भारतीय महिला खिलाड़ियों का संघर्ष, अपने दिन-रात की मेहनत से देश को किया गौरवान्वित
समय के साथ भारतीय महिला एथलीटों में इज़ाफ़ा होता गया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को गौरवान्वित किया है।
Indian Women Players: भारत के खेल जगत में महिलाओं के जगह बनाने का काम जिन महिलाओं ने किया उनका जीवन कई संघर्ष से घिरा रहा। बावजूद इसके नारीवादी महिला व्यक्तित्व ने देश को गौरवान्वित किया। समय के साथ भारतीय महिला एथलीटों में इज़ाफ़ा होता गया, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को गौरवान्वित किया है।
आज उनकी एक लंबी सूची है जिन्होंने अपनी मेहनत से खुद की पहचान बनाई है। इसकी शुरुआत 2000 से माना जाता है जब भारतीय खेलों के लिए गौरव का पहला पल सिडनी ( 2000) में कर्णम मल्लेश्वरी ने कांस्य पदक जीता। इसी के साथ कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। इसके बाद से शुरू हुआ सिलसिला आज तक कायम है कर्णम मल्लेश्वरी ने भारतीय महिला एथलीटों के अंदर आत्मविश्वास जगा दिया था। इसके बाद आगे एमसी मैरी कॉम, सानिया मिर्ज़ा, साइना नेहवाल, पीवी सिंधु, साक्षी मलिक नाम जुड़ते गए।
पीवी सिंधु

पीवी सिंधु ने 2016 के ओलंपिक खेलों में अपने देश के लिए रजत पदक जीतकर अपने करियर की ऊंचाई हासिल की। उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार के भूमि राजस्व विभाग में कृष्णा जिले के लिए डिप्टी कलेक्टर नामित किया था। उन्हें 2020 में बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर चुना गया इसके साथ ही बीडब्ल्यूएफ समिति के ‘आई एम बैडमिंटन’ कार्यक्रम का राजदूत नामित किया गया था।
पीवी सिंधु का जन्म दोनों राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ियों के घर हैदराबाद में हुआ था। सिंधु ने अपनी स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद एशियाई चैंपियनशिप, विश्व चैंपियनशिप, ऑल इंग्लैंड ओपन, इंडिया ओपन ग्रां प्री गोल्ड और कॉमनवेल्थ गेम्स सहित अलग-अलग बैडमिंटन प्रतियोगिताओं में भाग लिया और जीता। जिसके बाद रजत पदक जीतकर वह स्टार खिलाड़ी बन गईं।
मैरी कॉम

आज मैरी कॉम को कौन नहीं जानता इनके जीवन पर पूरी फिल्म बन चुकी है। एक गुमनाम नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध हो गया इसका साफ उदाहरण मैरी कॉम हैं। मणिपुरी की रहने वाली मैरी कॉम ओलंपिक में कांस्य पदक विजेता से कहीं अधिक है। इस फ्लाईवेट फाइटर की उपलब्धियों की एक लंबी सूची है। उन्होंने पांच बार एमेच्योर विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप जीती है, एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक विजेता हैं इसी के साथ मणिपुर, भारत की मूल निवासी मैरी कॉम 8 बार विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी हैं। मैरी कॉम पद्म भूषण पुरस्कार पाने वाली पहली शौकिया मुक्केबाज थीं।
मैरी का जन्म 1 मार्च 1983 को ड्यूक के चोरीचाँदपुर जिले में एक गरीब किसान के परिवार में हुआ था और उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा लोकतक क्रिश्चियन मॉडल स्कूल और सेंट हेवियर स्कूल से पूरी की। मैरी कॉम की रुचि बचपन से ही एथलेटिक्स में थी। और महिला एथलीटों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
साइना नेहवाल

भारतीय बैडमिंटन की गोल्डन गर्ल के रूप में पहचानी जाने वाली साइना नेहवाल दुनिया की शीर्ष तीन बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक हैं, साइना के करियर की शुरुआत 2012 से हुई जब वह बैडमिंटन खिलाड़ियों की विश्व रैंकिंग में पांचवें स्थान पर पहुंची। उन्होंने स्विस ओपन ग्रां प्री, थाई ओपन ग्रां प्री और इंडोनेशियाई ओपन सुपर सीरीज में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। साइना नेहवाल ने अब तक 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और सुपर सीरीज खिताब जीते हैं
बता दें साइना का जन्म 17 मार्च 1990 को हिसार, हरियाणा के एक जाट परिवार में हुआ था। इनके पिता डॉ॰ हरवीर सिंह नेहवाल और माता उषा नेहवाल है। माता-पिता दोनों के बैडमिंटन खिलाड़ी होने के कारण सायना का बैडमिंटन की ओर रुझान शुरू से ही था।
मिताली राज

क्रिकेट को शुरुआत से ही पुरुषों का खेल माना गया है लेकिन इस धारणा को भी महिलाओं ने समय के साथ तोड़ दिया और आज भारतीय महिला खिलाड़ियों ने इस खेल में अपने नाम का परचम लहरा दिया है। इन खिलाड़ियों में मिताली राज को क्रिकेट के मैदान पर अपनी शानदार बल्लेबाजी के कारण भारत की सर्वकालिक पसंदीदा महिला क्रिकेटर माना जाता है। मिताली को महिलाओं के एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों और महिला ट्वेंटी-20 एशिया कप के लिए प्रशिक्षित और चुना गया था, मिताली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्षों तक दाएं हाथ की बल्लेबाज के रूप में बल्लेबाजी करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
मिताली राज का जन्म 3 दिसम्बर 1982 को जोधपुर, राजस्थान में हुआ था। एक तमिल परिवार में पली-बढ़ीं मिताली ने दस साल की उम्र में यह खेल खेलना शुरू किया था।
साक्षी मलिक

भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान साक्षी मलिक ने 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में 58 किलोग्राम कुश्ती स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। इससे पहले 2014 में ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स और 2015 में दोहा में एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप जीती थी। अपने दादा से प्रोत्साहित साक्षी ने जूनियर विश्व चैंपियनशिप में भाग लिया और 58 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक जीता।
उनका जन्म 03 सितम्बर 1992 को हरियाणा राज्य में हुआ था। पिता सुखबीर आमिर डीटीसी में बस स्टैंड में हैं और उनकी माता श्रीमती सुदेश आमिर एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं।
हिमा दास

2018 एशियाई खेलों में 50.7 सेकंड में 400 मीटर दौड़ कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाली है हिमा दास। बता दें हिमा ट्रैक इवेंट में IAAF वर्ल्ड U20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट हैं। इन्हें 2018 में भारत के राष्ट्रपति से अर्जुन पुरस्कार मिला।
हिमा का जन्म असम राज्य के नगाव जिले के कांधूलीमारी गांव में हुआ था। उनके पिता रणजीत दास तथा माता जोनाली दास है। दास ने अपने स्कूल के दिनों में लड़कों के साथ फुटबॉल खेलकर खेल मेंं अपनी रुचि बढ़ाई। वो अपना करियर फुटबॉल में देख रही थीं और भारत के लिए खेलना चाहती थीं। फिर जवाहर नवोदय विद्यालय के शारीरिक शिक्षक शमशुल हक की सलाह पर उन्होंने दौड़ना शुरू किया। आज हिमा दास ने दो स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
सानिया मिर्जा

सानिया मिर्जा खेल जगत में एक ऐसा नाम है जो सभी महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं। वह टेनिस की सबसे सफल भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। सानिया ने 2007 में अपने सुनहरे दिनों के दौरान एकल टेनिस में स्वेतलाना कुजनेत्सोवा, नादिया पेट्रोवा और मार्टिना हिंगिस सहित शीर्ष 10 महिलाओं को हराया। सानिया को भारतीय खेलों में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अर्जुन, पद्मश्री, खेल रत्न और पद्म भूषण सम्मान मिला है।
सानिया मिर्ज़ा का जन्म 15 वर्ष 1986, मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा रेजिडेंट के एन ए एस आर स्कूल से हुई, कॉमर्स यूनिवर्सिटी रेजिडेंट के ही मैरी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वहीं 11 दिसंबर 2008 को चेन्नई में एमजी आरस्टार्ट और रिसर्च इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की मानद डिग्री प्राप्त हुई।
