पिरामिड का फर्श चौकोर होता है लेकिन ऊपरी भाग त्रिकोण या नोकदार होती है, इनकी ऊंचाई 400 से 500 फुट होती है। इनकी दीवार ढालू होती है।
–एक अनुमान के अनुसार गीजा के पिरामिड को बनाने में 23 लाख पत्थर के टुकड़ों का इस्तेमाल हुआ है जिनका वजन 2 से 30 टन और कुछ का वजन 45000 किलो तक था। पिरामिड बनाने में 1 लाख मजदूर लगे थे और ये किसी के गुलाम नहीं थे बल्कि हर रोज अपना वेतन लेते थे।
–पूरी दुनिया में कितने पिरामिड हैं यह कहना तो मुश्किल है लेकिन मिस्र में अभी तक 140 पिरामिड खोजें जा चुके हैं। माना जाता है कि पिरामिड जैसा पहला ढांचा आज से 5000 साल पहले मेसोपोटामियंस द्वारा बनाया गया था।
–दुनिया का सबसे बड़ा पिरामिड मिस्र में नहीं, बल्कि मैक्सिको में है, जिसका बेस 1480 फीट का है।
–गीजा का ग्रेट पिरामिड विश्व के प्राचीन सात अजूबों में सबसे पुराना और अकेला है जो अभी भी अस्तित्त्व में है।
– मिस्र के पिरामिडों की उम्र लगभग 5000 साल हो चुकी है लेकिन ये अभी भी सही सलामत है। इनके अभी तक बचे रहने का एक कारण इनमें प्रयोग किया गया मोर्टार पत्थर है जो आम पत्थर से मजबूत होता है।
–कुफु का पिरामिड (जिसे गीजा का ग्रेट पिरामिड भी कहा जाता है) अब तक का सबसे ऊंचा पिरामिड है जिसकी असली ऊंचाई 480.6 फीट थी जो ऊपर से 25 फीट ढह जाने के बाद अब 455.4 फीट रह गई है। यह लगभग 3871 साल तक दुनिया की सबसे ऊंची इमारत रही लेकिन 1311 में इंग्लैंड के लोगों ने 524 फीट ऊंचा गिरिजाघर बनाकर यह रिकॉर्ड तोड़ दिया था।
–ग्रेट पिरामिड धरती का वो सबसे सटीक ढांचा है जो उत्तर दिशा को बताता है। मिस्र के लोगों ने केवल ज्योतिष की मदद से हजारों साल पहले ऐसा कर दिखाया था।
–ग्रेट पिरामिड एक पाषाण (पत्थर)-कंप्यूटर जैसा है। यदि इसके किनारों की लंबाई, ऊंचाई और कोणों को नापा जाए तो पृथ्वी से संबंधित भिन्न-भिन्न चीजों की सटीक गणना की जा सकती है।
–मिस्रवासी पिरामिड का इस्तेमाल वेधशाला, कैलेंडर, सनडायल और सूर्य की परिक्रमा में पृथ्वी की गति तथा प्रकाश के वेग को जानने के लिए करते थे।
–विशेषज्ञों के मुताबिक पिरामिड के बाहर पत्थर के टुकड़ों को इतनी कुशलता से तराशा और फिट किया गया है कि जोड़ों में एक ब्लेड भी नहीं घुसाई जा सकती। मिस्र के पिरामिडों के निर्माण में कई खगोलीय आधार भी पाए गए हैं, जैसे कि तीनों पिरामिड आोरियन राशि के तीन तारों की सीध में हैं। वर्षों से वैज्ञानिक इन पिरामिडों का रहस्य जानने की कोशिश कर रहें हैं, लेकिन अभी तक कोई सफलता नहीं मिली है।
–गीजा के महान पिरामिड की 8 साईड हैं, लेकिन ये सिर्फ आसमान से दिखाई देतीं है।
–ग्रेट पिरामिड की साईड थोड़ी-सी कनकेव लेंस की तरह है। ये एकमात्र ऐसा पिरामिड है जिसमें ये सुविधा है।
–गीजा के ग्रेट पिरामिड और अन्य दो पिरामिडों में कुछ नकली और एक असली दरवाजा था। ये दरवाजा इतने गजब तरीके से बनाया गया था कि 18000 किलो वजन होने के बाद भी यह एक धक्के में खुल जाता है।
–इसे संयोग ही मानेंगे कि लाईट की स्पीड और गीजा के ग्रेट पिरामिड का निर्देशांक दोनों सामान है।
–इसे पिरामिड का जादुई प्रभाव ही कहेंगे कि बाहर बहुत ज्यादा गर्मी होने के बाद भी पिरामिड के अंदर का तापमान हमेशा 20°C रहता है।
–आज से 5000 साल पहले पिरामिड शीशे की तरह चमकते थे क्योंकि इन्हें पॉलिश किए गए सफेद चूना पत्थर से कवर किया गया था। ये सूर्य की रोशनी को रिफ्लेक्ट करते थे और इजरायल की पहाड़ियों से भी दिखाई देते थे और हो सकता है चांद से भी।
–सबसे अधिक पिरामिड मिस्र में नहीं बल्कि सूडान में है।
–12वीं सदी में कुर्दिश राजा अल-अजीज और मिस्र के दूसरे अय्युबिद सुल्तान ने गीजा पिरामिड को नष्ट करने की कोशिश की थी लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हो पाए क्योंकि पिरामिड बहुत बड़ा था।
