उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के थल में छह किमी दूर बल्तिर गांव में स्थित भगवान शिव का हथिया देवाल मंदिर। इस मंदिर की एक खासियत है और वो है यहां पर शिव जी की पूजा न होना। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसे बनने में मात्र एक रात का समय लगा और इस मंदिर की स्थापत्य कला देखते ही बनती है।
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि इस मंदिर में भगवान शिव की पूजा नहीं की जाती है। इसका कारण ये है कि जिस कारीगर ने इस मंदिर का निर्माण किया उसका एक ही हाथ था और उसने मात्र एक रात में इस मंदिर का निर्माण किया जिसकी वजह से उससे एक बड़ी भूल हो गई। उसने मंदिर में स्थापित शिवलिंग का अरघा विपरीत दिशा में बना दिया।

जिसकी वजह से शिवलिंग दूषित हो गया और विद्धानों ने माना कि अगर इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा की जाए तो ये अनिष्ठ को जन्म दे सकता है। लोग अनिष्ठ के डर से आज भी इस मंदिर में पूजा नहीं करते हैं और जो भी इस मंदिर में आता है वह एक रात में बनकर तैयार हुए इस मंदिर की स्थापत्य कला को देखकर दंग रह जाता है।
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