हिंदू धर्म में हर कार्य के लिए कुछ खास नियम बनाए गए हैं, ऐसे में पूजा कर्म के लिए तो कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। जैसे कि पूजा करते वक्त सिर को ढ़कना जरूरी माना जाता है। खासकर स्त्रियों के लिए ये बेहद जरूरी होता है, कोई भी पूजा या धर्म कर्म करते वक्त वो अपना सिर साड़ी के पल्लू से दुपट्टे ढंकें। आप भी शायद ऐसा करती हों, पर क्या आपने कभी सोचा है आखिर ऐसा करना जरूरी क्यों हैं? अगर नहीं तो चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ऐसा पूजा और शुभ काम करते समय सिर क्यों ढ़का जाता है ।
दरअसल, इसकी एक वजह ये है कि सिर ढ़कने से ध्यान एकाग्रचित रहता है और पूजा के दौरान जो ऊर्जाएं उत्पन्न होती हैं, वो बिखरती नहीं हैं। इससे आपका ध्यान भटकता नहीं है। इसके अलावा व्यक्ति के सिर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। ऐसे में इस सकारात्मक माहौल में पूजा अर्चना करने से आपकी पूजा का शीघ्र और शुभ फल प्राप्त होता है।
इसके अलावा सिर ढ़क कर रखने से कई सारे शारीरिक समस्याओं से भी निजात मिलता है। असल में अगर सिर खुला हो तो आकाशीय विद्युतीय तरंगे सीधे व्यक्ति के भीतर प्रवेश कर जाती है, जिसके कारण  सिर दर्द, आंखों में कमजोरी आदि समस्याएं होती हैं।। सिर के बालों में आकाश में विचरित करते कीटाणु आसानी से चिपक जाते हैं, क्योंकि बालों की चुंबकीय शक्ति उन्हें आकर्षित करती है। ऐसे में ये कई सारे रोग का कारण बनते हैं। वहीं अगर सिर को ढ़क कर रखा जाए तो इससे बचाव होता है। यही वजह है कि भारतीय संस्कृति में महिलाओ के साथ ही पुरूषों के लिए भी पगड़ी, साफा या टोपी के जरिए सिर ढ़कने के परम्परा रही है।