Path to Success: प्रत्येक व्यक्ति का अपना कुछ न कुछ लक्ष्य जरूर होता है। कहा जाता है कि लक्ष्यहीन व्यक्ति करता तो बहुत कुछ है, लेकिन वह पाता कुछ भी नहीं है। जिस तरह घड़ी का पैंडुलम हिलता-डुलता तो है मगर पहुंचता कहीं नहीं। इसलिए जीवन में लक्ष्य का होना बहुत जरूरी है। वर्तमान परिवेश में लक्ष्य अत्यधिक होने से लक्ष्य का निर्धारण और अवश्यंभावी हो गया है। ध्येय शब्द लक्ष्य का पर्यायवाची है। गोली चलाने का निशाना लक्ष्य कहलाता है। लक्ष्य को भेदने के लिए या पाने के लिए व्यक्ति का एकाग्रचित होना बहुत जरूरी है। लक्ष्य के प्रति समर्पण की भावना यदि रखी जाए तो लक्ष्य की प्राप्ति का मार्ग सहज, सरल और सुनिश्चत हो जाता है। श्रेष्ठï मस्तिष्क के धनी व्यक्ति श्रेष्ठï लक्ष्य की ओर निशाना लगाते हैं। यह बात और है कि लक्ष्य जितना श्रेष्ठï या बड़ा होता है उसे पाने का रास्ता उतना ही लंबा, कठिन और दुर्लभ होता है।
एक ही लक्ष्य बनकर बैठ जाना बुद्धिमत्ता नहीं है। बस! उस लक्ष्य को प्राप्त कर अगले लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना ही प्रत्येक व्यक्ति का अगला लक्ष्य होना चाहिए। स्वामी विवेकानंद के अनुसार जो अपने लक्ष्य के प्रति पागल हो गया है, उसे ही प्रकाश का दर्शन होता है।
जो थोड़ा इधर-उधर हाथ मारते हैं, वे कोई लक्ष्य पूर्ण नहीं कर पाते। वे कुछ क्षणों के लिए बड़ा जोश दिखाते हैं, किंतु वह शीघ्र ठण्डा हो जाता है। कहने का तात्पर्य है कि लक्ष्य को पाने के लिए जी-जान से जुट जाना पड़ता है। सभी का सहभागी और सहचर बनना पड़ता है। लक्ष्य प्राप्ति के पश्चात् जो प्रसन्नता होती है वह किसी प्रकाश पुंज से कम नहीं होती। लक्ष्य की प्राप्ति अपने आप होना भी संभव नहीं है। लक्ष्य के लिए निरंतर जोश का होना जरूरी है। कुछ क्षणों का जोश लक्ष्य की ओर तो ले जा सकता है मगर लक्ष्य को पाया नहीं जा सकता है। लक्ष्य का निर्धारण कुछ बढ़ाकर किया जाना जरूरी है। सूर्य तक पहुंचने का लक्ष्य बनाने वाले ही चंद्रमा की शीतलता तक पहुंच पाते हैं। किसी भी
क्षेत्र में यदि आप अपने को दूसरे से श्रेष्ठï साबित करना चाहते हैं तो अपना लक्ष्य भी श्रेष्ठï रखिए। यदि अपको कोई लक्ष्य दिया गया है तो आप उससे भी आगे का लक्ष्य चुनिए। आपकी ऐसी कोशिश दिए गए लक्ष्य को तो प्राप्त करवा ही देगी, साथ ही यदि लक्ष्य से अधिक आपने प्राप्त कर लिया हो तो क्या कहना! लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर चिंतन और विचार करना पड़ता है। लक्ष्य को पाना
किसी युद्ध जीतने से कम नहीं होता। अत: पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना चाहिए।
