Dhanteras 2025 dos and don’ts
Dhanteras 2025 dos and don’ts

Overview:धनतेरस 2025 Do’s and Don’ts - खुशहाली बढ़ाने के लिए जानें क्या न करें इस शुभ दिन

धनतेरस 2025 के शुभ अवसर पर कुछ चीजें जैसे पैसा, तेल, लोहे की वस्तुएं और काले कपड़े देना अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे मां लक्ष्मी की कृपा कम हो सकती है। इस दिन सोना-चांदी खरीदना, 13 दीप जलाना, घर की सफाई करना और मां लक्ष्मी व भगवान कुबेर की पूजा करना अत्यंत शुभ होता है। ये उपाय घर में धन, सौभाग्य और खुशहाली बनाए रखते हैं।

Dhanteras 2025 Do’s and Don’ts: धनतेरस, जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है, दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन बेहद शुभ माना जाता है क्योंकि इसे मां लक्ष्मी — धन और समृद्धि की देवी — को समर्पित किया जाता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन या मूल्यवान वस्तुएं खरीदना सौभाग्य लाने वाला माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन कुछ वस्तुएं देना अशुभ भी माना गया है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर कुछ खास चीजें जैसे पैसा, तेल, लोहे की वस्तुएं या काले कपड़े दान में नहीं देने चाहिए। ऐसा करने से घर की समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है।
अगर आप चाहते हैं कि इस धनतेरस 2025 में मां लक्ष्मी की कृपा आपके घर पर बनी रहे, तो जानें क्या न करें और किन शुभ कार्यों को अपनाएं ताकि सुख, धन और सौभाग्य आपके जीवन में स्थायी रूप से बसे रहें।

धनतेरस पर पैसे देना क्यों है अशुभ

On this day Avoid giving oil, money, or black clothes to maintain positive energy and attract prosperity.
Dhanteras, A day dedicated to Goddess Lakshmi and Lord Dhanvantari

धनतेरस के दिन पैसा या सिक्के देना शुभ नहीं माना जाता। यह दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है और धन का बाहर जाना माना जाता है कि लक्ष्मीजी भी घर से बाहर चली जाएंगी। इस दिन जितना संभव हो, धन को घर में ही लाएं — खरीदारी करें, सोना या चांदी लें, या नए बर्तन खरीदें।
अगर आपका मन दान करने का है, तो वह धनतेरस के एक दिन पहले या बाद में करें। पूजा के समय किसी को पैसे उधार न दें और नकदी का लेन-देन करने से बचें। इस तरह आप धन का प्रवाह अपने घर के भीतर बनाए रख सकते हैं और समृद्धि को स्थायी बना सकते हैं।

काले कपड़े या वस्तुएं देना न भूलें

काला रंग अक्सर नकारात्मकता से जुड़ा माना जाता है। इसलिए धनतेरस और दिवाली जैसे शुभ त्योहारों पर काले रंग की चीजें जैसे कपड़े, बैग, या जूते देना या दान करना अशुभ होता है। ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है और सौभाग्य के मार्ग में रुकावटें आ सकती हैं।
इस दिन हल्के और चमकदार रंगों का चयन करें जैसे पीला, लाल, गुलाबी या सुनहरा। ये रंग खुशहाली, आत्मविश्वास और सकारात्मकता के प्रतीक हैं। अपने परिवार और दोस्तों को भी इस शुभ दिन पर उजले रंग के उपहार दें ताकि घर में रोशनी और खुशी बनी रहे।

तेल या घी देना शुभ नहीं माना जाता

तेल और घी को प्रकाश, ऊर्जा और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि धनतेरस और दिवाली पर इन्हीं से दीपक जलाए जाते हैं। अगर आप इस दिन तेल या घी किसी को देते हैं, तो यह आपके घर की उजाला और समृद्धि कम कर सकता है।
इसके बजाय, घर में घी या सरसों के तेल के 13 दीपक जलाएं। इसे “यम दीपम” कहा जाता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद लाता है। यह छोटा-सा काम आपके घर में पूरे साल सुख, स्वास्थ्य और सकारात्मकता बनाए रख सकता है।

लोहे की वस्तुएं देने से क्यों बचें

धनतेरस पर लोहे की वस्तुएं देना या खरीदना शुभ नहीं माना जाता। लोहे का संबंध शनि देव से होता है, और इस दिन इसे दान करने से दुर्भाग्य या आर्थिक अड़चनें आ सकती हैं। इस दिन सोना, चांदी, पीतल या तांबे जैसी धातुएं खरीदना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि ये समृद्धि का प्रतीक हैं।
अगर आप बर्तन या घर का सामान खरीदने की सोच रहे हैं, तो लोहे या स्टील की जगह चांदी या पीतल को प्राथमिकता दें। इससे घर में धन का आगमन होता है और नकारात्मक प्रभावों से भी बचाव होता है।

धनतेरस पर अपनाएं ये शुभ कार्य

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धनतेरस सिर्फ खरीदारी का नहीं, बल्कि शुभ शुरुआत का पर्व है। इस दिन कुछ सकारात्मक कार्य करने से देवी लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं —

  • सोना, चांदी या पीतल के सिक्के और बर्तन खरीदें।
  • शाम को 13 दीपक जलाएं, जिससे नकारात्मकता दूर हो।
  • प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें।
  • घर की सफाई करें और फूलों व रंगोली से सजाएं।
  • मिठास और मुस्कान बांटें, पर चीनी या नमक न दें।
    धनतेरस समृद्धि, प्रकाश और नए आरंभ का प्रतीक है। इस बार 2025 में इस पर्व को मनाएं पूरे हृदय से और अपने घर को भरें दिव्य ऊर्जा और खुशियों से।

मेरा नाम दिव्या गोयल है। मैंने अर्थशास्त्र (Economics) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और उत्तर प्रदेश के आगरा शहर से हूं। लेखन मेरे लिए सिर्फ एक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज से संवाद का एक ज़रिया है।मुझे महिला सशक्तिकरण, पारिवारिक...