2024 Upcoming Festival Date: हिंदू धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व है। भारत में विभिन्न क्षेत्रों में त्योहारों को मनाने का तरीका भले ही अलग-अलग है लेकिन यहां लोग पूरी निष्ठा के साथ सभी रीति-रिवाजों का पालन करते हुए प्रत्येक त्योहार को बड़ी श्रृद्धा, उत्साह और खुशी के साथ मनाते हैं। आने वाले महीनों में इस साल के कई महत्वपूर्ण त्योहार मनाए जाएंगे। अक्टूबर माह की शुरूआत से ही त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। शारदीय नवरात्रि के साथ त्योहारों का आगाज होगा जिसके बाद करवा चौथ, दशहरा, दिवाली, भाई दूज और अहोई अष्टमी जैसे कई बड़े त्योहार की धूम देखने को मिलेगी। पितृ पक्ष के बाद घरों और बाजारों को दुल्हन की तरह सजाने का काम शुरू हो जाएगा। तो चलिए जानते हैं प्रमुख त्योहारों की तारीख और शुभ मुहूर्त के बारे में।
करवा चौथ

सनातन धर्म में करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का सबसे चर्चित और प्रमुख त्योहार है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की सलामती के लिए निर्जला व्रत रख, लंबी उम्र की कामना करती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार करवा चौथ प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। वर्ष 2024 में करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पचांग के अनुसार 20 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 45 मिनट से चतुर्थी तिथि की शुरूआत होगी और 21 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले 4 बजकर 15 मिनट पर इसका समापन होगा।
करवा चौथ का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 45 मिनट के लेकर 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस दौरान सभी सुहागिन महिलाएं पूजा की तैयारी कर कथा सुनने और पूजा का लाभ उठा सकती हैं। हालांकि चंद्रोदय का समय 7 बजकर 54 मिनट है।
अहोई अष्टमी
संतान की तरक्की और खुशहाली के लिए किया जाने वाला व्रत अहोई अष्टमी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं माता अहोई की पूजा करती हैं और अपनी संतान की सुरक्षा की कामना करती हैं। इस व्रत को कुछ महिलाएं तारे देखकर तो कुछ चांद को अर्घ्य देकर पूजा संपन्न करती हैं। पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर गुरुवार के दिन रखा जाएगा।
अहोई अष्टमी व्रत का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार अहोई अष्टमी में दो तरह से अर्घ्य दिया जाता है। जो महिलाएं अहोई अष्टमी के दिन तारों को देखकर पूजा करती हैं वह शाम 6 बजकर 6 मिनट पर तारों को अर्घ्य दे सकेंगी। वहीं पंचांग के अनुसार चंद्रोदय रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगा। जो महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करती हैं उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
धनतेरस

हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है दिवाली, जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं। दिवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन मां लक्ष्मी और देवता कुबेर की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि की भी पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा विधि-विधान से कर धन-दौलत का वरदान प्राप्त किया जा सकता है। धनतेरस कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यानी 2024 में धनतेरस 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन विशेष रूप में सोना, चांदी, कांसा और स्टील धातु का सामान खरीदा जाता है।
धनतेरस का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 29 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से होगी। वहीं 30 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर इसकी समाप्ती होगी। 29 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 30 मिनट से रात 8 बजकर 12 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा।
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दिवाली
दिवाली जिसे हिंदू धर्म का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। इस त्योहार को रोशनी, समृद्धि और खुशी का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन हर घर में मां लक्ष्मी और गौरी पुत्र गणेश की पूजा की जाती है। दिवाली के दिन लोग अपने घरों और बाजारों को दीयों व मोमबत्तियों से रोशन करके, उपहारों का आदान-प्रदान करके तथा पारंपरिक स्वादिष्ट पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक माह के पांचवें दिन अमावस्या पर दिवाली मनाई जाती है। इस वर्ष 2024 में दीपोत्सव 1 नवंबर, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।
दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या तिथि 31 अक्टूबर 2024 को दोपहर 3 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 1 नवंबर को शाम 6 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन लक्ष्मी पूजा का समय शाम 5:36 से 6:16 यानी 1 घंटा 56 मिनट रहेगा।
गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन की जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण और गोवर्धन की पूजा की जाती है। ये त्योहार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है। इस दिन घरों में गोबर से श्रीकृष्ण और गोबर्धन पर्वत बनाया जाता है। कई जगहों पर अन्नकूट यानी श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाए जाते हैं। इस वर्ष 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी। इस पूजा को बरसाने और वृंदावन में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा शनिवार 2 नवंबर को की जाएगी। ये पूजा काल मुहूर्त प्रात: 6 बजकर 11 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक की जा सकेगी। इसके अलावा दोपहर 3 बजकर 22 मिनट से शाम 5 बजकर 35 मिनट तक सायंकाल मुहूर्त में भी पूजा की जा सकती है।
भाई दूज

भाई-बहन के प्यार का प्रतीक भाई दूज गोवर्धन पूजा के बाद मनाया जाता है। इस दिन भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वादा करता है और बहन अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती है। ये पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस त्योहार को यम द्वितीय या भ्रातृ द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ये त्योहार 3 नवंबर रविवार के दिन मनाया जाएगा।
भाई दूज का शुभ मुहूर्त: भाई दूज का शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 10 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इस दिन भाई अपनी बहन के घर शुभ मुहूर्त पर जाकर टीका करा सकते हैं।
छठ पूजा
दिवाली के बाद छठ पूजा की जाती है। ये बेहद कठिन व्रत होता है, जो चार दिन तक चलता है। छठ पूजा मूल रूप से बिहार और पूर्वांचल में की जाती है। इस वर्ष छठ पूजा की शुरुआत 5 नवंबर से होगी और 8 नवंबर को प्रसाद वितरण के साथ समाप्ती की जाएगी। इस पर्व के दौरान कठिन नियमों का पालन करना पड़ता है जिसे हर कोई नहीं निभा पाता।
छठ पूजा का शुभ मुहूर्त: हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि के साथ छठ पूजा आरंभ होती है। षष्ठी तिथि 7 नवंबर को सुबह 12 बजकर 41 मिनट से आरंभ होकर 8 नवंबर को सुबह 12 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगी।
