Hindi Motivational Story: संतश्री के सैंकड़ों शिष्य थे। सभी अनुशासित‚ ज्ञानी व समझदार। संत श्री इसी असमंजस में थे कि वे अपना उत्तराधिकारी किसे चुने। एक दिन प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा – ‘प्रिय शिष्यों! चाहे कुछ भी हो जाए अपने गुरु को कभी नाराज़ मत करना। वे नाराज़ हो गए तो अर्थ का अनर्थ हो जायेगा। “यदि उन्होंने क्रोधित हो अभिशाप दे दिया तो समझो नरक निश्चित है।” इतना सुनते ही एक शिष्य ने खड़े होकर करबद्ध विनम्र निवेदन किया-क्षमा करें गुरुदेव! जो गुरु अपने शिष्यों से नाराज़ हो, उनका अहित चाहे, ऐसा व्यक्ति सच्चा गुरु हो ही नहीं सकता है। सच्चा गुरु तो वह है जो हर परिस्थिति में समभाव रखते हुए भटके हुए भक्तों को प्रेमपूर्वक सत्य मार्ग पर लाने का प्रयास करे।
इतना सुनते ही संतश्री गदगद हो गए और अपने आसन से उठ उस शिष्य को गले लगा लिया। उनकी बहुत बड़ी चिंता समाप्त हो गई क्योंकि आज उन्हें अपना उत्तराधिकारी मिल गया था।
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