sharenting side effects
sharenting side effects

Summary: टीनएजर्स को आत्मनिर्भर बनाने का सही तरीका – सीखें जिम्मेदारी और आत्मविश्वास सिखाने की कला

टीनएज में आत्मनिर्भरता सिखाना बच्चों को जिम्मेदार, आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए तैयार बनाता है। माता-पिता छोटे-छोटे कदमों से जैसे जिम्मेदारियां देना, बजट सिखाना और फैसले लेने की आज़ादी देकर यह गुण विकसित कर सकते हैं।

How to teach self-reliance to teenagers: बच्चों को आत्मनिर्भरता सीखना एक दिन का कार्य नहीं है, यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य तथा समझदारी के साथ काम करने की आवश्यकता है। टीनएज यानी 13 से 19 साल के बच्चे। टीनएज को हम किसी बच्चे के युवा बनने का पहला पड़ाव कह सकते हैं, इस उम्र में बच्चों के अंदर नई चीजों को जानने की जितनी जिज्ञासा होती है, उससे कहीं ज्यादा उनके मन में ढेरों सवाल होते हैं। एक तरह की नई आजादी की चाह होती है, साथ ही उन पर होता है ढेरों दबाव। ऐसे में टीनएज में बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की तरफ माता-पिता एक सकारात्मक कदम उठा सकते हैं, ताकि उनका बच्चा युवा अवस्था में अपने निर्णय खुद लेने तथा उनकी जिम्मेदारी उठाने में सक्षम बन सके। आइए इस लेख में जानते हैं, माता-पिता किस तरह अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

निर्णय लेने की क्षमता का विकास: जब बच्चा आत्मनिर्भर बनता है तो उसकी सोचने तथा निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है। बच्चा सोच समझकर अपना निर्णय खुद ले पता है, उसके अंदर सही तथा गलत में फर्क करने का तार्किक विकास भी होता है।

जीवन के प्रति सकारात्मक विचार: आत्मनिर्भर बच्चा अपने छोटे-छोटे निर्णय स्वयं लेता है तो वह जीवन के प्रति ज्यादा सकारात्मक होता है। वह जीवन में आने वाले सभी परेशानियों का हल सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता है। यह सकारात्मक दृष्टिकोण बच्चों में आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

भविष्य की बेहतर तैयारी: बच्चा भविष्य में जो भी बड़ा करना चाहे उसके लिए तैयारी आज से ही जरूरी है। वर्तमान में आत्मनिर्भरता बच्चों को भविष्य के फैसले लेने में मददगार होती है। बच्चा आगे कॉलेज, नौकरी या जीवन में कैसे आगे बढ़ता है यह उसकी आत्मनिर्भरता पर है।

How to teach self-reliance to teenagers
How to teach self-reliance to teenagers

छोटी जिम्मेदारियां दें: आप अपने बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियां दे जैसे,

वह अपना कमरा खुद से समेट तथा साफ करें।

सुबह उठकर अपना बेड सही करें।

अपना स्कूल बैग, स्कूल ड्रेस, स्कूल जूते खुद से तैयार करें।

सुबह उठने का अलार्म खुद से लगाए और उठे।

बचत और बजट की शिक्षा दें: अपने बच्चों को बचत और बजट की शिक्षा देने के लिए उनका महीने का पॉकेट मनी निश्चित करें और उनसे कहें इतने पैसों में ही तुम्हें अपने महीने के छोटे-छोटे खर्चे देखने हैं। यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम इसे कैसे और कितने दिन में खर्च करते हो या इसे कैसे बचाते हो।

खुद के लिए फैसले लेने दे: बच्चा क्या पहनना चाहता है, वह अपना टाइम टेबल कैसे बनाना चाहता है, इसके फैसले उन्हें लेने दे। उनकी मदद के लिए आप उन्हें विकल्प दे सकते हैं ताकि वह सही फैसला लें।

घरेलू काम भी सिखाए: आज के समय में बच्चों के लिए सिर्फ पढ़ना नहीं घर के छोटे-छोटे काम भी सिखाना जरूरी है ताकि भविष्य में बच्चा कैरियर या जॉब के कारण परिवार से दूर रहने पर भी आसानी से अपने काम कर सके।

डिजिटल आत्मनिर्भरता भी सिखाएं: टीनएज में बच्चों को डिजिटल आत्मनिर्भरता सीखना भी जरूरी है। जैसे, ऑनलाइन फॉर्म भरना, पेमेंट करना, मेल करना ताकि बच्चा खुद को तकनीकी रूप से पीछे ना समझे।

इन छोटी-छोटी लगातार कोशिशें के साथ आप अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...