Hindi Motivational Story: श्याम चुपचाप रहता था, किसी से ज्यादा बात नहीं करता था, इसलिए उसका कोई दोस्त भी नहीं था। एक दिन क्लास में उसे गुमसुम देख अध्यापक उसके पास आए और बाद में मिलने को कहा। क्लास के बाद श्याम अध्यापक के पास पहुँचा। तुम अक्सर गुमसुम और शांत रहते हो। किसी से बात भी नहीं करते। इसका क्या कारण है। अध्यापक ने पूछा। श्याम बोला सर मेरी ज़िंदगी बहुत ख़राब रही है। कुछ बड़ी ही दुखदायी घटनाएँ हुई हैं। मैं उनके के बारे में सोच कर परेशान रहता हूँ । अध्यापक ने ध्यान से श्याम की बात सुनी और उसे रविवार को घर पर बुलाया।
श्याम नियत समय पर अध्यापक के घर पहुँच गया। श्याम क्या तुम शिकंजी पीना पसंद करोगे? अध्यापक ने पूछा। श्याम ने हाँ कहा तो अध्यापक ने जानबूझ कर नमक अधिक डाल दिया और चीनी की मात्रा कम रखी। शिकंजी का एक घूंट पीते ही श्याम ने अजीब-सा मुँह बनाया। अध्यापक ने पूछा क्या हुआ, पसंद नहीं आई? जी इसमें नमक थोड़ा
अधिक पड़ गया है। श्याम अपनी बात कह ही रहा था कि सर ने बीच में रोकते हुए कहा, ओफ-ओ कोई बात नहीं मैं इसे फेंक देता हूँ। अब ये किसी काम का नहीं है। ऐसा कह कर सर गिलास उठा ही रहे थे कि श्याम ने उन्हें रोकते हुए कहा, ‘सर नमक थोड़ा -सा अधिक हो गया है तो क्या, हम इसमें थोड़ी चीनी मिला दें तो यह ठीक हो जाएगी।’ बिल्कुल ठीक, यही मैं तुमसे सुनना चाहता था। अब इस स्थिति में तुम जीवन से तुलना करो।
शिकंजी में नमक का ज्यादा होना जीवन में हमारे साथ हुए बुरे अनुभवों की तरह है। अब इस बात को समझो, शिकंजी का स्वाद ठीक करने के लिए हम उसमें से नमक नहीं निकाल सकते। इसी तरह हम अपने साथ हो चुकी दुखद घटनाओं को अपने जीवन से अलग नहीं कर सकते, पर जिस तरह हम चीनी डाल कर शिकंजी का स्वाद ठीक कर सकते हैं, उसी तरह पुरानी कड़वाहट मिटाने के लिए लाइफ में भी अच्छे अनुभवों की मिठास घोलनी पड़ती है। यदि तुम भूत का ही रोना रोते रहोगे तो ना तुम्हारा वर्तमान सही होगा और ना ही भविष्य।
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