Puja Aarti Vidhi in Hindi(Puja Path Niyam): सुबह-सुबह उठकर नहा धोकर पूजा पाठ करना भारतीय समाज की परंपरा है। बचपन से ही हमें पूजा पाठ करना सिखाया जाता है। हमारे शास्त्रों में पूजा अर्चना के कई नियम बताए गए हैं। इसी प्रकार कहा जाता है कि पूजा करने के बाद आरती जरूर करनी चाहिए। ईश्वर के गुणगान को आरती के रूप में लिखा जाता है। इससे हम भगवान को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। माना जाता है कि भगवान को प्रसन्न कर हम आरती के द्वारा अपनी सारी गलतियों की माफी मांगते हैं। आरती के बिना कोई भी पूजा अधूरी मानी जाती है। घर में अगर हवन या पूजा हो तो उसके बाद घर के सभी सदस्य खड़े होकर भगवान से किसी भी गलती के लिए क्षमा मांगते हैं। कहा जाता है कि आरती हमेशा खड़े होकर ही करनी चाहिए। मंदिर में भी आरती से पूर्व सभी भक्त खड़े होकर एक साथ भगवान की प्रार्थना करते हैं।
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पूजा आरती का रहस्य

आरती करने के कई नियम हैं। इसलिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आरती करने से क्या होता है। हिंदू धर्म में आरती को पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा माना गया है। आरती एक संस्कृत शब्द आरात्रिका से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है प्रकाश यानी अंधकार को दूर करना। आरती करने से घर का वातावरण पवित्र होता है और सुख शांति आती है। आरती में ईश्वर के शक्तियों के बारे में लिखा जाता है। उनकी प्रशंसा की जाती है और अपनी इच्छा पूरा करने की बात कही जाती है। आरती करने के लिए कपूर या घी की बाती जलाई जाती है। आरती के बाद परिवार के सभी लोग इसको नमस्कार करते हैं और भगवान का आशीर्वाद समझ कर स्वीकार करते हैं।
खड़े होकर ही क्यों की जाती है आरती ?

हम अपने इष्ट देव के पूजा अर्चना के बाद आरती करते हैं। खड़े होकर आरती इसलिए किया जाता है क्योंकि खड़े होकर हम ईश्वर को सम्मान देते हैं। जब कोई भी व्यक्ति किसी का आदर सत्कार करता हैं तो उनके सम्मान में खड़ा हो जाता है। हमारे हिंदू मान्यताओं के अनुसार अपने से बड़े या सम्माननीय व्यक्ति के लिए हमेशा खड़ा होकर उनका आदर करना चाहिए। इसलिए आरती करने के समय हम खड़े हो जाते हैं और झुककर ईश्वर की आरती करते हैं। ऐसा करके हम ईश्वर के प्रति मान सम्मान और आत्मसमर्पण की भावना को दिखाते हैं।
शास्त्रों में यह बताया गया है कि आरती हमेशा खड़े होकर करना चाहिए लेकिन अगर कोई व्यक्ति बीमार है या खड़े होकर आरती करने में असमर्थ है तो वह अपने स्थान पर बैठकर ही भगवान की आरती कर सकता है। भक्ति हमेशा शक्ति अनुसार करनी चाहिए। यदि आप शुद्ध मन से भगवान की आरती करते हैं तो ईश्वर आपकी भक्ति स्वीकार कर ही लेते हैं। चाहे आप किसी भी स्थिति में उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं।
कैसे करें आरती ?
आरती करने के लिए हम एक थाली में घी या कपूर का दीपक जला लेते हैं। आरती करते समय हम झुककर भगवान की मूर्ति के सामने बार-बार थाली को घुमाते हैं, जिससे दीपक की लौ से भगवान के चमकते हुए आभूषण और अंगों का दर्शन किया जा सके और इस छवि को मन में बसाया जा सके। आरती करने की एक और मान्यता यह है कि भगवान की छवि इतनी सुंदर होती है कि सभी भक्त उन्हें एक टक निहारतें हैं। इससे उन्हें नजर लग सकती है। इसलिए भक्तजन आरती करके सभी अरिष्टों को भगवान से दूर करने का प्रयास करते हैं।
