मंदिर को कैसे किस दिशा में बनाना है, ये बात अक्सर ही आप सुन लेती होंगी लेकिन मूर्तियों को कैसे और कहां रखना है ये कम ही लोग जान पाते हैं। मंदिर में मूर्तियां कैसे रखनी हैं? कितनी रखनी हैं? ये सारी ही बातें आपकी भक्ति को और असरदार बना देंगी। इन बातों को ध्यान करके मूर्तियों को ऐसी जगह रखें, जहां से आपको भगवान का आशीर्वाद पूरा मिलेगा। मंदिर सजाने में बहुत समय लगाने वाली आप मूर्तियों की सेटिंग पर भी समय जरूर देंगी। फिर देखिएगा कैसे आपको आपकी पूजा का फल जरूर मिलेगा।
मूर्तियों में दूरी–
अक्सर मंदिर जितना बड़ा होता है हम उसी के हिसाब से मूर्तियां लेते और सजा देते हैं। ये सोचते ही नहीं हैं कि मूर्तियां आपस में चिपकी हुई तो नहीं हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत होती है। सभी मूर्तियों में कम से कम 1 इंच की दूरी होनी ही चाहिए।
रौद्र रूप को कहिए नो–
भगवान की मूर्तियों के रौद्र रूप को मंदिर में बिलकुल नहीं रखना चाहिए। बल्कि मंदिर में सिर्फ सौम्य रूप वाली मूर्ति ही रखें। यही वजह है कि मंदिर में नटराज की मूर्ति नहीं रखी जाती है। नटराज शिव जी का रौद्र रूप है। इसलिए शिव जी की मूर्ति तो आपको मंदिर में मीलगी लेकिन नटराज की नहीं।
ये मूर्तियां नहीं रखनी–
कई दफा ऐसा होता है कि हमकिसी मंदिर में होते हैं और वहां मिलने वाली मूर्तियों को साथ घर ले आते हैं। फिर उन्हें मंदिर में सजा भी देते हैं। लेकिन हर मूर्ति के साथ ये नहीं किया जा सकता है। खासतौर पर शनि देव और भैरव बाबा की मूर्तियां घर के मंदिर में नहीं रखी जा सकती हैं। इनके साथ राहू-केतू की मूर्तियों को भी घर के मंदिर में नहीं रखा जा सकता है। ये दोनों ही अशुभ ग्रह माने जाते हैं और इनका ऊरे घर पर अच्छा असर बिलकुल नहीं होता है। हां, ये बात सही है कि कष्ट कम करने के लिए राहू-केतू की पूजा की जाती है। लेकिन मंदिर में रख कर इनकी पूजा नहीं की जानी चाहिए।
एक भगवान की कई मूर्ति–
घर के मंदिर में कभी भी एक ही भगवान की कई मूर्ति नहीं रखी जानी चाहिए। एक घर में दो जगह ऐसा किया जा साकता है लेकिन एक मंदिर में नहीं। लेकिन ये भी बात सही है कि भगवान गणेश की दो मूर्तियों को एक ही मंदिर में रखा जा सकता है। इससे ज्यादा नहीं। कुल मिलाकर कोशिश करें किसी भी भगवान की एक से ज्यादा मूर्ति घर के मंदिर में ना रखें।
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