घर पर अगर किसी बुजुर्ग से निवेश पर राय लो तो सबसे पहला नाम किसका बताते हैं वो, पक्का वो आपको फिक्स डिपॉजिट (एफडी) का ही सुझाव देंगे। दें भी क्यों न लंबे समय से ये निवेश का बेहतरीन विकल्प साबित हुआ है। ये तब भी बेस्ट था, जब निवेश के विकल्प नहीं थे, ये अब भी बेस्ट है, जब निवेश के ढेरों विकल्प खुल चुके हैं। मगर ये बात सिर्फ यूंहीं कहने के लिए नहीं है। फिक्स डिपॉजिट काफी फायदे वाला निवेश हमेशा से रहा ही है। यही वजह है कि लंबे समय से निवेश कर रहे बड़े-बुजुर्ग इसी को चुनते हैं। फिक्स डिपॉजिट की ऐसी कौन सी हैं खासियतें, चलिए जानिए-

ब्याज ज्यादा-
ज्यादातर बैंक फिक्स डिपॉजिट में ब्याज ज्यादा देते हैं। सेविंग और करंट दोनों ही एकाउंट के बैलेंस पर मिलने वाले ब्याज से तो ये ज्यादा ही होता है। यही वजह है कि लोगों के लिए ये वो निवेश बन जाता है तो नियमित कमाई देता है।
नो रिस्क-
ये निवेश का ऐसा विकल्प है कि इसमें फायदा मानो तय ही होता है। इसके साथ रिस्क भी इसमें न के बराबर होता है। वैसे तो कई और भी रिस्क फ्री निवेश होते हैं लेकिन उनमें भी फिक्स डिपॉजिट में ब्याज अच्छा मिलता है। इसलिए अगर अपनी कमाई में रिस्क नहीं चाहते हैं तो एफडी आपके लिए बेस्ट विकल्प है।

लिक्विड इंवेस्टमेंट-
ऐसा कई दफा होता है, जब आपको अचानक से पैसों की जरूरत पड़ती है। इस वक्त आपके काम आता है मेहनत की कमाई से जोड़ा धन। मगर हर निवेश वो नहीं कर पाता, जो एफडी कर लेता है। दरअसल फिक्स डिपॉजिट एक तरह का लिक्विड इंवेस्टमेंट है। मतलब इसे जरूरत पड़ने पर तोड़ा भी जा सकता है। जब भी लगे कि आपको पैसों की जरूरत है, आप एफडी से पैसे निकाल सकते हैं।
मार्केट का असर नहीं-
इस निवेश में बाजार के गिरने का कोई फर्क नहीं पड़ता है। मतलब मार्केट की अनिश्चिता इस पर कोई असर नहीं डालती है। इस वजह से आप निश्चित होकर अपने बिजनेस या काम पर ध्यान दे पाते हैं। जबकि बाकी कई तरह के निवेश में ये परेशानी होती है कि मार्केट के उतार-चढ़ाव के हिसाब से ही इसमें फायदा या नुकसान होता है।

लोन में मदद-
एफडी की एक और खासियत होती है, इसके बदले लोन लेना आसान हो जाता है। मतलब आपको जब भी जरूरत हो इसके बदले धन की व्यवस्था की जा सकती है। आमतौर पर एफडी के बदले इसकी जमा राशि का 90 प्रतिशत तक मिल जाता है।
मासिक कमाई-
एफडी आपकी हर महीने की कमाई का जरिया भी बनकर सामने आता है। दरअसल इसमें आपको ये चुनाव करने का मौका मिलता है कि ब्याज आप खुद लेंगी या वापस फिक्स कराएंगी। खुद लेने का चुनाव करने पर ये हर महीने या हर तीन महीने में आपके एकाउंट में आते रहते हैं।
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