Overview: क्यों माना जाता है ग्रहण अशुभ?
ग्रहण को जहां अशुभ और नकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है, वहीं कुछ खास परिस्थितियों में यह शुभ भी हो सकता है। पितृ पक्ष, अल्पकालीन ग्रहण और राहु की अनुकूल स्थिति इसे लाभकारी बनाती है। इस समय किए गए मंत्र-जाप और दान से व्यक्ति को अपार सौभाग्य और समृद्धि मिलती है।
Grahan 2025: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण (चाहे सूर्य का हो या चंद्र का) को एक विशेष खगोलीय घटना माना जाता है। आमतौर पर इसे अशुभ और नकारात्मक प्रभावों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता। कुछ विशेष परिस्थितियों में यही ग्रहण इंसान के लिए शुभ अवसर भी लेकर आता है।
आइए जानते हैं कि कब ग्रहण का असर अशुभ से शुभ में बदल सकता है और इस दौरान किन कार्यों को करना चाहिए।
क्यों माना जाता है ग्रहण अशुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का संबंध राहु और केतु से है। जब सूर्य ग्रहण लगता है तो सूर्य देव प्रभावित माने जाते हैं और चंद्र ग्रहण के समय चंद्र देव संकट में माने जाते हैं। इस दौरान वातावरण में आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है।
ग्रहण के साथ ही सूतक काल लगता है। इस समय पूजा-पाठ, नए कार्य की शुरुआत और शुभ कार्यों पर रोक लगा दी जाती है। कारण यह है कि इस अवधि में किए गए कार्य अक्सर सफल नहीं होते और वातावरण की नकारात्मकता मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित करती है।
ग्रहण काल के नकारात्मक प्रभाव
वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का अत्यधिक प्रभाव हो जाता है।
ग्रहण के समय पकाया या रखा भोजन दूषित हो जाता है, जिससे बीमारियां हो सकती हैं।
गर्भवती महिलाओं को इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह समय अजन्मे शिशु के लिए भी हानिकारक माना जाता है।
कोई भी नया कार्य या शुभ काम इस अवधि में नहीं करना चाहिए।
कब पड़ता है ग्रहण का शुभ प्रभाव?
हालांकि ग्रहण को अशुभ माना जाता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुछ खास परिस्थितियां इसे बेहद शुभ भी बना देती हैं।
पितृ पक्ष में पड़ने वाला ग्रहण
अगर ग्रहण उसी दिन हो जब अमावस्या या पूर्णिमा तिथि के साथ पितृ पक्ष चल रहा हो, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों को शांति और मोक्ष प्राप्त होता है। साथ ही परिवार पर उनके आशीर्वाद की छाया बनी रहती है।
अल्पकालीन ग्रहण
जब ग्रहण की अवधि दिन के एक प्रहर (लगभग तीन घंटे) से कम की हो, तो इसे शुभ प्रभाव वाला ग्रहण माना जाता है। ऐसे ग्रहण में किया गया मंत्र जाप व्यक्ति को जीवन में सफलता, सुख और सौभाग्य प्रदान करता है।
जब राहु की स्थिति अनुकूल हो
यदि किसी राशि में राहु की स्थिति मजबूत और शुभ फलदायी है, तो उस राशि के जातकों के लिए ग्रहण का समय वरदान साबित हो सकता है। इस दौरान किए गए कार्य वैभव, दान, संपदा और समृद्धि लेकर आते हैं।
ग्रहण के समय क्या करें?
ग्रहण काल को मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
इस समय किए गए मंत्र-जाप का प्रभाव कई गुना अधिक होता है।
साधना और ध्यान करने वालों के लिए यह समय आत्मिक उन्नति का अवसर होता है।
ग्रहण के दौरान जप से मन शांत होता है और इष्ट देव से गहरा जुड़ाव महसूस होता है।
ग्रहण के बाद क्या करें?
ग्रहण समाप्त होने के बाद दान का विशेष महत्व है।
गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अनाज, कपड़े, धन या वस्तुएं दान करनी चाहिए।
ऐसा करने से कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के बाद किया गया दान कई गुना पुण्य देता है।
