A large group of men in traditional Indian attire and colorful turbans participate in an intense, dusty outdoor sporting event in front of a temple.
Chhattisgarh’s Gaadi-Goti Holi, A Festival of Courage and Culture

summary: छत्तीसगढ़ की गाड़ी-गोटी होली: रंगों से अलग पत्थरों से खेली जाने वाली अनोखी परंपरा

छत्तीसगढ़ की गाड़ी-गोटी होली एक अनूठी लोक परंपरा है, जिसमें लोग सावधानी और नियमों के साथ पत्थरों से होली खेलते हैं।
यह साहस, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक उत्सव है, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

Stone Holi of Chhattisgarh: भारत के हर राज्य में सभी त्योहारों की अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर जिस तरह कई बार मौसम भी बदलता हुआ महसूस होता है। इसी तरह होली के रंग-बिरंगे त्योहार को लेकर छत्तीसगढ़ की अपनी अलग ही परंपरा है। यहाँ की होली को गाड़ी-गोटी यानी पत्थर होली के नाम से जाना जाता है। छत्तीसगढ़ की अनोखी होली देखने लोग दूर-दूर से यहाँ आते हैं। ये कहना कहीं से भी गलत नहीं होगा की ये ख़ास होली यहाँ की सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल हिस्सा है। इस होली को साहस और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यहाँ की पारम्परिक होली को गाँव और उसके आसपास के इलाकों में बहुत उत्साह के साथ

मनाया जाता है। यहाँ के लोग इस अनूठी परंपरा का बहुत सम्मान करते हैं और हर साल खूब जोश के साथ इसे मनाते हैं।

गाड़ी-गोटी होली छत्तीसगढ़ के गाँवों में मनाई जाने वाली अनोखी होली है। गाड़ी का मतलब टोली है और गोटी का अर्थ है छोटे-छोटे पत्थर। यहाँ होली खेलते समय लोग दो गुटों में बँट जाते हैं और एक-दूसरे के ऊपर सावधानी के साथ पत्थर फेंकते हैं। इस होली को खेलते समय कुछ नियमों का पालन किया जाता है। लेकिन यह सब पूरी सावधानी के साथ किया जाता है। यह त्योहार मनोरंजन और सामूहिक एकता का प्रतीक माना जाता है।

A vibrant rural Indian festival features decorated bullock carts parading through a village as people celebrate with music, drums, and colorful powders.
The Cultural Significance of Chhattisgarh’s Stone Holi

इस होली को प्राचीन लोक परम्पराओं से जोड़ कर रखा गया है। ऐसा मान आजाता है कि यह होली पुराने समय में वीरता और साहस का प्रतीक थी। जैसे-जैसे समय बदल रहा है यह ख़ास होली सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले रही है। अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए इसे हमेशा से ही पुराने तरीके से मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ के लोग इसे केवल त्योहार ही नहीं बल्कि अपनी परंपरा और पहचान को बनाये रखने का माध्यम मानते हैं।

आज के मॉडर्न जमाने में भी गाड़ी-गोटी होली अपनी शानदार पहचान बनाये हुए इतिहास को साथ लेकर चल रही है। आधुनिक युग के चलते आजकल इसमें सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। सुरक्षा का ख़ास ख्याल रखने के लिए आम लोगो में से कुछ लोग और साथ ही सरकार के कुछ अधिकारी आपस में सलाह कर के इस परंपरा को सुरक्षित रूप से निभाने में लोगों कि मदद करते हैं। होली के हुल्लड़ में कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए इसका विशेष ध्यान रखा जाता है। यह होली काफी मशहूर है इसलिए इसे मानाने और देखने दूसरे राज्यों से भी लोग आते हैं।

A Traditional Holi Like No Other: Gaadi-Goti Festival Story

गाड़ी-गोटी होली का खासतौर पर परम्परागत तरीके से आयोजन किया जाता है। इस शुभ उत्सव को खेलने से पहले सभी लोग ईश्वर को याद करके पूजा-प्रार्थना करते हैं। इसके बाद खेलने के लिए दो अलग-अलग घुटन में बँट कर  बड़े से मैदान या आयोजन कि जगह पर एकजुट होते हैं। इसके बाद पत्थरों से होली खेलने की अनूठी परंपरा निभाई जाती है। होली खेलने के साथ ही ढोल,नगाड़े,लोकगीत, पारम्परिक नृत्य आदि का प्रदर्शन भी होता है। इस परंपरा कि सुरक्षा का ध्यान रखते हुए हमारे बड़े-बुजुर्ग इसे अपनी निगरानी में आयोजित करवाते हैं।

साधारण तौर पर होली रंग,गुलाल,अबीर और पानी से खेली जाती है , लेकिन यहाँ की होली में छोटे-छोटे पत्थर भी अपनी जगह बना लेते हैं। छत्तीसगढ़ के लोग इस विशेष होली को खेलने के लिए पारम्परिक रूप से तैयार होते हैं। लोकगीत और लोगों का बढ़-चढ़ कर इस होली में हिस्सा लेना ही इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ा देता है। यह परंपरा पुराने रीति-रिवाजों और गाँव के साधारण लेकिन बेहद अद्भुत संस्कृति की झलक का एहसास कराती है।

उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली तरूणा ने 2020 में यूट्यूब चैनल के ज़रिए अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इंडिया टीवी के लिए आर्टिकल्स लिखे और नीलेश मिश्रा की वेबसाइट पर कहानियाँ प्रकाशित हुईं। वर्तमान में देश की अग्रणी महिला पत्रिका...