जरूरत से ज्यादा गुस्सा और प्यार दोनों से बिगड़ सकता है बच्चा, ऐसे रखें संतुलन: Manage Love and Affection
Manage Love and Affection

Manage Love and Affection: कहा जाता है कि किसी भी चीज की अति कभी अच्छी नहीं होती है। ना ज्यादा प्यार अच्छा है और ना ही गुस्सा। खासकर पेरेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चे को दुनिया जहान की खुशियां देना चाहते हैं। पेरेंट्स अपने बच्चे से खूब प्यार करते हैं जोकि करना लाजिमी भी है। कभी-कभी पेरेंट्स बच्चों की गलतियों पर गुस्सा भी करते हैं और उन्हें डांट-फटकार लगा देते हैं। क्योंकि गलतियों पर डांटना भी जरूरी है।

लेकिन हर बच्चा एक-दूसरे से अलग होता है और बहुत संवेदशील होता है। आपके डांट और प्यार दोनों का असर उसके हाव-भाव और स्वभाव पर पड़ता है। कई बार तो इसका असर उनके दिल-दिमाग पर भी पड़ता है। इसलिए बच्चे को प्यार करने और उनपर गुस्सा करने में पेरेट्स संतुलन बनाने की जरूरत है। ऐसे में माता-पिता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए आइए जानते हैं।

प्यार और गुस्से बीच संतुलन बनाने के लिए पेरेंट्स खुद से करें ये सवाल

Manage Love and Affection-Parents balance between love and anger with child
Parents balance between love and anger with child

मुझे अपने बच्चे को प्यार दिखाना या न दिखाने के बीच कितना फर्क रखना चाहिए?
बच्चे को कोई चीज कितना और क्यों देना चाहिए?
क्या हम जो बच्चे को दे रहे हैं वह ठीक है या ज्यादा हो रहा है?

जरूरत से ज्यादा प्यार भी नहीं अच्छा

Extra Love
Extra Love

कुछ माता-पिता बच्चों से इतना प्यार करते हैं कि गलतियों पर भी बिल्कुल नहीं डांटते। वो बच्चों की जरूरी और गैरजरूरी दोनों बातों पर मंजूरी दे देते हैं। इसे पैंपर बिहेवियर कहते हैं। जो माता-पिता अपने बच्चों को हद से ज्यादा प्यार करते हैं और गलतियों पर भी नहीं डांटते, ऐसे बच्चे भविष्य में किसी की नहीं सुनते। शुरुआत से ही ऐसे बच्चों की पर्सनैलिटी ओवर डिमांडिंग और गुस्सैल होती है। कई मामलों में तो ऐसे बच्चे ही बड़े होकर अवसाद की गिरफ्त में आ जाते हैं।

इसलिए बच्चों को सही और गलत के बीच फर्क सिखाएं। उन्हें समझाएं कि उनकी जो मांग है वो गलत है। बच्चों के साथ समय बिताकर उनके दोस्त भी बने, जिससे वो बिना डरे आपके साथ अच्छा महसूस करे। अच्छा काम करने पर उसे रिवॉर्ड देने का नियम बनाएं, जिससे बच्चे को पता चले कि उसे अच्छा काम करने पर रिवॉर्ड मिला है।

आपका एग्रेसिव बिहेवियर भी बच्चे के लिए अच्छा नहीं

Passing negative comments
Passing negative comments Credit: Istock

कई बार बच्चे ऐसी हरकत कर देते हैं कि पेरेंट्स को उन्हें डांटना जरूरी हो जाता है और गुस्से में आकर वो कई सारे बातें बोल जाते हैं जो बच्चे के दिल-दिमाग में घर बना लेती है। इसलिए यह ध्यान रखें कि बच्चों पर अधिक गुस्सा करना भी नुकसान दायक साबित हो सकता है। इस मामले में कई बार ऐसा भी होता है कि बच्चा आपसे इतना डर जाता है कि दूरी बनाने लगता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें।

डांटते समय कभी भी बच्चों की तुलना किसी दूसरे बच्चे से न करें। ऐसे में बच्चे के मन में ईष्या और हीन भावना विकसित होती है। खासकर घर पर अगर 2-3 बच्चे हैं तो एक-दूसरे के साथ तुलना बिल्कुन न करें। इन चीजों से बच्चे अकेले में ज्यादा हर्ट होते हैं और अपने ही भाई-बहनों से ईष्या करने लगते हैं।

अगर बच्चे की किसी गलती पर आपको गुस्सा आता है तो उसे मारने से बचें। बच्चे को मारना पेरेंट्स को पूरी तरह से अवॉयड करना चाहिए. ऐसे बच्चे हमेशा सहमे-सहमे से रहते हैं और अपने मन की बात भी पेरेंट्स को कहने से डरते हैं. यहीं से बच्चे और पेरेंट्स के बीच दूरियां बननी शुरू होती है.

आप अपने बच्चे के पेरेंट्स हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे की अच्छी पेरेंटिग और उज्जव भविष्य के लिए आपको उसका दोस्त बनना होगा।

मैं मधु गोयल हूं, मेरठ से हूं और बीते 30 वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और हिंदी पत्रिकाओं व डिजिटल मीडिया में लंबे समय से स्वतंत्र लेखिका (Freelance Writer) के रूप में कार्य कर रही हूं। मेरा लेखन बच्चों,...