Bhool Bhulaiya Tales
Bhool Bhulaiya Tales

Bhool Bhulaiya Tales: लखनऊ सिर्फ नवाबी तहज़ीब का शहर नहीं है, ये वो जगह है जहां हिस्ट्री ,मिस्टरी और एडवेंचर साथ चलते हैं। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है — भूल भुलैया! बड़ा इमामबाड़ा के भीतर बसी भूल भुलैया कोई साधारण इमारत नहीं, बल्कि एक ऐसी हिस्टॉरिकल पहेली है, जो हर किसी को चौंका देती है।

1784 में नवाब आसफ-उद-दौला ने इसे बनवाया था। इनका मकसद सिर्फ एक खूबसूरत इमारत खड़ी करना नहीं था, बल्कि उस वक्त पड़े भीषण अकाल में लोगों को रोज़गार देना भी था। है ना दिल छू लेने वाली बात? इस भूल भुलैया की बनावट कुछ ऐसी है कि रास्ता ढूंढते-ढूंढते खुद को ही भूल जाओगे!

अगर आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं, या कुछ नया और मजेदार एक्सपीरियंस चाहते हैं, तो लखनऊ की ये गलियाँ आपकी यादों में बस जाएंगी। चलिए जानते हैं वो 5 ज़बरदस्त वजहें, जो इसे बनाती हैं एक मस्ट-विजिट जगह!

एक इमारत, एक इरादा

क्या कोई इमारत सिर्फ खूबसूरती के लिए बनाई गई हो, ऐसा ज़रूरी नहीं। भूल भुलैया इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। नवाब आसफ-उद-दौला ने इसे 1784 में तब बनवाया, जब लखनऊ अकाल से जूझ रहा था। मकसद था – लोगों को रोज़गार देना। दिन में मजदूर इसे बनाते थे, रात में तोड़ते, ताकि काम बना रहे। यह सिर्फ एक इमारत नहीं, एक सामाजिक सोच की मिसाल है। जब आप इसकी गलियों में चलेंगे, तो सिर्फ ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि उस दौर की इंसानियत भी महसूस करेंगे।

1,000 से ज़्यादा रास्ते, 489 दरवाज़े

भूल भुलैया को “भूलने” वाली जगह यूँ ही नहीं कहा जाता! इसमें 1,000 से ज़्यादा रास्ते हैं, और 489 एक जैसे दरवाज़े। हर गली एक जैसी लगती है, जिससे आपका दिमाग चकरा जाता है। यहां बिना गाइड के निकलना एक रोमांचक चुनौती है। बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर किसी को यहां घूमते हुए ऐसा लगता है कि वो किसी फिल्म के रहस्यमयी सेट में हैं। तो अगर आप खुद को ‘दिमाग का खिलाड़ी’ मानते हैं, तो इस भूलभुलैया में कदम रखिए – और अपनी सोच को असली टेस्ट दीजिए!

बिना खंभे की जादूगरी

इस इमारत का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा है – इसका हॉल। यह हॉल इतना बड़ा है कि यहां हजारों लोग एक साथ बैठ सकते हैं, और खास बात ये कि इसे बिना एक भी खंभे के बनाया गया है! ना लोहा, ना लकड़ी – सिर्फ ईंटों और चूने से बना यह स्ट्रक्चर आज भी वैसे ही खड़ी है जैसे 240 साल पहले थी। यहां की हर दीवार एक कहानी कहती है, और हर गुंबद वास्तुकला के कमाल का उदाहरण है। अगर आप आर्किटेक्चर पसंद करते हैं, तो ये जगह आपके लिए किसी खज़ाने से कम नहीं।

दीवारें भी सुनती हैं

भूल भुलैया में एक जगह है, जिसे ‘व्हिस्परिंग गैलरी’ कहा जाता है। यहां अगर कोई एक कोने में धीरे से भी कुछ कहे, तो वो दूसरे कोने में साफ सुनाई देता है। ये जादू नहीं, बल्कि साइंस और डिज़ाइन की कमाल की तकनीक है। इसके अलावा, यहां पुरानी सुरंगों के रास्ते भी हैं, जो कभी दिल्ली और आगरा तक जाते थे। अब भले ही वो बंद हों, लेकिन उनकी मौजूदगी आज भी रोमांच पैदा करती है।

शहर एक नजर में

अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं, तो भूल भुलैया की छत आपके लिए एक ड्रीम स्पॉट है। यहां से आपको पूरा लखनऊ दिखाई देता है – रूमी दरवाज़ा, आसिफी मस्जिद, हुसैनाबाद क्लॉक टॉवर, सब कुछ। यहां से सूरज ढलते हुए देखना एक यादगार नज़ारा बन जाता है। फैमिली के साथ हों या दोस्तों के साथ, ये दृश्य आपको बहुत पसंद आएंगे I

लखनऊ की भूल भुलैया सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो रोमांच, वास्तुकला और इतिहास तीनों का कॉम्बिनेशन है। अगर आप कभी लखनऊ जाएं, तो यहां ज़रूर जाएं – क्योंकि ये एक ऐसी जगह है जो आपको हर मोड़ पर चौंकाएगी और हर कदम पर यादें देगी।

मेरा नाम वामिका है, और मैं पिछले पाँच वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर सक्रिय हूं। विशेष रूप से महिला स्वास्थ्य, रिश्तों की जटिलताएं, बच्चों की परवरिश, और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों पर लेखन का अनुभव है। मेरी लेखनी...