akhbaron ki surkhiyon mein gopalpur
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उस दिन दिल्ली और आसपास के सभी अखबारों में यह सनसनीखेज खबर छपी थी कि दुनिया का सबसे अनोखा चोर पकड़ा गया।

किसी ने लिखा, ‘दुनिया का मायावी चोर…!’ तो किसी और ने लिखा, ‘हमारे समय का सबसे सभ्य चोर…!’

‘प्रभात समाचार’ ने सबसे आकर्षक शीर्षक लगाया, ‘दुनिया का सबसे जीनियस चोर…!’

पहले ही पेज पर ज्यादातर अखबारों ने बड़ी प्रमुखता से यह खबर छापी थी। सुर्खियों में! साथ ही दुनिया के उस सबसे अनोखे चोर की बड़ी-सी तसवीर भी छापी गई थी। मुसकराते हुए।

जी हाँ, तसवीर में वह चोर बड़ी शालीनता से मुसकरा रहा था। बल्कि चोर जैसा तो कतई नहीं लग रहा था। कोई 25-30 वर्ष का एक बड़ा ही सुंदर गबरू जवान, जो खासा सभ्य, गंभीर और पढ़ा-लिखा लगता था।

चोर…? यह इंटेलीजेंट सा दिखने वाला आकर्षक लड़का, चोर…! भला कहीं ऐसे होते हैं चोर!

किसी को इस खबर पर यकीन नहीं आ रहा था।

और पूरी खबर पढ़कर तो लोग और भी हैरान रह गए। वे इससे पहले सोच भी नहीं सकते थे कि ऐसा भी कोई चोर हो सकता है या कि चोरी का ऐसा कोई नायाब तरीका भी हो सकता है!

और फिर जो बात चोर की तसवीर देखकर लोगों के मन में आई थी, खबर पढ़कर उसकी तस्दीक हो गई। चोर सचमुच कोई मामूली चोर नहीं था। बल्कि खूब पढ़ा-लिखा कंप्यूटर विशेषज्ञ था।

सचमुच हमारे समय का एक जीनियस…!

उसके बारे में कहा गया था कि चेन्नई के सुपर हॉराइजन सॉफ्टवेयर इंस्टीट्यूट से उसने कंप्यूटर की उच्चतम शिक्षा हासिल की और उस दौरान पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा। यहाँ तक कि पढ़ाई के दौरान ही उसने कुछ आश्चर्यजनक आविष्कार भी किए, जिन्हें देखकर उसके दोस्त ही नहीं, बल्कि उसे पढ़ाने वाले प्रोफेसर भी चकित थे।

पढ़ाई के साथ-साथ स्कॉलरशिप तो उसे मिला ही। वह असाधारण जीनियस था, जिसके बारे में सभी पूरे यकीन से कहते थे कि वह आने वाले कल का एक बड़ा वैज्ञानिक बनेगा।

लेकिन वह बड़ा वैज्ञानिक या आविष्कर्ता तो नहीं बना, बन गया चोर! क्यों भला?

‘प्रभात समाचार’ अखबार के प्रमुख संवाददाता देबू सरकार ने लिखा, “इसके पीछे कुछ फन यानी मजा लेने वाला भाव था, कुछ उसके अपने हालात का दबाव। और कुछ संगति यानी दोस्तों की मेहरबानी। हाँ, इतना जरूर हुआ कि वह असाधारण वैज्ञानिक होने के अपने मकसद और रास्ते से भटका तो बना एक असाधारण चोर ही। किसी मामूली या ऐरे-गैरे चोर से आप उसकी तुलना नहीं कर सकते।…”

देबू सरकार ने आगे बड़े ही रोचक अंदाज में, एक छोटे से बच्चे निक्का की उस्तादी के बारे में भी लिखा, जिसके आगे यह हाइटेक चोर फेल हो गया—

“मजे की बात यह है कि ऐसे अफलातून किस्म के हाईटेक चोर को पकड़ा गोपालपुर के नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छोटे-से बच्चे निक्का ने।…छोटे-से जासूस निक्का की जासूसी उस सुपरटेक चोर पर भारी पड़ी। और उसने उसे पकड़ा भी कुछ ऐसे अंदाज में कि वह बेचारा हाईटेक चोर तिलमिलाकर रह गया। इसलिए कि यह मियाँ के सिर पर मियाँ की जूती वाला मामला था, जिसे निक्का जासूस ने अंजाम दिया और महाचोर का मामला खल्लास हो गया।”

ये उपन्यास ‘बच्चों के 7 रोचक उपन्यास’ किताब से ली गई है, इसकी और उपन्यास पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंBachchon Ke Saat Rochak Upanyaas (बच्चों के 7 रोचक उपन्यास)