Data Leak
Data Leak

Data Leak: दुनियाभर में डाटा लीक एक गंभीर समस्या बन चुकी है। कल्पना कीजिए, आपने डोमिनोज़ से पिज्जा ऑर्डर किया था। अगर उनका डाटा लीक हो जाए, तो कोई आपके बारे में यह सब जानकारी हासिल कर सकता है- आपने कब पिज्जा खाया, क्या टॉपिंग्स चुनी, कहां डिलीवर हुआ और कितने का ऑर्डर दिया। यह सब सिर्फ आपके मोबाइल नंबर के माध्यम से पता लगाया जा सकता है।

अब सोचिए, आपको एक कॉल आता है। कॉल करने वाला कहता है, “मैं डोमिनोज़ से बोल रहा हूं। आपने इस तारीख को यह पिज्जा खाया था, इस लोकेशन पर डिलीवर हुआ था। आपने कोल्ड ड्रिंक भी ऑर्डर की थी।” आप उसे सही मान लेते हैं क्योंकि वह सब कुछ ठीक-ठीक बता रहा है। इसके बाद वह आपको लुभावने ऑफर देता है- शायद कोई ट्रेवल ट्रिप या कैशबैक। आप उस पर भरोसा करते हैं और अपनी जानकारी शेयर कर देते हैं। बस आप फंस गए और आपके बैंक अकाउंट से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

इस स्थिति में गलती किसकी है? ज़ाहिर तौर पर, उस कंपनी की है, जिसे आपने अपनी जानकारी दी थी। आपकी व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग उनकी लापरवाही का नतीजा है।

हाल ही में भारत में डीपीडीपी एक्ट (डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट) लागू हुआ है। यह कानून आपके डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अगर आपका व्यक्तिगत डाटा लीक होता है, तो जिम्मेदार संस्था पर 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कई बार कंपनियां आपके डाटा को थर्ड पार्टी के साथ शेयर करती हैं। लेकिन इसे लीक करना और ब्रीच करना अलग है। डाटा ब्रीच का मतलब है कि आपकी जानकारी अनधिकृत तरीके से चुरा ली गई है।

हाल ही में स्टार हेल्थ के डाटा लीक का मामला सामने आया था, जिसमें लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड्स सार्वजनिक हो गए। अगर किसी व्यक्ति की हेल्थ जानकारी लीक हो जाए, तो यह गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकता है।

मान लीजिए, आप किसी मनोवैज्ञानिक बीमारी के इलाज के लिए डॉक्टर के पास गए। अगर यह जानकारी लीक हो जाए और आप किसी कंपनी के सीईओ हों, तो इससे आपकी प्रतिष्ठा और शेयर बाजार में कंपनी की स्थिति प्रभावित हो सकती है। लोग आपके हेल्थ कंडीशन का फायदा उठा सकते हैं और आपकी डील्स पर इसका असर पड़ सकता है।

इतिहास में भी हेल्थ डाटा की गोपनीयता की अहमियत देखने को मिली है। जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तब मोहम्मद अली जिन्ना को कैंसर था। यह जानकारी उस समय किसी को नहीं थी। विभाजन के एक साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। अगर यह जानकारी पहले सार्वजनिक हो गई होती, तो विभाजन की परिस्थितियां बदल सकती थीं। लाखों लोगों का जीवन बच सकता था।

हमें यह समझने की जरूरत है कि हमारी जानकारी कितनी कीमती है। हेल्थ डाटा, लोकेशन डाटा और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां ऐसी चीजें हैं, जिनका गलत उपयोग हमें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित कर सकता है।

भारत में डिजिटल डाटा सुरक्षा कानून लागू होने के बाद, कंपनियों पर डाटा सुरक्षा की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। अगर आपका डाटा लीक होता है, तो आप कानूनी कार्यवाही कर सकते हैं।

हम सभी को सतर्क रहना चाहिए। जब भी कोई कॉल या ईमेल आए, जिसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी का उल्लेख हो, तो तुरंत उस पर विश्वास न करें। सावधानी से अपनी जानकारी की रक्षा करें और समझें कि आपकी पहचान आपकी सबसे बड़ी संपत्ति है।

सोनल शर्मा एक अनुभवी कंटेंट राइटर और पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया, प्रिंट और पीआर में 20 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने दैनिक भास्कर, पत्रिका, नईदुनिया-जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हितवाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया...