शनि 25 मार्च के सायं 3 बजकर 15 मिनट पर वक्री हुआ था। नक्षत्र है ज्येष्ठा और राशि हैं वृष्चिक। अब 12 अगस्त को अनुराधा नक्षत्र और वृष्चिक राशि में शनि मार्गी हो रहा होगा।
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शनि के बारे में आम धारणा।
ग्रह शनि के बारे में आम धारणा है कि शनि ग्रह चाहे तो राजा बना दे या रंक। जिसकी जन्मकुण्डली में शनि बहुत अच्छी स्थिति में होता है उसे शनि विशेष हानि नहीं पहुँचाता बल्कि लाभ ही पहुँचाता है। जिन जातको की कुण्डली में शनि, नीच स्थिति पर होता है, उन्हे शनि से हानि होती है। परन्तु यह हानि जीवन भर नहीं रहती, क्योंकि हमारे जीवन में दशा और गोचर का भी महत्व होता है।
कुण्डली में शुभ शनि के प्रभाव।
उच्च स्थिति में बैठा शनि, अपने घर का या मूल त्रिकोण राशि में बैठा शनि अच्छा माना जाता है। एैसा व्यक्ति भाग्यशाली होता है, स्थिर, गम्भीर बुद्धिमान होता है। जातक की आयु लम्बी होती है। उसकी प्रवृत्ति दार्शनिक होती है। वह व्यक्ति परिश्रमी होता है और धन अर्जित करता है। नौकरी में उच्च पद पर पहुँचता है। हस्तरेखा विज्ञान में भी अच्छी शनि रेखा (भाग्य रेखा) का बहुत महत्व है।
कुण्डली में अशुभ शनि का प्रभाव।
शनि अगर नीचे स्थिति में है तो व्यक्ति शंकालु निराशावादी चापलूस, अलगाववादी बनता है। पढ़ने में उसका मन नहीं लगता। ऐसा व्यक्ति नाक और सांस सम्बन्धी तकलीफ से ग्रस्त रहता है।
आजकल शनि कहां गोचर कर रहा है?
आजकल शनि वक्री हो कर वृष्चिक राशि में मंगल के साथ गोचर कर रहा है। मेष और सिंह राशि की ढैया और तुला वृष्चिक एवम धनु राशि पर साढ़ेसाती चल रही है।

वक्री शनि का प्रभाव।
जिन जातकों की जन्मकुण्डली में शनि शुभ स्थान पर है या गोचर अच्छा चल रहा है उनके लिये वक्री शनि परेशानी लायेगा। उन्हे पैरों की तकलीफ, कार्यो में रूकावट, जोड़ों का दर्द, नौकरी में परेशानी होगी। धातु, लोहा, बहुमूल्य रत्न, अनाज का व्यापार करने वाले जातको के लिये यह समय अस्थिरता का रहेगा।
वक्री शनि किस के लिये होगा शुभ।
जिन जातकों की कुण्डली में शनि अशुभ भाव में स्थित है अथवा गोचर में अशुभ चल रहा है, उनके लिये यह समय शुभ रहेगा। नौकरी में तरक्की की सम्भावना बढ़ेगी, धन का लाभ होगा क्रूड आयल, शेयर बाजार, कोयला स्टील सम्बधी व्यापारियों को फायदा होगा।
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शनि के दुष्प्रभाव कम करने के उपाय।
- शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिये 7 प्रकार के अनाज व दालों को मिश्रित करके पक्षियों को खिलायें।
- बैगनी रंग का रूमाल जेब में रखें।
- शनि मंदिर में शनि की मूर्ति पर तिल या सरसों का तेल चढ़ाएं।
- सवा पांच रत्ती का नीलम या उपरत्न नीली को ताँबे की अंगूठी में अभिमंत्रित करवा कर पहनें।
- शनि यंत्र की रोज उपासना करें।
- फिरोजा रत्न गले में धारण कर सकते हैं।
शनि की साढ़ेसाती के उपाय।
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शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल से उंगूठी बनवायें। उसे तिल के तेल में सात दिन तक रखें। शनि मंत्र का 23000 बार जाप करें। शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय धारण करें।
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शनिवार को व्रत रखें। सांयकाल में ही भोजन करें।
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शनि बीज मंत्र का 23000 जाप सांयकाल को करें।
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यह जाप है-ऊँ प्रां प्री सः श्नैश्चराय नमः।
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बेसन या छोले से बने पदार्थ गरीबों को खिलायें।
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