Lok Mystery: ब्रह्मांड में पृथ्वी के जैसे कितने दूसरे ग्रह हैं, कितनी दुनिया है और मनुष्य के अलावा और कौन-कौन, कहां-कहां निवास करता है, ऐसे ही कई सवाल विज्ञान के लिए भले ही आज भी अनसुलझे हुए हो, लेकिन धर्म शास्त्रों और ग्रंथों में इन सभी के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है। धार्मिक शास्त्रों में पृथ्वी लोक के अलावा अन्य कई लोकों के बारे में बताया गया है। कुछ लोक धरती लोक के ऊपर, तो कुछ नीचे बताए गए हैं। धर्म शास्त्रों में प्रत्येक लोक की लंबाई दस हजार योजन बताई गई है। धरती लोक व पाताल लोक के बारे में तो सभी ने सुन रखा होगा, लेकिन आज हम आपको ऐसे ही अन्य लोकों के बारे में बताएंगे। साथ में यह भी बताएंगे कि इन लोकों में कौन कौन निवास करता है। चलिए जानते हैं धरती के नीचे मौजूद सात लोकों के रहस्य के बारे में।
पृथ्वी के नीचे हैं कुल सात लोक

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, धरती के नीचे जो लोक मौजूद हैं, उनका नाम अतल, वितल, सुताल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल लोक है। अतल लोक के राजा माया के पुत्र बाला कहलाते हैं। बाला इतने मायावी रहे कि उन्होंने 96 प्रकार की माया का निर्माण किया था। इसी प्रकार वितल लोक के स्वामी हटकेश्वर हैं, जो कि भगवान शिव का ही एक रूप है। इस लोक में हटकी नाम की नदी भी प्रवाहित होती है। वहीं, सुताल लोक की कहानी भी बड़ी रोचक है। इस लोक के राजा का नाम बलि हैं। राजा बलि को भगवान विष्णु के वामन अवतार ने सुताल लोक में भेजा था। रसातल लोक में राक्षसों का वास होता है। देवताओं पर अत्याचार करने के बाद इनको रसातल में भेज दिया गया था। तलातल में असुरों के वास्तुकार राजा असुर माया निवास करते हैं। इसी तरह महातल में तक्षक, खुक, कालिया आदि असंख्य जहरीले नाग रहते हैं, जिनकी उत्प त्ति ऋषि कश्यप की पत्नी कद्रु से मानी जाती है।
अंतिम लोक माना जाता है पाताल लोक

पाताल लोक को धरती के नीचे का सबसे अंतिम लोक माना गया है। यहां भगवान के शिव के गले में आभूषण के रूप में धारण वासुकि नाग का वास है। भगवान शिव ने ही वासुकि नाग को पाताल लोक का भार सौंपा था। पाताल लोक में शंड्ड, कुलिक, महाशंड्ड, श्वेत, धनन्जय, धृतराष्ट्र, शंखचूड़, कम्बल, अक्षतर और देवदत्त आदि बड़े क्रोधी और बड़े बड़े फनों वाले सर्प रहते हैं। शास्त्रों में पाताल लोक का रूप स्वर्ग की तर्ज पर बना है। वहीं, यहां शेषनाग का भी वास हैं, जिस पर भगवान विष्णु आराम करते हैं। पाताल लोक के नागों के सिर पर ही सबसे अधिक मणियां पाई जाती हैं, जिनकी चमक सूर्य के समान तेज होती है। यहां सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती, पर मणियों की रोशनी से ही पाताल लोक रोशन रहता है।
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