Kids Vaccination

Kids Vaccination: ओमीक्रॉन के रूप में कोरोना के वायरस ने फिर से दस्तक देनी शुरू कर दी है। अभी तक तो बड़ों का ही टीकाकरण पूरा नहीं हुआ है और बच्चों के टीकाकरण की तो केवल बात ही चल रही है। ऐसे में नवजात शिशु को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है इसलिए नवजात की मां होने के कारण आपकी जिम्मेदारी काफी बड़ी हो जाती है। दिल्ली में बीते 20 दिसंबर तक 107 नए मरीज मिलने के साथ ही पूरे देश में खलबली मचनी शुरू हो गई है। अगर आपका भी नवजात शिशु है तो आपको भी सतर्क हो जाने की जरूरत है। फिलहाल तो नवाजात को कोविड वैक्सीन नहीं लगाया जाएगा। लेकिन जिन वैक्सीन को नवजातों को लगाने की जरूरत है वह आप तुरंत अपने शिशु को लगवा लें।

ये 5 वैक्‍सीन नवजात शिशु की है जिंदगी

पोलियो वैक्‍सीन

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इंडिया पोलियो मुक्त देश है और इसे यह उपल्बिध 2014 में हासिल हुई थी। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए अपने शिशु के पैदा होते ही उसे पोलियो का टीका लगवाएं। अगर आप ऐसा नहीं करती हैं तो आप अपने बच्चे को जीवन भर के लिए अपंग बना सकती हैं।

रोटावायरस वैक्‍सीन

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यह वायरस बहुत ही गंभीर होता है और लगभग हर शिशु को होने का खतरा होता है। इस वायरस से संक्रमित होने पर शिशु को दस्त शुरू हो जाती हैं और बच्चा बहुत कमजोर पड़ जाता है। इसमें उल्टी और बुखार भी होता है। अगर समय पर इलाज नहीं किया गया तो बच्चे के जीवन से हाथ धोना पड़ सकता है।
रोटावायरस इंफेक्‍शन से बचाने के लिए बच्‍चे को दो ओरल रोटावायरस वैक्‍सीन दी जाती हैं। इस वैक्‍सीन के दो से तीन डोज दिए जाते हैं। पहली वैक्सीन तीन महीने में दी जाती है और फिर छठवें व आठवें महीने में दूसरी व तीसरी वैक्सीन दी जाती है।

हेपेटाइटिस बी

अगर शिशु के जन्म के बाद आप उसे घर ले जाने की तैयारी कर रही हैं तो सबसे पहले हेपेटाइटिस बी का टीका अपने बच्चे को लगवा लीजिए। वैसे तो अस्पताल वाले ये टीका स्वंय लगा देते हैं। लेकिन एक बार घर जाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें कि उनके शिशु को यह वैक्सीन लग गई है कि नहीं। हेपेटाइटिस बी की बीमारी बच्‍चे के लिवर को धीरे धीरे नुकसान पहुंचा सकता है। ये वायरस खून और बॉडी के फ्लूइड्स में मिलता है जो कि कई महीनों तक रहता है।

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हेपेटाइटिस ए

यह लीवर से जुड़ी बीमारी का कारण बनता है। यह बीमारी एक से दो महीने तक रहती है और इसका इलाज काफी लंबा और मुश्किल होता है। इसमें भी जान को खतरा होता है। इसे हल्के में ना लें क्योंकि इसकी वैक्सीन बचपन में ना लगाने पर जिंदगी भर के लिए खतरा बना रहता है और इस वायरस का शिकार आपका बच्चा किसी भी उम्र में हो सकता है। तो जिंदगी भर के लीवर से जुड़ी बीमारियों के खतरे को टालने के लिए शिशु के पैदा होने के एक साल के अंदर हेपेटाइटिस ए का टीका लगवाएं। इसके दो शॉट लगाए जाते हैं।

वैरिसेला वैक्सीन

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चेचक का नाम आपने सुना होगा। घर में किसी एक को होता है तो बच्चों को भी हो जाता है। इसमें तेज बुखार होता है और शरीर में हर जगह फोड़े हो जाते हैं। पूरा शरीर दर्द देता है और यह बच्चों को काफी कमजोर कर देता है। इस खतरनाक छुआछात वाली बीमारी से खुद के बच्चे को बचाने के लिए वैरिसेला वैक्सीन लगवाएं। अगर आपका शिशु 12 महीने का हो गया है तो तुरंत अस्पताल जाकर उन्हें यह वैक्सीन लगवाकर आ जाएं। इसकी भी दो डोज दी जाती है। पहली 15 महीने पर और दूसरी 18 महीने पर।

तो देर ना करें और आज ही इन वैक्सीन के चेकलिस्ट बनाकर अपने शिशु को ये वैक्सीन लगवाएं।

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