Feed cow
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Gau Mata Seva: हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। कामधेनु गाय को मां का दर्जा प्राप्त है और इसे दिव्य गाय माना जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार कामधेनु गाय की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई है। साथ ही गाय देवी-देवताओं के समान ही पूजनीय भी है। वहीं शास्त्रों में गाय की सेवा को सौ पुण्य के समान माना गया है। गाय की सेवा, सुरक्षा और संवर्धन की जिम्मेदारी मनुष्य पर ही है। इसलिए मनुष्य को गोसेवा का यह धर्म निभाना चाहिए और गो सेवा में अपना योगदान देना चाहिए। हिंदू धर्म में गाय से जुड़े कई धार्मिक व्रत-त्योहार भी मनाए जाते हैं, इनमें गोवर्धन पूजा, द्वादशी गोवत्स द्वादशी व्रत, गोपाष्टमी, पयोव्रत, गोपद्वमव्रत और गोत्रि-रात्र व्रत आदि शामिल हैं।

हिंदू धर्म के अनुसार, गाय में 33 कोटि देवी-देवता का वास होता है। हालांकि कई लोग कोटि का अर्थ करोड़ मान लेते हैं। लेकिन यहां कोटि का अर्थ करोड़ से नहीं बल्कि प्रकार से होता है। गाय में 33 प्रकार के वास करने वाले देवी-दवताओं में 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और 2 अश्विन कुमार हैं। गाय के मूत्र, मल, दूध आदि की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया जाता है। गोसवा से मिलने वाले लाभ के बारे में तो आप जान ही गए होंगे। साथ ही कई लोग गोसेवा भी करते हैं। लेकिन शास्त्रों में ऐसी चीजों के बारे में बताया गया है, जिसे गाय को कभी नहीं खिलाना चाहिए। गौमाता को ये चीजें खिलाने से गो सेवा का पुण्य फल नहीं मिलता और दोष लगता है। इसलिए जान लीजिए वो कौन सी चीजें हैं जो गाय को नहीं खिलानी चाहिए।

भूलकर गाय को न खिलाएं ये चीजें

these things not feed a cow
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  1. गाय को भोजन खिलाना बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि लहसुन-प्याज से बना भोजन गाय को कभी नहीं खिलाएं। साथ ही मिर्च-मसाले वाले भोजन भी गाय को नहीं खिलाना चाहिए। ऐसा करने से आपको दोष लग सकता है, क्योंकि ये चीजें गाय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है।
  2. इसके साथ ही गौ माता को कभी भी बासी या जूठा भोजन नहीं खिलाना चाहिए। गाय को जूठा या बासी भोजन खिलाना देवी-देवताओं का अपमान करने के समान होता है।
  3. गौ माता को हमेशा ही शुद्ध और शाकाहारी भोजन ही खिलाएं। घर पर बनने वाली रोटियों में सबसे पहली रोटी गाय को खिलानी चाहिए। गाय को हरा चारा खिलाना बहुत अच्छा होता है। इससे देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और धन-समृद्धि व करियर में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

गाय से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

cow worship
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धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र की उत्पत्ति गाय की गोबर से ही मानी जाती है। बेलपत्र भगवान शिव को अतिप्रिय है और इसके बगैर शिव पूजन अधूरा माना जाता है। ऋग्वेद में तो गाय को अघन्या कहा गया है। वहीं यजुर्वेद की माने तो गौ अनुपमेय है। अर्थवेद में गाय संपतियों का घर कहा गया है। वहीं पौराणिक मान्यताओं और श्रुतियों के मुताबिक गाएं साक्षात विष्णु रूप है, सर्व वेदमयी और वेद है। भगवान कृष्ण को सारा ज्ञानकोष गोचरण से ही मिला। भगवान राम के पूर्वज महाराणा दिलीप नंदिनी भी गाय की पूजा करते थे। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि, नरक की यातनाओं से बचने के लिए मनुष्य को जीवनकाल में गाय का दान करना चाहिए। क्योंकि गोदान करने वाला वैतरणी नदी को पार कर लेता है। इसके साथ ही श्राद्ध क्रम से लेकर पूजा-पाठ में गाय के दूध का उपयोग खीर बनाने से लेकर पंचामृत बनाने में किया जाता है।

मैं मधु गोयल हूं, मेरठ से हूं और बीते 30 वर्षों से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हूं। मैंने स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है और हिंदी पत्रिकाओं व डिजिटल मीडिया में लंबे समय से स्वतंत्र लेखिका (Freelance Writer) के रूप में कार्य कर रही हूं। मेरा लेखन बच्चों,...