जी हां, उत्तर भारतीयों का महापर्व छठ कल से यानि कि 31 अक्टूबर से शुरू हो रहा है, जोकि चार दिनो तक चलेगा। इन चार दिनो में महिलाएं छठ माता की पूजा पाठ के व्रत उपासना करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से छठ माता के आर्शीवाद स्वरूप उत्तम संतान की प्राप्ति और संतान की आयु लम्बी होती है। ऐसे में महिलाएं पूरी श्रद्धा और विश्वास से रखती हैं। वैसे तो ये त्यौहार मुख्यत: यूपी, बिहार और पूर्वांचल क्षेत्र विशेष का है, पर अब धीरे-धीरे ये त्यौहार दूसरे राज्यों में भी धूमधाम से मनाया जाना लगा है। अगर आप इस बार छठ का व्रत रखना चाहती हैं, तो चलिए आपको इस व्रत की सही पूजा विधि बताते हैं।
दरअसल, छठ की शुरुआत कार्तिक माह की शुक्ल चतुर्थी को “नहाय-खाय” के साथ होती है और इसका समापन सप्तमी को उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य देकर किया जाता है। इस बार नहाय खाय 31 अक्टूबर को पड़ रहा है, उसके अगले दिन 1 नवम्बर को खरना है, जबकि 2 नवम्बर को मुख्य व्रत और इसके बाद आखिरी दिन यानि कि 3 नवम्बर को सूर्योदय अर्घ्य।
नहाय-खाय

बात करे “नहाय-खाय” इस दिन महिलाएं गंगा या किसी सरोवर में स्नान कर कद्दू-भात पकाती हैं। इसमें बिना लहसुन-प्याज की सब्जी और अरवा चावल का भोजन बनाया जाता है। स्नान ध्यान के बाद व्रती महिलाएं ये भोजन ग्रहण कर छठ व्रत की संकल्प लेती हैं।
खरना

इसके अगले दिन ‘खरना’ होता है, जब महिलाएं पूरे दिन का उपवास रखकर शाम को खीर और रोटी बनाती है। ये खीर खास तौर पर गन्ने के रस से बनाया जाता है। इसे महिलाएं प्रसाद के तौर पर ग्रहण करती हैं।
व्रत और सूर्य को अर्घ्य

इसके बाद तीसरे दिन पूरे दिन बिना अन्न-जल के उपवास रखना होता है और शाम को कई तरह के मौसमी फलों और ठेकुआ चढ़ा कर छठ मां की पूजा करनी होती है और फिर शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। आखिर में चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है ।
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