woman talking to her kid while seating
Freedom to fail, courage to grow.

Summary: आज का संवेदनशील लड़का, कल का बेहतर पुरुष

भावनात्मक सुरक्षा और प्यार में पले लड़के आत्मविश्वासी, स्थिर और दूसरों के प्रति संवेदनशील पुरुष बनते हैं। माता-पिता का सही मार्गदर्शन उनके व्यक्तित्व की मजबूत नींव रखता है।

Emotional Security in Raising Sons: हर माता-पिता की यह इच्छा होती है कि उनका बेटा बड़ा होकर भावनात्मक रूप से मजबूत, आत्मविश्वासी और रिश्तों को समझने वाला इंसान बने। वह चाहते हैं कि उनका बच्चा जीवन की चुनौतियों का सामना हिम्मत और समझदारी के साथ करे। लेकिन किसी लड़के का ऐसा व्यक्तित्व केवल अच्छी पढ़ाई, अनुशासन या किसी तरह की सफलता से नहीं बनता। इसके पीछे एक गहरी और मजबूत नींव होती है जैसे भावनात्मक सुरक्षा और बिना शर्त मिला प्यार। जब बचपन में बच्चे को यह एहसास होता है कि उसे अच्छी तरह से सुना और समझा जा रहा है तब उसके अंदर आत्मसम्मान और भरोसे की भावना विकसित होती है। ऐसे लड़के बड़े होकर न सिर्फ मानसिक रूप से संतुलित होते हैं, बल्कि दूसरों के प्रति संवेदनशील, अपने फैसलों में

आत्मनिर्भर और रिश्तों में ज्यादा स्थिर भी बनते हैं।

Listen, understand, love your boy.
Listen, understand, love your boy.

गले लगाना, सिर पर हाथ फेरना या साथ में समय बिताना ये छोटे-छोटे व्यवहार लड़कों को अंदर तक सुरक्षित महसूस कराते हैं। खासकर हमारे समाज में, जहाँ लड़कों को भावनात्मक लगाव कम मिल पाता है, वहाँ यह और भी ज़रूरी हो जाता है।

डांट, मार या धमकी से बच्चे आज्ञाकारी तो हो सकते हैं, लेकिन सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। भावनात्मक रूप से सुरक्षित लड़कों के माता-पिता सीमाएँ तय तो करते हैं, लेकिन प्यार और तर्क के साथ। इससे बच्चा नियम भी मानता है और माता-पिता पर पूरी तरह से भरोसा करने लगता है।

किसी भी तरह की तुलना बच्चे के मन में हीन भावना पैदा करती है। समझदार माता-पिता जानते हैं कि हर बच्चा अलग है। ऐसे माता-पिता अपने बच्चों की तुलना दूसरों से नहीं, बल्कि उनकी खुद के विकास से करना सिखाते हैं।

जो लड़के खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं, वे जानते हैं कि गलती करने पर उन्हें शर्मिंदा नहीं किया जाएगा। माता-पिता गलती को सीखने का अवसर बनाते हैं, सज़ा का नहीं। इससे बच्चे चुनौती लेने और नई चीज़ें आज़माने से कभी पीछे नहीं डरते हैं।

ऐसे माता-पिता जानते हैं रोना कमज़ोरी नहीं है ,बल्कि भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है। जब लड़कों को अपना डर, गुस्सा या दुख खुलकर बताने की आज़ादी मिलती है, तो वह अंदर से हल्का और सुरक्षित महसूस करते हैं।

A loved boy grows into a strong man.
A loved boy grows into a strong man.

सुरक्षित महसूस करने वाले लड़कों को यह यक़ीन होता है कि उन्हें अच्छे नंबर, जीत या किसी तरह की उपलब्धियों के लिए नहीं, बल्कि जैसे वे हैं वैसे ही प्यार किया जाता है। माता-पिता उनका व्यवहार या गलती नापसंद कर सकते हैं, लेकिन बच्चे के साथ कभी गलत नहीं करेंगे।

ऐसे माता-पिता बच्चों की बात पूरे ध्यान से सुनते हैं और बिना टोके या जल्दबाज़ी में किसी तरह का समाधान नहीं निकालते हैं । इससे लड़कों को लगता है कि उनकी बात माता-पिता के लिए काफी मायने रखती है। यह आदत उनमें आत्मविश्वास और बातचीत करने की कला को विकसित करती है।

जब बच्चे को भरोसा हो जाता है कि उसे सुना जा रहा है, स्वीकार किया जा रहा है और प्यार दिया जा रहा है, तो यह भरोसा उसकी पूरी ज़िंदगी की नींव बन जाता है। ऐसे लड़के मुश्किल परिस्थितियों में भी स्थिर रहते हैं, रिश्तों में संतुलित रहते हैं और निर्णय लेने में आत्मनिर्भर होते हैं।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...