Kamdhenu Cow: सनातन धर्म में गायों को पूजनीय माना गया है। हिंदू धर्म ग्रंथों में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। सभी गायों में कामधेनु गाय का विशेष स्थान होता है। कामधेनु गाय में 33 कोटि देवता वास करते हैं। इसलिए कामधेनु गाय की पूजा करना भी विशेष फलदायी रहता है। पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि कामधेनु गाय को सुरभि भी कहा जाता है और इसे निर्मलता का प्रतीक भी माना जाता है। कामधेनु गाय में 33 कोटि देवी देवताओं का वास तो रहता ही है, साथ में अलौकिक व चमत्कारी शक्तियां भी रहती हैं। इस गाय के दर्शन मात्र से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और सुख—समृद्धि बनी रहती है। तो चलिए जानते हैं कामधेनु गाय की पूजा का महत्व और इससे जुड़ी रोचक बातें।
कामधेनु गाय का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक धर्म ग्रंथों में कामधेनु गाय का उल्लेख मिलता है। कामधेनु गाय की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय मानी जाती है। हिंदू पुराणों में वर्णन है कि जब देवताओं ने समुद्र मंथन किया, तो उसमें 14 मूल्यवान रत्न प्राप्त हुए थे। उन 14 रत्नों में कामधेनु गाय भी शामिल थी। कामधेनु की उत्पत्ति होने पर सभी देवताओं ने प्रणाम किया और उनको स्वर्ग में स्थान मिला। उस समय कहा जाता था कि जिसके पास भी कामधेनु गाय होती थी, वह सबसे ताकतवर कहलाता था।
कामधेनु गाय की पौराणिक कथा

कामधेनु गाय को लेकर यूं तो कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन, प्रमुख दो कथा मुख्य मानी गई है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, कामधेनु गाय होने वाले को सबसे अधिक शक्तिशाली व पराक्रमी समझा जाता है। पौराणिक काल में ऋषि वशिष्ठ के पास सबसे पहले कामधेनु गाय थी। कामधेनु गाय को सभी पाना चाहते थे, इसलिए हर प्रकार से सभी ने वशिष्ठ से गाय के लिए युद्ध किया। परंतु, सभी को युद्ध में हारना पड़ा। वहीं, एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि के पास भी कामधेनु गाय थी। यह बात जब राजा सहस्त्रार्जुन को पता चली तो उन्होंने ऋषि जमदग्नि के आश्रम पर आक्रमण कर दिया। यह सब देखकर कामधेनु गाय स्वर्ग चली गई और फिर वहीं रहने लगी।
इस तरह करें पूजा

मान्यता है कि कामधेनु गाय में 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं और इनकी उपासना करने से देवता प्रसन्न होकर सभी इच्छाएं पूरी करते हैं। कामधेनु दैवीय गाय स्वर्ग लोक में निवास करती हैं। इसलिए इनकी पूजा का भी महत्व बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कामधेनु गाय की पूजा के समय गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद अक्षत व फूल गाय को अर्पित करें। कामधेनु गाय के मंत्र का जाप करें। इससे भक्तों की सभी मुराद पूरी होती है। कामधेनु गाय का मांत्र ॐ सर्वदेवमये देवि लोकानां शुभनन्दिनि.मातर्ममाभिषितं सफलं कुरु नन्दिनि।।
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