साईं बाबा अपने भक्तों के विश्वास को कभी टूटने नहीं देते हैं। उनसे मांगी हर दुआ कुबूल होती ही है। शर्त सिर्फ इतनी है कि जो भी मांगे वो दिल से मांगे। इसमें कोई पाखंड न हो। साईं के दुनियाभर में भक्त हैं और मंदिर भी। साईं बाबा के बारे में कई सारी बातें प्रचलित हैं, जो उनकी महिमा को दिखाती हैं। लेकिन कई सारी बातें ऐसी हैं, जिन्हें बाबा की जिंदगी के रहस्य के तौर पर जाना जाता है। माना जाता है कि इन घटनाओं से जुड़े सवालों के जवाब कभी मिले ही नहीं। सदियों से ये सवाल सिर्फ सवाल ही बने हुए हैं। कुछ ऐसे रहस्यों को चलिए पहचान लेते हैं-

जन्म की जानकारी नहीं-
साईं बाबा के जन्म को लेकर कोई भी पुख्ता जानकारी अभी भी लोगों के पास नहीं है। माना जाता है कि 1854 में पहली बार शिरडी में साईं बाबा को देखा गया था। तब उनकी उम्र 16 साल थी। लेकिन इसलिए उनका जन्म साल 1838 माना जाने लगा। लेकिन इससे पहले के समय के बारे में लोगों को नहीं पता है। हालांकि कुछ दस्तावेजों में उनका जन्म महाराष्ट्र के ही पथरी इलाके में माना जाता है। लोगों ने बाबा को पहली बार नीम के वृक्ष के नीचे देखा था। वो गर्मी-जाड़े की चिंता किए बिना बस अपने में मगन थे।
साईं की आसन वाली मूर्ति-
आपने साईं बाबा की शिरडी में बनी बैठे आसन वाली मूर्ति देखी होगी लेकिन कभी सोचा है कि आखिर ये कैसे बनाई गई होगी? ये मूर्ति मूर्तिकार ने कहीं देखी नहीं थी बल्कि इसको बनाने के लिए उसे कल्पना का सहारा लेने के लिए बोला गया था। वसंत तालीम नाम के इस मूर्तिकार ने फिर साईं से प्रार्थना की कि वो उसकी मदद करें। माना जाता है मदद के लिए साईं बाबा ने मूर्तिकार को खुद दर्शन दिए थे। तब जाकर उसने ये मूर्ति बनाई थी।
पत्थर कहां से आए-
शिरडी की मूर्ति बनाने में इस्तेमाल हुए पत्थर कहां से आए थे, ये अभी तक कोई भी नहीं जानता है। दरअसल ये पत्थर बस शिरडी तक आ गए थे, कौन लाया, कैसे लाया किसी को नहीं पता। सिर्फ इतना ही पता चला था कि पत्थर इटली से आए थे। ये भी इसलिए क्योंकि पत्थर पर इटली लिखा था। ये घटना 1954 की है। ऐसी कई मूर्तियां बनीं लेकिन इस मूर्ति की बात ही अलग है। इसकी खासियत ये है कि जब भी आप इसकी तरफ देखेंगे आपको लगेगा कि मूर्ति भी आपकी तरफ देख रही है।
साईं नाम-
एक बार साईं अचानक से कहीं चले गए। कुछ सालों बाद वो फिर से शिरडी में दिखे। इस वक्त खंडोबा मंदिर के पुजारी ने उनसे कहा ‘आओ साईं’। बस इसी संबोधन के बाद फकीर साईं कहलाने लगे।
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