सोने की दिशा से भी संवरता है भाग्य: Sleep Direction Vastu
Sleep Direction Vastu

Sleep Direction Vastu: जिस समय सो रहे होते हैं, उस समय हमारा दिमाग और भाग्य जागा हुआ होता है। क्या प्रभाव हैं इसके गर्भावस्था पर, जानिए—

सही दिशा में रखें सिरहाना यदि आपके घर में भी कोई स्त्री मां बनने वाली है तो सबसे पहले आपको उनके पलंग (सोने) की दिशा को ठीक करना चाहिए।

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स्वस्थ और सुरक्षित डिलीवरी के लिए सही दिशा में सोना परम आवश्यक है। गर्भावस्था के दौरान मां और शिशु के अच्छे स्वास्थ्य और आसान व सुरक्षित डिलीवरी के लिए वास्तु शास्त्र में दिए गए दिशा निर्देश अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुए हैं। प्राचीन भारतीय वास्तु शास्त्र के ये सूत्र आजकल के जीवन में भी उतने ही कारगर हैं, जितना कि पुराने समय में रहे। आवश्यकता है तो केवल सही ढंग से समझने और प्रयोग में लाने की।
मां बनना एक स्त्री के जीवन का सबसे अहम और आवश्यक पहलू है। शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में, परन्तु आजकल ज़्यादातर स्त्रियां अपने जीवन के इन विशेष क्षणों का पूरी तरह से आनंद नहीं ले पाती हैं। कारण तनाव, उच्च रक्तचाप जैसी शारीरिक व्याधियां जो गर्भावस्था के दौरान अक्सर प्रकट हो जाती हैं, होती हैं, परन्तु कुछ सरल वास्तु उपायों को अपनाकर आप इन समस्याओं को नज़दीक आने से रोक सकती हैं।

यदि आपके घर में भी कोई स्त्री मां बनने वाली है तो सबसे पहले आपको उनके पलंग (सोने) की दिशा को ठीक करना चाहिए। स्वस्थ और सुरक्षित डिलीवरी के लिए सही दिशा में सोना परम आवश्यक है।
आदर्श रूप में उन्हें अपने घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में सोना चाहिए। इस दिशा में प्राकृतिक रूप से वह शक्ति विद्यमान है, जो गर्भ में पल रहे शिशु को सुरक्षा प्रदान करती है। इस दिशा में सोने से मां और बच्चे को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है, जो स्वस्थ संतति को सुनिश्चित करता है। सोते समय सर को पूर्व या दक्षिण दिशा में ही रखें। ये
उनकी अच्छी नींद व मानसिक शांति प्राप्त करने के साथ-साथ बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में भी मदद करेगा।

यदि दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेडरूम बनाना संभव न हो, तो दक्षिण, पश्चिम या पूर्व-उत्तर-पूर्व में भी सोया जा सकता है, परन्तु पूर्व-दक्षिण-पूर्व में हरगिज़ न सोएं। इस दिशा में सोना रक्तचाप में अवांछनीय उतार-चढ़ाव के खतरे को बढ़ा देता है और होने वाली मां के लिए मानसिक चिंता पैदा कर सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, डिलीवरी के कम से कम एक महीना पहले तो अवश्य ही गर्भवती स्त्री का कमरा दक्षिण-पश्चिम दिशा में शिफ्ट कर देना चाहिए। अपनी 12 वर्षों की वास्तु प्रैक्टिस में मैंने स्वयं इसके अद्भुत लाभ देखें हैं।

मेरी एक नज़दीकी सम्बन्धी को गर्भावस्था में कुछ जटिलताएं पेश आ रही थीं, जिनके कारण उनके डॉक्टर ने उन्हें सिज़ेरियन ऑपरेशन करने की सलाह दी थी। अभी उनकी डिलीवरी में लगभग डेढ़ महीने का समय शेष था, इसलिए मैंने उन्हें अपने अपार्टमेंट की दक्षिण-पश्चिम दिशा में बने बेडरूम में सोना शुरू करने की सलाह दी, जो उन्होंने तुरंत ही मान भी ली। इसका चमत्कारिक परिणाम जल्दी ही देखने को मिला। उनकी डिलीवरी बिल्कुल नार्मल हुई, बिना किसी ऑपरेशन व परेशानी के।

पलंग की दिशा के अतिरिक्त कमरे की दीवारों पर हुए रंग और इंटीरियर डेकोरेशन का भी बहुत प्रभाव पड़ता है। यदि आपका कमरा घर के दक्षिण या दक्षिण-पूर्व दिशा के हिस्से में पड़ता है तो आपको वहां नीले, काले एवं ग्रे रंग का पेंट करवाने से बचना चाहिए। केवल दीवारों के रंग ही नहीं, बल्कि इन रंगों के पर्दे या पेंटिंग्स भी अपना प्रभाव दे सकते हैं। अत: इस दिशा में बने बैडरूम में उन्हें भी न लगाएं।