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भैया ने कुछ नहीं किया
Stories of Grihalakshmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां – काट-काट कर पूरा मुंह ही सुजा दिया। तभी मेरा छोटा देवर कमरे में आया। शायद उसने पूरी बात नहीं सुनी थी। वो बोला, ‘भैया की शिकायत कर रही हो क्या भाभी?’ उसकी बात सुनते ही मैं अचकचा गई। मेरे मुंह से इतना ही निकला, ‘तुम्हारे भैया ने कुछ नहीं किया, मैं तो मच्छरों की बात कर रही थी।’ इतना सुनते ही देवर जोर से हंसे और अपनी बात पर मुझे इतनी ज्यादा शर्म आई कि मैं वहां से भाग कर दूसरे कमरे में आ गई।

भैया ने कुछ नहीं किया
Stories of Grihalakshmi

बाबा! तेरी पोटली…

बात फरवरी 1995 की है। मेरी शादी को दो महीने ही हुए थे। मैं बीए फाइनल में पढ़ रही थी। मेरे पति की पोस्टिंग राजस्थान के अनुमानगढ़ जिले के बैंक में थी। हम जहां रहते थे, वहां से कहीं भी जाना हो तो रास्ते में रेलवे फाटक पड़ता था, जोकि अक्सर हमारे यहां जाने के समय बंद मिलता था। ऐसा ही हुआ उस दिन, हमें किसी के यहां शुभमुहूर्त में जाना था। सुबह के सात बजे थे हम स्कूटर पर फाटक से कुछ दूरी पर ही थे कि फाटक बंद होता नजर आया। फाटक के दूसरी ओर एक ऊंटगाड़ी जा रही थी, जिसमें कपास की बहुत सारी पोटलियां रखी हुई थीं। देखते ही देखते एक पोटली उस बैल गाड़ी से नीचे गिर गई। उसे चलाने वाले बुजुर्ग बाबा को इसका पता नहीं था। मेरी अल्हड़ उम्र थी, सो देखते ही चलती स्कूटर से कूद पड़ी और जोर से चिल्लाई- ‘बाबा! तेरी पोटली…।’
बाबा रुक गया, लेकिन मेरा बस इतना कहना भर था कि आस-पास खड़े लोग जो रेलवे फाटक के खुलना का इंतजार कर रहे थे हंसने लगे और मेरे पति गुस्से में बड़बड़ा रहे थे। उस वक्त मैंने शर्म से अपना चेहरा छुपा लिया परंतु आज इतने वर्षों बाद भी मेरे पति उस किस्से को नहीं भूलते और दोनों बच्चों को बड़े ही मनोरंजक तरीके से सुनाते हैं और हम सब खूब हंसते हैं।

भैया ने कुछ नहीं किया
Stories of Grihalakshmi

ट्रैफिक जाम हो गया

मुझे साइकिल चलाना नहीं आता था। मेरे पति और बेटे के कहने पर मैंने साइकिल चलाना सीखा। एक दिन मेरे पति बोले कि साइकिल से कैंटीन चली जाओ, तो मैं साइकिल से कैंटीन चली गई। उस समय मेरे पति भारतीय वायु सेना में थे। हम लोग आगरा एयरफोर्स स्टेशन के अंदर रहते थे। वापस आते समय एक जगह सड़क पर ब्रेकर क्रॉस करने के लिए मैंने तेज पैडल मारा और ब्रेकर क्रॉस कर गई, लेकिन इसी तेजी के चक्कर में मैं दोबारा पैडल चलाना भूल गई और साइकिल के साथ-साथ नीचे सड़क पर गिर गई। वहीं पास में वायु सैनिकों का पीटी ग्राउंड था और उस समय सब लोग पीटी खत्म करके बाहर निकल रहे थे। जब मैं उठ कर साइकिल खड़ी कर रही थी तो मैंने देखा, एक ओर से ट्रैफिक जाम हो गया था। कुछ लोग पास आकर पूछने लगे, ‘कहीं चोट तो नहीं लगी।’ चोट तो नहीं लगी थी लेकिन इस पूर वाक्ये से मैं शर्म से लाल हो गई थी।

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