Parshuram-Ganesh Story: परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। परशुराम को भगवान शिव से चिरंजीवी होने का वरदान मिला था, इसलिए ऐसा माना जाता है कि भगवान परशुराम पृथ्वी पर आज भी जीवित हैं और कलयुग के अंत तक रहेंगे। हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है। इस साल परशुराम जयंती मंगलवार 29 अप्रैल 2025 को है। परशुराम से जुड़ी कई कथा-कहानियों में उनके फरसे का जिक्र जरूर आता है। ऐसी मान्यता है कि आज भी यह फरसा धरती पर मौजूद है।
गणपति के एकदंत से भी कई कहानियां जुड़ी हैं, जिसमें सबसे प्रचलति पौराणिक कथा के अनुसार, परशुराम के फरसे से ही भगवान गणेश का एक दांत भी टूटा था, जिसके बाद वो एकदंत कहलाए। कथा के अनुसार, एक बार परशुराम अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन के लिए कैलाश पहुंचे। भगवान शिव उस समय ध्यानमग्र थे, इसलिए गणपति ने परशुराम को शिवजी से मिलने नहीं दिया और भीतर जाने से रोक दिया। दूसरी ओर शिव के परमभक्त परशुराम भी अपने बात पर अटल रहे और कहने लगे कि वो बिना शिव से मिले नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर गणपति भी अपनी बात पर अडिग थे और परशुराम को रोकने का पूरा प्रयास कर रहे थे, जिस पर परशुराम को अत्यधिक क्रोध आ गया और उन्होंने गणपति को युद्ध के लिए ललकारा। गणपति ने भी हार नहीं मानी और युद्ध की चुनौती को स्वीकार कर लिया। इसके बाद गणपति और परशुराम के बीच युद्ध हुआ। परशुराम ने अपने फरसे से गणपति पर वार किया।

यह फरसा परशुराम को शिव से ही प्राप्त हुआ था। गणपति नहीं चाहते थे कि उन्हें पिता का अस्त्र विफल हो, इसलिए गणपति ने अपने पिता के अस्त्र का आदर रखा। जब परशुराम ने गणपति पर फरसे से वार किया तो, इससे गणपति का एक दांत टूट गया। एक दांत टूटने के कारण ही गणपति एकदंत कहलाएं। बाद में परशुराम को भी अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने गणपति से क्षमा मांगी। साथ ही परशुराम ने गणपति को तेज, बल, ज्ञान और कौशल का आशीर्वाद भी दिया।
परशुराम का फरसा क्यों है इतना महत्वपूर्ण

परशुराम भगवान शिव के शिष्य थे। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए परशुराम ने कठिन तपस्या की थी, जिसके बाद शिवजी से वरदान में परशुराम को कई अस्त्र-शस्त्र मिले थे। यह अजेय फरसा भी इन्हीं भेटों में एक था, जो परशुराम को शिवजी से प्राप्त हुआ था। दावा किया जाता है कि, आज भी यह फरसा पहाड़ी पर स्थित एक मंदिर के पास गड़ा है। खुद परशुराम ने यहां फरसे को गाड़ा था। बताया जाता है कि, झारखंड की राजधानी रांची से करीब 150 किमी की दूरी पर गुमला जिले में एक पहाड़ी पर टांगीनाथ धाम है, जहां परशुराम का फरसा गड़ा है। यह फरसा सदियों से खुले आसमान के नीचे है, लेकिन हैरानी की बात है कि आज तक इसमें जंग भी नहीं लगा है। जो कोई फरसा के साथ छेड़छाड़ या इसे हटाने की कोशिश करता है, उसे गंभीर परिणाम झेलने पड़ते हैं। फरसे के साथ ही यहां भगवान परशुराम के पदचिह्न भी मौजूद है।
