बात उस समय की है जब मैं 5 वीं कक्षा में पढ़ता था। मेरा स्कूल शहर से बाहर 6 किमी. दूर सुनसान इलाके में था। जिस कारण मैं बस से आता-जाता था। वार्षिक परीक्षाओं की बात है, मैं गणित के पेपर के दिन लेट जो गया। जिससे मेरी बस छुट गई। मैंने सोचा कि अगर जल्दी ही स्कूल नहीं पहुंचा तो पेपर छुट जाएगा। एक मोटरसाइकिल सवार स्कूल की तरफ जा रहा था। मैंने उसे पेपर की बात बता्कर लिफ्ट मांगी तो वह तैयार हो गया। रास्ते में उसने मुझे बताया कि उसने मेरा अपहरण कर लिया है। मैं बहुत घबरा गया। पर उपर से बहादुर बनते हुए मैनें उससे झूठ बोला कि मेरे पिताजी तो पुलिस में सिपाही हैं, इस पर वो बोला कि फिर भी कम से कम पचास हजार तो दे ही देंगे। इस पर मैंने कहा कि अगर आपको पैसे मिल जाएं तो एक-दो हजार मुझे भी दे देना क्योंकि मेरे पिताजी मुझे जेबखर्च को सिर्फ 5 रुपये ही देते हैं। इतने में ही स्कूल आ गया तो उस आदमी ने मुझे हंसते हुए बताया कि मैं तो मजाक कर रहा था लेकिन तुम्हें किसी अनजान आदमी से लिफ्ट नहीं मांगनी चाहिए। स्कूल पहुंचकर देखा तो पेपर शुरु हो चुका था। मैंने ईश्वर को धन्यवाद किया तथा उस आदमी की बात हमेशा के लिए गांठ बांध ली।
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