debu sarkar ne liya interview
debu sarkar ne liya interview

अगला दिन सच ही बड़ा रोमांचक था। कई रहस्यों का परदा खोलने वाला…!

“अच्छा निक्का, पर यह विचार तुम्हारे मन में एकाएक आया कैसे?” ‘प्रभात समाचार’ के प्रमुख संवाददाता देबू सरकार निक्का के कंधे पर हाथ रखकर बड़े प्यार से पूछ रहे थे।

वे पूरे हफ्ते तक इस खबर को हाईलाइट करने के मूड में थे। उसके लिए निक्का जासूस के इंटरव्यू से बढ़कर मसाला भला कहाँ मिल सकता था? इसलिए वे सीधा निक्का के घर जा पहुँचे और उससे मिलते ही, उन्होंने सवाल पर सवाल दागने शुरू कर दिए।

उनमें एक सवाल यह भी था कि “क्या तुम्हें पक्का यकीन था निक्का, कि इतने बड़े…मेरा मतलब, इतने नामी-गरामी चोर को तुम पकड़ लोगे? देखो निक्का, साफ-साफ बताना।…”

इस पर निक्का एक क्षण के लिए तो चुप रह गया। फिर धीरे-धीरे सुर में आते हुए उसने पूरा किस्सा सुनाया। निक्का के शब्दों के साथ-साथ हवा में बह रही थी ‘प्रभात समाचार’ की यह शानदार कवर स्टोरी…

देखिए अंकल, यह तो आपको भी पता है कि शहर में पिछले दिनों चोरियाँ काफी हो रही थीं। गोपालपुर में सभी लोग इन चोरियों से परेशान थे और आजिज आकर सोचते थे कि आखिर यह कौन बंदा है, जिसने हमारे शहर के शांतिपूर्ण माहौल को यों बिगाड़ दिया है? मानो पूरे शहर पर दुर्भाग्य की छाया-सी मँडरा रही हो!…

रोज अखबारों में उन चोरियों की खबरें छपती थीं। अब अखबार तो मैं रोज पढ़ता हूँ। आपका ‘प्रभात समाचार’ तो रोज हमारे घर आता ही है। पापा का फेवरेट अखबार है, जिसे पढ़े बगैर उन्हें चैन नहीं पड़ता। तो पापा को देखते-देखते मुझे भी इसकी आदत पड़ गई। और मैं समझता हूँ कि आपका पेपर इस मामले में अव्वल पेपर है, जिसने इन हाईटेक चोरियों के बारे में सबसे ज्यादा समाचार छापे और सबसे ज्यादा प्रमुखता के साथ छापे।…बल्कि आपने तो वे सुराग तक भी दिए, जिनसे चोर तक पहुँचा जा सकता था। साथ ही ऐसे महत्त्वपूर्ण संकेत दिए, जिससे उस हाईटेक चोर की मनःस्थिति या साइकोलॉजी को समझा जा सकता था।…

अब अखबार तो मैं रोज ही पढ़ता हूँ, इसलिए इन खबरों पर मेरी नजर पड़ती थी। अपने गोपालपुर शहर के लोगों की उत्तेजना भरी बातें भी मेरे कानों में पड़ती थीं। फिर एक बात पर मेरा ध्यान गया, जिसकी ओर आपके अखबार ‘प्रभात समाचार’ ने भी दो-एक दफा इशारा किया था कि ये चोरियाँ ज्यादातर शहर के सबसे धनी लोगों के यहाँ हुईं।…चाहे शहर के बड़े से बड़े व्यापारी हों, डाकखाने या बैंक के उच्च अधिकारी या फिर बड़े से बड़े मालदार सेठ, किस-किसको चोर ने नहीं लूटा।…लेकिन हैरानी की बात यह थी कि यह ऐसा अजब-गजब चोर था, जो बगैर किसी खून-खराबे के अपना काम करता था।

अपने गोपालपुर में कोई बीस-पच्चीस चोरियाँ तो इसने की ही हैं। हो सकता है कि कुछ ज्यादा ही हों, पर आज तक मैंने यह नहीं पढ़ा कि चोरी करने के लिए इसने कोई चाकू निकाला या पिस्टल या तमंचा इस्तेमाल किया। कुछ भी नहीं!…एकदम खाली हाथ ही यह आता था और बड़े प्यार से लूटकर ले जाता था। और भी मजे की बात यह कि वह कभी भी ताला नहीं तोड़ता था। बगैर ताला तोड़े ही जो वह चाहता था, खुद-ब-खुद उसके हाथ में आ जाता था।…तो फिर ताला तोड़ने की उसे जरूरत ही क्या थी?

यहाँ तक कि अंकल, किसी-किसी ने तो अपना सारा कीमती सामान, गहने और धन-दौलत अंदर से निकालकर खुद ही चोर के हाथ में पकड़ा दिए। कितनी हैरानी की बात है, पर है तो यह एकदम सही।…किसी चतुर सयाने शख्स ने सात तालों के अंदर भी अपने माल को रखा है तो भी चोर के हाथ में खुद-ब-खुद चाबियों का गुच्छा आ जाता था। जिस चीज की किसी को भनक नहीं होती थी, उसकी भनक भी उस महाचोर को लग जाती थी और वह बड़े मजे से उसे हथिया लेता था।

इससे भी मजे की बात यह थी अंकल, कि चोर जिसका सामान चुराने आता था, वह भी उससे लड़ता-झगड़ता नहीं था। कतई चिल्लाता या शोर नहीं मचाता था, बल्कि खुद-ब-खुद उसे ताले की चाबी या फिर अंदर से निकालकर अपना सारा बेशकीमती माल दे देता था। यहाँ तक कि उसे यह बता भी देता था कि उसने बाकी कीमती सामान कहाँ छिपाकर रखा है?…है न अंकल मजेदार बात! और बस, यहीं से मुझे क्लू मिला कि यह चोर तो कुछ अजब चोर है। इससे कुछ अलग ढंग से निबटना होगा।…

निक्का बताता जा रहा था और ‘प्रभात समाचार’ के संवाददाता देबू सरकार की मोटी सी नोटबुक में सब कुछ दर्ज होता जा रहा था।

ये उपन्यास ‘बच्चों के 7 रोचक उपन्यास’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ke Saat Rochak Upanyaas (बच्चों के 7 रोचक उपन्यास)