हमारे धर्म और जाति के विपरीत त्यौहार हमारे लिए एक ऐसा अवसर होता है, जिसमें आप अपने परिवार के साथ मिलकर अपनी खुशियां मना सकते हैं और अपने रिश्तों को फिर से जीवित कर सकते हैं। यह सच है कि आजकल की भागती-दौड़ती जि़ंदगी में हम परिवार के साथ मिलकर खुशियां मनाना भूल गए हैं। इसके आलावा आजकल परिवार छोटे होते जा रहे हैं, तो ऐसे में यह बहुत ज़रूरी है कि हम परिवार के साथ खुशियां बांटने के महत्व को समझें।
परिवार के साथ त्यौहार मनाने का महत्त्व
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि त्यौहार मनाने का महत्त्व क्या है-
सामाजिक सहायता
सभी इंसानों में सामाजिक प्रकृति जन्म से ही होती है और सभी इंसान एक दूसरे की ग्रोथ और जीवन अनुभवों के लिए बेहद ज़रूरी होते हैं। ऐसे में ये कहना गलत होगा कि परिवार हमारे सोशलाइज़ेशन का पहला कदम नहीं होते हैं। त्यौहारों का यह समय अपने परिवार की महत्वता को समझने के लिए और उनके साथ फिर से जुडऩे का बिल्कुल परफेक्ट समय होता है।
जि़म्मेदारियों को आपस में बांटना
केवल त्यौहार के समय ही नहीं, बल्कि पूरे साल ही परिवार हमें इस बात की याद दिलाता है कि चीज़ें बांटने से प्यार बढ़ता है और खासकर हमारे देश में जहां एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर काम करने की रीत है, वहां यह त्यौहारों के आने वाले दिन सबसे अच्छा मौका होता है, जहां आप अपने परिवार के साथ अपने रिश्ते को स्ट्रांग कर सकते हैं।
संस्कारों को फिर से जीवित करें
परिवार ही हर एक व्यक्ति को संस्कार और रीति रिवाज़ों की समझ देता है। यह परिवारजनों की ही जि़म्मेदारी होती है कि वो हमें त्यौहारों से जुड़े रीति-रिवाज़ों और उनसे जुड़ी कहानियों की समझ हमें दें और वो सारी बातें समझाएं, जो सदियों से परिवार में चलती आ रही हैं। अंत में परिवार ही हमें संस्कार और दुनिया की समझ सिखाता है।
बनता है मजबूत रिश्ता
आज के समय में लोग अपने परिवार के साथ समय बिताने का अर्थ भूल गए हैं। परिवार के साथ समय बिताने के अलावा यह भी बहुत ज़रूरी है कि हम अपने परिवार के साथ अपने कम्युनिकेशन को भी समझें। परिवार के साथ यह कम्युनिकेशन ही हमें बाहर के लोगों के साथ बात करने के लिए तैयार करता है। तो क्यों ना हम त्यौहारों के इस समय को अपने परिवार के साथ अपने कम्युनिकेशन को बेहतर करने में इस्तेमाल करें? हमारा अपने परिवार और भाई बहनों के साथ जिस प्रकार का रिश्ता होगा, वैसा ही हमारा रिश्ता बाहर के लोगों के साथ भी होगा। यह समय ना केवल बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि बड़े लोग भी इस समय का बखूबी इस्तेमाल कर सकते हैं।
हर कोई एक-दूसरे से सीखता है
परिवार एक ऐसी पाठशाला होती है, जहां बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखता है। एक ऐसा मंदिर है जहां बड़े बुजुर्ग ईश्वर के समान होते हैं। किसी भी काम में सफलता के लिए बड़ों की छत्र-छाया और आशीर्वाद बहुत जरूरी होता है और जब बात हो दिवाली के त्यौहार की तब परिवार के साथ इस त्यौहार का आनंद उठाने का अपना अलग ही महत्व होता है। कई पीढिय़ों का समायोजन होता है और घर के बुजुर्ग भी बच्चों के साथ मिलकर त्यौहार का आनंद उठाते हैं। साथ ही परिवार में मिल-जुल कर रहने की भावना जागृत होती है।

