buddh ki chinta
buddh ki chinta

एक बार महात्मा बुद्ध किसी वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे। वृक्ष आम का था, काफी बड़ा और घना। ठंडी-ठंडी वायु चल रही थी। बुद्ध ध्यानमग्न थे तभी एक पत्थर उनके मस्तक पर आकर लगा। मस्तक से रक्त की धारा बह निकली।

उसी समय वहाँ पर तीन-चार बच्चे आए और इस कृत्य के लिए उनसे क्षमा माँगते हुए बोले, “हमें क्षमा करें भगवन, हमने आम गिराने के लिए वृक्ष पर पत्थर फेंका था जो भूलवश आपको लग गया। आंखे छलछला आई, वे विनम्रता से बोले, “बच्चों मुझे पत्थर लगा, इसका मुझे तनिक भी दुःख नहीं, दुःख तो केवल इस बात का है कि पत्थर लगने पर भी वृक्ष तुम्हें मीठा फल देता है और जब मुझे पत्थर लगा तो तुम भयभीत हो गए। मैं तुम्हें भय के अतिरिक्त कुछ न दे पाया।” भगवान बुद्ध के इस कथन से बच्चे उनके चरणों में झुक गए।

ये कहानी ‘ अनमोल प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंAnmol Prerak Prasang(अनमोल प्रेरक प्रसंग)