भारत कथा माला
उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़ साधुओं और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं
गर्मी का मौसम था। गेहूं की बालियां पकने लगी थीं। बीच-बीच में कभी-कभार हल्की-फुल्की बारिश हो जाती थी। जंगल के मध्य में बसे इस किसान ने खेतों के चारों ओर जाली की बाड़बंदी करके हरी गेहूं को तो खरगोश आदि जंगली जानवरों से बचा लिया था, परंतु जब यही गेहूं की फसल पकने को आई तो न जाने कहां से छोटे-छोटे पक्षियों के झुंड आते और सुबह-सुबह ही गेहूं के खेत में बालियों को कुतरना शुरू कर देते।
मवेशियों के अलावा किसान के घर में दो अन्य पालतू जानवर भी थे। एक तेज तर्रार कुत्ता जिसका नाम था टफी और एक बिल्ला, जिसे चिंगा पुकारा जाता था। टफी तो फसल की रखवाली के लिए हमेशा किसान के आगे-आगे चलता था, मगर चिंगा केवल खाता और सोया रहता। वह पेटू और आलसी बन गया था। किसान का परिवार उसके इस निकम्मेपन से परेशान था। किसान उसे इस उम्मीद से पास के गांव से लाया था कि वह घर और खेतों की चूहों से रखवाली करेगा। किसान के परिवार ने उसे दूध, दही खिला-पिलाकर बड़े चाव से पाला था।
एक दिन किसान तपती दोपहरी में खेतों में रखवाली कर रहा था। उसने देखा चार-पांच पक्षियों का झुंड बार-बार आ रहा है और गेहूं की पकी हुई बालियों को कुतर रहा है। किसान ने इन पक्षियों को बार-बार भगाया, मगर ये फिर बार-बार आ जाते। परेशान किसान घर आया। उसने देखा चिंगा आंगन में गमले की छाया में सोया हुआ है। उसने चिंगा को गोद में उठाया और खेतों की ओर चल पड़ा। चिंगा को जब महसूस हुआ कि वह किसान की गोद में है तो वह लाड़ से गर्र-गर्र की आवाज करने लगा। किसान ने उसे खेत में चुपचाप उस स्थान पर रख दिया जहां पक्षी बार-बार आ रहे थे। वह स्वयं थोड़ी दूर एक पेड़ की छांव में बैठ गया। आदत के अनुसार एक बार फिर पक्षियों का झुंड उसी ओर आ धमका। उनको आता देख चिंगा ने पोजिशन ले ली। जैसे ही पक्षी बालियों पर बैठने लगे, अचानक चिंगा बिजली की गति से ऊपर उछला और उसने अपने पंजों में दो पक्षियों को धर दबोचा। बाकी पक्षी शोर करते हुए दूर भाग गए।
अब किसान सुबह सवेरे चिंगा को खेत में छोड़ आता और वह पक्षियों को खेत में फटकने ही नहीं देता। अब तो खेत के चूहों की भी शामत आ गई।
इस प्रकार चिंगा खेतों के अंदर रखवाली करने लगा और टफी खेतों के बाहर मंडराते बंदरों और लंगूरों को दूर भगा देता।
अब तक फसल पूरी तरह पक चुकी थी। किसान ने फसल को काटकर और दानों को सुखाकर घर के अंदर रख दिया। भरपूर फसल पाकर किसान और उसका परिवार खुश था। जो प्यार टफी को मिलता था अब वैसा ही दुलार सभी चिंगा से भी करते थे।
भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’
