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Mystery of life and death

Mystery of life and death

जो व्यक्ति अपने मन को विकास-रहित रखते हैं वे वस्तुत: मृत हैं। जीवन के रहस्य को सुलझाने के लिए आपको प्रतिदिन एक नया जन्म लेना चाहिए। इसका अर्थ है कि आपको किसी न किसी रूप में अपना सुधार करने के लिए प्रतिदिन अवश्य प्रयास करना चाहिए।

जीवन और मृत्यु के विषय में जानने योग्य बहुत सी अद्ïभुत बातें हैं, और ध्यान ही एक मार्ग है जिससे इन्हें जाना जा सकता है। इस संसार में ईश्वर के पुत्र की भांति जीना सीखें। मनुष्य के लिए मृत्यु आतंक बनी हुई है, क्योंकि उसने ईश्वर को अपने से बाहर कर दिया है। सभी कष्टïदायक वस्तुएं हमें डराती हैं, क्योंकि हम संसार से इसके रहस्य एवं ध्येय को समझे बिना प्रेम करते हैं। परंतु जब हम पत्येक वस्तु को ईश्वर के रूप में देखते हैं, तब हमें कोई भय नहीं रह जाता।

हम जीवन और मृत्यु में निरंतर ‘जन्म लेते रहते हैं। ‘मृत्यु एक बहुत गलत प्रयुक्त नाम है, क्योंकि मृत्यु है ही नहीं, जब आप जीवन से थक जाते हैं तब आप केवल अपने शरीर रूपी ऊपरी चोले को उतार देते हैं और सूक्ष्म जगत में वापस चले जाते हैं।

मृत्यु का अर्थ है ‘अन्त। एक कार जिसके पुर्जे घिस चुके हैं वह मृत हो गई है, उसका अन्त हो गया है और उसी प्रकार, मृत्यु से भौतिक शरीर का अन्त हो जाता है। परंतु अमर आत्मा मृत नहीं हो सकती। प्रत्येक रात्रि को नींद में, आत्मा भौतिक शरीर की चेतना के बिना रहती है, लेकिन यह मृत नहीं होती। मृत्यु केवल एक लंबी निद्रा है, जिसमें आत्मा भौतिक शरीर की चेतना के बिना, सूक्ष्म शरीर में रहती है। परंतु जब हम सो रहे होते हैं, हम मरे नहीं होते हैं और न ही हम पूर्ण रूप से अचेत होते हैं, क्योंकि जब हम जागते हैं, हमें याद रहता है कि हमें अच्छी नींद आई या नहीं। इसी प्रकार, मृत्यु के बाद की अवस्था में हम मरते नहीं हैं।

जो व्यक्ति अपने मन को विकास-रहित रखते हैं वे वस्तुत: मृत हैं। जीवन के रहस्य को सुलझाने के लिए आपको प्रतिदिन एक नया जन्म लेना चाहिए। इसका अर्थ है कि आपको किसी न किसी रूप में अपना सुधार करने के लिए प्रतिदिन अवश्य प्रयास करना चाहिए। सर्वोपरि, ज्ञान के लिए प्रार्थना करें, क्योंकि ज्ञान के साथ प्रत्येक अन्य वस्तु आ जाती है। मनोदशाओं द्वारा नियंत्रित न होकर ज्ञान द्वारा नियंत्रित हों और उस ज्ञान से, रचनात्मक विचारों और क्रियाकलापों को विकसित करें।

अपने सुधार के लिए और दूसरों के कल्याण के लिए रचनात्मक चिन्तन करने में व्यस्त रहें, क्योंकि जो कोई भी ईश्वर के साम्राज्य में प्रवेश करना चाहता है उसे प्रतिदिन दूसरों का भला करने का भी प्रयत्न अवश्य करना चाहिए। यदि आप इस शैली को अपनाते हैं, तो आप मनोदशाओं को दूर करने वाले आनन्द का अनुभव करेंगे और जानेंगे कि आप मानसिक रूप से, भौतिक रूप से और आध्यात्मिक रूप से उन्नति कर रहे हैं। आप ईश्वर तक अवश्य ही पहुंचेंगे, क्योंकि यह मार्ग स्वर्ग के साम्राज्य की ओर जाता है।

मनोदशाओं पर विजय पाने कि लिए निरन्तर प्रयास करते रहें, क्योंकि जैसे ही आप मनोदशा से ग्रस्त हो जाते हैं, आप अपनी आत्मा रूपी मिट्ïटी में गलतियों के बीजों को बोते हैं। मनोदशाओं से घिरने का अर्थ है धीरे-धीरे मृत्यु की ओर बढ़ना, परंतु यदि आप किसी भी अशान्त करने वाली घटना के होते हुए भी प्रतिदिन मुस्कुराने का प्रयत्न करते हैं, तो आप एक नया जन्म पाएंगे। जब तक यह मानवीय जन्म एक उच्च आध्यात्मिक जन्म में रूपान्तरित नहीं हो जाता, आप ईश्वर में ‘दोबारा जन्म नहीं ले सकते।

गीता हमें सिखाती है: ‘जो सांसारिक जीवन के सुखी और दुखी पक्षों के प्रति न हर्षित होता है, न द्वेष करता है न शोक करता है, न कामना करता है तथा जो शुभ और अशुभ कर्मों से संबंधित चेतना का त्यागी है वह भक्तियुक्त पुरुष मुझको प्रिय है। आशावादी प्रवृत्ति रखना और मुस्कुराने का प्रयास करना रनात्मक और लाभदायक है, क्योंकि जब भी आप दिव्य गुणों, जैसे कि उत्साह और आनन्द, को व्यक्त करते हैं, दोबारा जन्म लेते हैं, आपके सच्चे आत्म स्वभाव के व्यक्त होने से आपकी चेतना नवीन रूप ले रही है। यही आध्यात्मिक ‘पुनर्जन्म है, जो आपको ‘ईश्वर के साम्राज्य को देखने के योग्य बनाता है।

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