखाता है। पूरे मंदिर पर सुंदर मूर्तियां बनी हैं और इसकी दीवारों पर बारीक नक्काशी की गई है। मंदिर के तीन खूबसूरत और विशाल गोपुरम इसके महत्व को दर्शाते हैं। मंदिर कई मंडपों में विभाजित है। यहां देवी मंदिर, रंगा मंडप, कल्याण मंडप, महा मंडप, उत्सव मंडप बनाए गए हैं। महा मंडप में सौ खूबसूरत स्तंभ हैं। मंदिर में बना पत्थर का विशाल रथ इसकी विशेषता है। पूरे रथ पर हो रही बारीक नक्काशी देख आप चौंक जाएंगे।
क्या है इन 56 स्तंभों का राज

मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है यहां बना रंगा मंडप। इस मंडप में ग्रेनाइट के 56 विशाल संगीत स्तंभ हैं। इन स्तंभों को संगीत के सात सुरों यानी सारेगामा स्तंभ के रूप में भी जाना जाता है। इन स्तंभों से संगीतमय स्वर निकलते हैं। स्तंभों को धीरे से थपथपाने से इनके स्वर सुने जा सकते हैं। मुख्य स्तंभ को वाद्य यंत्र का रूप दिया गया है। प्रत्येक मुख्य स्तंभ सात छोटे स्तंभों से घिरा है। खास बात ये है कि इन छोटे स्तंभों से भी अलग-अलग संगीतमय स्वर निकलते हैं, जो किसी आश्चर्य से कम नहीं हैं। इन स्तंभों से इतने मधुर स्वर कैसे निकलते हैं, ये राज आजतक सुलझ नहीं पाया है। लेकिन हम ये जरूर कह सकते हैं कि सदियों पहले वास्तुशिल्प का यह अनोखा उदाहरण है।
