How to develop emotional intelligence in children
How to develop emotional intelligence in children

Children Emotional Intelligence: वर्तमान समय में किताबि शिक्षा का जितना महत्व है, उतना ही महत्व भावनात्मक शिक्षा का भी है। भावनात्मक शिक्षा वह क्षमता है जिसके विकास से बच्चा ना सिर्फ अपनी भावनाओं को समझ सकता है बल्कि वह दूसरों की भावनाओं को भी समझ सकता है। अगर बच्चों को बचपन से ही अकैडमी एजुकेशन के साथ इमोशनल इंटेलिजेंस सिखाया जाए तो वह भविष्य में न सिर्फ सफल व्यक्ति बनते हैं बल्कि वह ज्यादा संवेदनशील, समझदार और संतुलित व्यक्ति होते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं, किस तरह आप घर पर ही अपने बच्चों को इमोशनल इंटेलिजेंस की शिक्षा दे सकते हैं।

जब बच्चा छोटा होता है तो वह अपने भावनाओं को समझने तथा बताने में असमर्थ होता है। वह अलग-अलग भावनाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं कर पता है। शुरुआत में बच्चा नहीं बता पता कि उसे गुस्सा, डर, निराशा, आश्चर्य कौन सी भावना का वह महसूस कर रहा है। क्योंकि अभी बच्चा इन सभी भावनाओं को सीखने के दौर में होता है।

इस तरह सिखाएं बच्चों को भावनाओं के बारे में

बच्चों से हर रोज उनके मुड़ के बारे में पूछे, उन्हें कैसा महसूस हो रहा है ये जाने। अगर वह कहें, अच्छा लग रहा है तो आप उन्हें बताएं आप खुशी महसूस कर रहे हैं। अगर वह कहें आज क्लास में बच्चे से झगड़ा हुआ और मैंने भी उसे मारा तो आप उसे बताएं उस समय आपके अंदर गुस्से की भावना थी।

इस तरह आप बच्चों के रोजाना के दिनचर्या से उदाहरण देकर उन्हें अलग-अलग भावनाओं के बारे में बता सकते हैं जैसे गुस्सा, डर, खुशी, निराशा।

Children Emotional Intelligence
How to develop emotional intelligence in children Credit: Istock

अक्सर माता-पिता अपने कार्य में व्यस्तता के कारण अपने बच्चों की भावनाओं को अनदेखा करते हैं। जैसे, बच्चों के रोने पर हम उन से यह पूछने की बजाय तुम क्यों रो रहे हो, उन्हें चुप कराना ज्यादा जरूरी समझते हैं। उन्हें चुप कराने के लिए बेशक हमें उन्हें डांटना पड़े।

जब बच्चा अपने माता-पिता का ध्यान आकर्षित करने के लिए जिद या गुस्सा करता हैं तो अक्सर माता-पिता उन्हें डांट कर शांत करवाना चाहते हैं। यह कुछ ऐसे उदाहरण है जिनकी वजह से बच्चा अपनी भावनाओं को दबाता है, ताकि वह माता-पिता के डांट, गुस्से से बच सके।

माता-पिता धैर्य से काम लें तथा अपने बच्चों को समय दें। इससे आपका बच्चा न सिर्फ अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीखेगा बल्कि वह उसे समझेगा भी।

जब बच्चा आपसे बात करता है उस समय उसे इग्नोर ना करें। जब बच्चा अपनी बातों को कहता है तो उसके अंदर भावनात्मक समझ का विकास होता है।

जब बच्चा बोल रहा है तो उन्हें टोके नहीं, पहले उनकी बात पूरी सुने फिर उन्हें आप अपनी बात कहें।

उन्हें बताएं कि जब आपकी कोई बात उन्हें अच्छी ना लगे तो वह आपको कह सकते है ‘मुझे आपकी बात अच्छी नहीं लगी’।

इन छोटे-छोटे टिप्स के साथ आप बच्चों को उनकी भावनाओं के बारे में जागरूक कर सकते हैं।

इमोशनल इंटेलिजेंस भावनाओं को सिर्फ समझने के बारे में नहीं है, बल्कि इमोशनल इंटेलिजेंस के अंदर आप किस तरह से अपनी भावनाओं को नियंत्रित करते हैं यह सीखना भी है।

जब बच्चा गुस्से में हो तो उसे गहरी सांस लेने को कहें। उसे 10 तक गिनती गिनने को कहें तथा उसे प्यार से गले लगाएं। इस तरह बच्चों को शांत करना आसान होगा।

अगर बच्चा गुस्से में है या रोना चाहता है तो ऐसी स्थिति में उसकी भावनाओं को स्वीकारें तथा सहानुभूति के साथ पेश आए।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...