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Sadhguru learning is a continuous process

Sadhguru learning is a continuous process

एक शिक्षक एक शाश्वत छात्र होता है। जिस क्षण वह छात्र होना बंद कर देता है, फिर वह एक शिक्षक नहीं रह जाता है। यह सीखने की एक निरंतर प्रक्रिया है। शिक्षण करना तुम्हारे विकास के लिए है और इस प्रक्रिया के दौरान किसी और को भी लाभ प्राप्त हो सकता है।

सभी भावनाओं में, जिसे मनुष्य अनुभव कर सकता है, करुणा उत्कृष्टï है। जब कोई करुणा में जीता है, मात्र प्रेम में नहीं, केवल तभी वह एक सच्चा अन्वेष्क होता है, क्योंकि प्रेम बहुत आसानीपूर्वक एक आसक्ति बन जाता है और पक्षपातपूर्ण हो जाता है। तुम्हारे या किसी अन्य व्यक्ति के, या किसी चीज के विरुद्ध, प्रेम एक बेहद प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बन सकता है।

भारतीय संस्कृति में, तुमने कभी अपने माता-पिता को, अपनी पत्नी को, अपने पति को, अपने बच्चों को, आई लब यू नहीं कहा। यह इस संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा है, क्योंकि जिस क्षण तुम यह कहते हो, इसका स्पष्टï अर्थ निकलता है कि यह तुम्हारे अंदर नहीं है। तुम बस इसकी घोषणा करने का प्रयास कर रहे हो। प्रेम कोई घोषणा नहीं है। यह एक विनती है, प्रार्थना है।

पतंजलि ने, इस घोषणा करने वाले और प्रेम करने वाले मन के बीच अंतर बताया है, उन्होंने इसे शुद्ध मन कहा। यह शुद्ध मन क्या है? अभी जिस मन को तुम ढो रहे हो, यह एक संचय है, एक संग्रह है। यह कूड़े का एक ढेर है, जिसको तुमने एक खास समयांतराल में इकट्ïठा किया है। अगर तुम इसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ सकते हो, तभी तुम अपने शुद्ध मन में होते हो। जब तुम अपने शुद्ध मन में होते हो- हो सकता है तुम्हारे जीवन में कुछ ऐसे दुर्लभ क्षण रहे हों जब तुमने अपने शुद्ध मन को चखा हो- उस वक्त सच्चा प्रेम और करुणा तुम्हारे भीतर जागती है।

एक शिक्षक एक शाश्वत छात्र होता है। जिस क्षण वह छात्र होना बंद कर देता है, फिर वह एक शिक्षक नहीं रह जाता है। यह सीखने की एक निरंतर प्रक्रिया है। जैसे ही तुम इस क्षण में स्थिर होते हो, फिर कोई अतीत नहीं होता। सभी चीजें नई होती हैं, सभी चीजें ताजी दिखती हैं। अगर किसी क्षण तुम यह सोचने लगो कि तुम जानते हो और तुम शिक्षा दे सकते हो, इसका अर्थ यह हुआ कि तुम पिछले बोझों को अभी भी ढो रहे हो। हो सकता है कि अभी यह सुविधाजनक हो, लेकिन यही सुविधा कुछ समय के बाद एक भयंकर वेदना बन जाएगी।

ऐसा होगा। मैंने ऐसे लोगों को देखा है, जिन्होंने धीरे-धीरे अपने आप को बरबाद कर डाला। वह व्यक्ति, जो अभी यहां सहज रूप में हो सकता है, उसे बहुत आसानीपूर्वक अतीत के बोझ से निर्बोझ किया जा सकता है। शिक्षण करना तुम्हारे विकास के लिए है और इस प्रक्रिया के दौरान किसी और को भी लाभ प्राप्त हो सकता है। अफ्रीकी परंपरा में एक कहावत है, जब एक सिंह भोजन करता है, तो कई सारे पशु खाते हैं। यह बस इतना ही है। यह कोई सेवा नहीं है जो तुम कर रहे हो।

यह मात्र इतना ही है कि तुमने एक ऐसा मार्ग चुना है कि तुम जब चलते हो, तो कई दूसरे लोगों को भी लाभ होता है। जब तक तुम्हारे भीतर कुछ अपूर्ण रह गया है, जब तक तुम्हारे खुद के अस्तित्व में पूर्ण प्रकाश नहीं हुआ है, ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे वास्तव में तुम शिक्षा में दे सको। ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे दूसरों तक पहुंचाया जा सके। अगर किसी व्यक्ति को विकास करना है तो उसे प्रेम और विनय में विकसित होना होगा।

उसे एक खास शालीनता के साथ विकसित होना होगा, एक शालीनता जो शरीर की नहीं होती, कपड़ों की नहीं होती, किसी बाहरी चीज की नहीं होती, बल्कि एक खास तरह की शालीनता जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। अगर किसी व्यक्ति को इस तरह से विकसित होना है, तो यह केवल तभी आती है, जब जीवन क्षण-क्षण एक निरीक्षण, एक निगरानी बन जाए, एक ऐसी निगरानी जो चुभती है। केवल एक गहरे प्रेम और करुणा द्वारा ही यह सब हो सकता है।

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