Meri Counselling
Meri Counselling

Hindi Love Story: मेरा नाम मनुजा है, उम्र 35 साल, पेशे से मैं एक मनोवैज्ञानिक हूं। पिछले 5 साल से मैं अपने पेशे में अध्ययन कर रही हूं और इन 5 सालों में मैंने दर्जनों औरतों का इलाज किया है ,जो मां बनने के बाद डिप्रेशन में जा चुकी थी। उन्हें मैं हजारों सलाह और दवाइयां देकर ठीक करने की कोशिश करी रही हूं। उन में से ज्यादातर औरतों की शिकायत यही होती थी कि हमारा बच्चा हमेशा रोता रहता है, सोता नहीं है और हमें सोने नहीं देता है। अब हम कुछ भी नहीं कर पा रही हैं पर मैं उनकी सुनती उन्हें समझती कुछ समय में सब ठीक हो जाएगा। आप ये दवाइयां समय से लें। पर आज मैं खुद एक मनोवैज्ञानिक के पास बैठी हूं।

दो महीने पहले एक प्यार से बच्चे की मैं मां बनी हूं। उम्र के 35 वर्ष में आकर मां बनने का निर्णय मेरा खुद का था। मुझे लगा था, इतनी औरतों के अनुभव को सुनकर मैंने आने वाली सभी दिक्कतों को समझ लिया है, अब मुझे कोई परेशानी नहीं होगी। मैं मानसिक रूप से बहुत कठोर हूं, सब संभाल लूंगी। पर मां बनने के दो महीने के अंदर ही मुझे समझ में आ गया कि मैं मानसिक रूप से कैसी हूं।

मैंने अपने पति के कहने पर काउंसलर के पास जाने का निर्णय तो ले लिया था, पर मैं अब तक समझ चुकी थी कि वह भी मेरी कोई मदद नहीं कर पाएगा, क्योंकि दर्जनों औरतों से मिला अनुभव भी मेरे लिए कम है तो एक काउंसलर जो कि पुरुष है, मेरी क्या मदद कर पाएगा? जिसके पास अनुभव भी नहीं है, मां बनने के बाद होने वाली परेशानियों का, बदलावों का। वह मेरी किस तरह से मदद कर सकता है? पर मैं इस बार थोड़ी गलत साबित हुई, क्योंकि उसने मुझे वह समझाया जो किसी औरत ने मुझे नहीं बताया था।

मैं काउंसलिंग रूम में यह सोचकर बैठी थी कि वह क्या ही मेरी मदद कर पाएगा, पर उसने मुझसे कहा आप यहां बैठो मैं बाहर आपके पति से दो बात करके आता हूं और जाते हुए उसने एक नर्स से मेरा बच्चा लेकर नर्सरी रूम में ले जाकर खिलाने के लिए कहा। मैं पांच मिनट बैठी हुई उस कमरे को देख रही थी, इतने में दरवाजा खुला पर वह डॉक्टर नहीं थे, यह मेरे पति थे उनके हाथ में फोन की जगह कॉफी के कप थे।

Hindi Love Story
Live In Each Other Pockets

मैं आश्चर्य से उन्हें देख रही थी। उन्होंने टेबल पर कॉफी रखी और मेरे पास एक कुर्सी खींचते हुए बैठ गए। उन्होंने बड़े प्यार से मुझे कॉफी का कप देते हुए पीने का आग्रह किया और अपने हाथों में मेरा हाथ लेकर बैठ गए। हमने साथ में कॉफी पी, ऐसा काफी समय के बाद हुआ था। मैंने कॉफी पीकर कप रखते हुए कहा चले…..?

उन्होंने मुझे बैठने को कहा, फिर मेरे हाथों को पकड़ते हुए पूछा, तुम किस बात से डर रही हो? मैंने कुछ नहीं कहा, या कहूं मैं उनसे बात करने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि प्रेगनेंसी से लेकर अब तक हमारे बीच कोई खास बातचीत नहीं हुई थी। मेरे दस मिनट चुप रहने के बाद उन्होंने फिर से बड़े प्यार से पूछा तुम क्यों डर रही हो….?

अबकी बार मैंने बोलना शुरू किया, क्या मेरे लिए सब खत्म हो चुका है….? तुम्हारा प्यार, हमारा साथ , मेरा कैरियर इतना बोलते बोलते अपने आंसुओं को छुपा कर मैं चुप हो गई। उन्होंने मेरे हाथों को सहलाते हुए पूछा ऐसा क्यों कह रही हो, क्या हुआ है? अबकी बार मैंने थोड़ा गुस्से में कहा, क्यों तुम्हें नजर नहीं आता क्या हुआ है?

जब से मैं मां बनी हूं, मेरा सारा समय बच्चे की देखभाल में ही निकल जाता है। मेरा शरीर पहले जैसा नहीं दिखता, ना ही मैं कहीं घर से बाहर जा पाती हूं। मेरा ज्यादातर समय बच्चे के साथ अकेले गुजर जाता है, बिल्कुल अकेले और खामोश । तुम ऑफिस से आकर भी नहीं आते, क्योंकि ना हमारी कोई बात होती, ना विचार। ऐसा महसूस होता है, मुझे कि तुम इस घर में बस एक मेहमान की तरह आते हो , खाते हो और सो जाते हो। थोड़ी सांस लेते हुए मैंने फिर बोलना शुरू किया, बताओ आखिरी बार हमने कब समय साथ बिताया था?
मुझे शांत करने की मनसा से वो बोले, आज और अभी ।

अब मुझे थोड़ा शक हुआ कि डॉक्टर ने इन्हें सब समझा कर भेजा है । इतने में उन्होंने मुझसे सॉरी कहा और मेरे माथे को प्यार से चुमा और हम पांच मिनट एक दूसरे के साथ शांत बैठे रहे। पांच मिनट के बाद डॉक्टर हमारे परमिशन के साथ अंदर आए और पूछा, कैसी रही तुम्हारी काउंसलिंग? मैंने हैरानी के साथ डॉक्टर को देखा।

डॉक्टर ने कहना शुरू किया मेरी पत्नी ने जब तक मुझे नहीं समझाया था कि मां बनना कितना परेशानी भरा हो सकता है, तब तक मैं उसे दुनिया की सबसे अच्छी और बड़ी खुशी ही समझता रहा। इतना कहने के बाद डॉक्टर ने मुझे दस दिन की दवा में दो गोलियां एक सुबह एक शाम लेने की दी और मेरे पति को जीवन भर के लिए मुझे दवा के तौर पर अपना समय और ध्यान देने को कहा। इस तरह से हमारी आज की काउंसलिंग पूरी हुई।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...