Overview: पीतल क्या है और इसका महत्व
पीतल के बर्तन न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए भी अत्यंत लाभकारी होते हैं। इनका प्रयोग पूजा, जन्म और मृत्यु से जुड़े संस्कारों में अनिवार्य रूप से किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में पीतल को बृहस्पति ग्रह से जोड़कर देखा जाता है और यह घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने वाला माना जाता है। हालांकि, खट्टे पदार्थों को इसमें नहीं रखना चाहिए।
Brass Utensils Benefits: भारतीय संस्कृति में धातुओं का अपना विशेष स्थान है और इनमें पीतल (Brass) को सबसे पवित्र और शुभ धातु माना गया है। प्राचीन काल से लेकर आज तक घरों में पीतल के बर्तन पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों और विशेष कार्यों के लिए प्रयोग किए जाते हैं। न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि स्वास्थ्य और वास्तु शास्त्र के अनुसार भी पीतल का महत्व अत्यधिक है। आइए जानते हैं कि पीतल को इतना खास क्यों माना गया है और यह किन-किन कार्यों में प्रयोग होता है।
पीतल क्या है और इसका महत्व
पीतल एक मिश्र धातु है, जो तांबे और जस्ता (Copper & Zinc) के मिश्रण से बनती है। इसका नाम “पीतल” संस्कृत के “पीत” शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है पीला रंग। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीला रंग भगवान विष्णु का प्रतीक है और इसलिए पीतल को अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है।
धर्मशास्त्रों और वेदों में भी पीतल का महत्व बताया गया है। आयुर्वेद में इसे भगवान धन्वंतरि का प्रिय धातु माना गया है। महाभारत की कथा के अनुसार, सूर्यदेव ने द्रौपदी को पीतल का अक्षय पात्र दिया था, जिसमें भोजन कभी कम नहीं होता था।
धार्मिक दृष्टि से पीतल का महत्व
पीतल का सीधा संबंध गुरु बृहस्पति ग्रह से माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बृहस्पति ग्रह की शांति और कृपा प्राप्त करने के लिए पीतल का प्रयोग करना शुभ होता है। कन्यादान, पूजा-अर्चना, शिवलिंग पर दूध चढ़ाना, और भगवान को भोग लगाने जैसे सभी धार्मिक कार्यों में पीतल के बर्तनों का प्रयोग शुभ माना जाता है। बगलामुखी देवी के विशेष अनुष्ठानों में केवल पीतल के ही बर्तन प्रयोग किए जाते हैं। घर में पीतल के कलश को रखना अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाला माना जाता है।
जन्म से लेकर मृत्यु तक पीतल का प्रयोग
भारतीय परंपरा में पीतल का उपयोग जन्म से लेकर मृत्यु तक होता है। कई जगह मान्यता है कि शिशु के जन्म पर पीतल की थाली को छुरी से बजाया जाता है ताकि पितृगण को सूचना दी जा सके कि उनके वंश में नया सदस्य आया है। अंत्येष्टि के बाद अस्थि विसर्जन, श्राद्ध और पिंडदान जैसे कर्मों में पीतल के कलश का प्रयोग होता है। 12वें दिन के शुद्धि हवन में गंगा जल से भरा पीतल का कलश पूरे घर को पवित्र करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
स्वास्थ्य के लिए पीतल के लाभ
पीतल के बर्तन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। पीतल में पकाया भोजन स्वादिष्ट और पौष्टिक होता हैयह शरीर को ऊर्जा और तेज प्रदान करता है। पीतल के बर्तन जल्दी गर्म होते हैं, जिससे गैस और ऊर्जा की बचत होती है। यह अन्य धातुओं की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं। पीतल के कलश में रखा जल शरीर में ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
ध्यान रखें
दही, छाछ, लस्सी, अचार, दूध या किसी भी खट्टे पदार्थ को पीतल के बर्तनों में न रखें। इनसे धातु में रासायनिक प्रतिक्रिया हो सकती है, जो सेहत के लिए हानिकारक है।
पीतल का वास्तु और ज्योतिषीय महत्व
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में भी पीतल का विशेष महत्व है। यह बृहस्पति ग्रह की कृपा दिलाने के लिए उत्तम माना जाता है। पीतल के बर्तनों को दान करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। घर में पीतल का कलश रखने से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। धार्मिक अनुष्ठानों में पीतल का प्रयोग घर में शांति और समृद्धि लाता है।
पीतल से जुड़े उपाय और उनके लाभ
भाग्य वृद्धि के लिए
रात में पीतल की कटोरी में चना दाल भिगोकर सिरहाने रखें। सुबह इसे गुड़ के साथ गाय को खिलाएं।
अटूट धन प्राप्ति के लिए
पूर्णिमा के दिन भगवान श्रीकृष्ण पर शुद्ध घी से भरा पीतल का कलश चढ़ाएं और बाद में इसे किसी ब्राह्मण को दान करें।
लक्ष्मी कृपा के लिए
वैभव लक्ष्मी पूजन में पीतल के दीपक में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
दुर्भाग्य से मुक्ति के लिए
पीतल की कटोरी में दही भरकर पीपल के पेड़ के नीचे रख दें।
सौभाग्य के लिए
पीतल के कलश में चना दाल भरकर विष्णु मंदिर में अर्पित करें।
