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Hindi Story: एक बार एक पत्रकार ने अखबार में अपनी एक सर्वेक्षण रिर्पोट में छाप दिया कि 50 प्रतिशत औरतें बेवकूफ होती है। यह रिर्पोट छपते ही इलाके की सभी औरतों ने जबर्दस्त विरोध करना शुरू कर दिया। पत्रकार घबरा कर अपने संपादक के पास गया और उन्हें सारा किस्सा बताया। संपादक ने कहा-‘इसमें इतना परेशान होने की कोई बात नहीं है।

तुम कल के अखबार में यह छाप देना कि 50 प्रतिशत औरतें समझदार होती है।’ पत्रकार ने संपादक महोदय की बात मानते हुए ऐसा ही लिख दिया। इस खबर को पढ़ कर सभी औरतें खुश हो गई। पत्रकार ने संपादक साहब से पूछा कि ‘बात तो मैंने भी वही कही थी फिर औरतों ने मेरी खबर पर इतना हंगामा क्यूं किया? संपादक ने पत्रकार को समझाते हुए कहा कि अक्ल सिर्फ बादाम खाने से नहीं बढ़ती ठोकरें खाने से आती है। पत्रकार को यह कहना पड़ा कि मैं आपकी बात का मतलब नहीं समझा। संपादक महोदय ने कहा कि यह सारा खेल अनुभव का है। मोटे तौर पर किसी को यही बात समझानी हो तो इसे इस प्रकार भी कहा जा सकता है कि जैसे बिना चमक के हीरे-मोती की कोई कीमत नहीं होती, इसी प्रकार अनुभव के बिना मनुष्य भी किसी काम का नहीं होता। पत्रकार ने कहा-‘साहब जी, मैंने तो कॉलेज की परीक्षा में टॉप किया था।’ अब संपादक जी को कहना पड़ा-‘बेटा अगर सारा ज्ञान किताबों में ही लिखा होता तो आज इस पृथ्वी पर कोई भी मूर्ख न होता। जिंदगी के हर मोड़ पर अनुभव से ही आदमी सही फैसला कर पाता है और यह कभी मत भूलना कि अनुभव गलत फैसलों से ही मिलता है।’

अब पत्रकार ने कहा कि आपके कहने का अर्थ तो यह हुआ कि हमने स्कूल-कॉलेज में जो बरसों तक पढ़ाई की है वो सब किसी काम की नहीं है। संपादक महोदय ने पत्रकार को समझाया कि युवा पीढ़ी किताबी ज्ञान तो पा लेते हैं, परंतु किताबी ज्ञान और असल जिंदगी जीने में बहुत फर्क होता है। पढ़ाई-लिखाई के साथ अनुभव व्यक्ति को हर तरह की परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिये हिम्मत और साहस देता है। इसलिये जहां कहीं से, किसी भी कीमत पर अनुभव मिले उसे ग्रहण करते रहना चाहिये। संपादक महोदय ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि आज अनुभव की बात करते हुए मुझे बरसों पुराना एक किस्सा याद आ गया है। बात उस जमाने की है जब अंग्रेज लोगों ने तकरीबन 2000 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर 100 किलोमीटर लंबी कालका से शिमला तक रेलवे लाइन बिछाने का काम शुरू किया था। जब कई महीनों तक अंग्रेज लोग इस रेल लाइन का रूट बनाने में असफल रहे तो उस समय उन्हें किसी ने समझाया कि यहां पर एक भलकू नाम का लड़का भेड़-बकरियां चराया करता है। यदि आप लोग उसकी मदद ले सको तो आपका यह रुका हुआ काम आसानी से पूरा हो सकता है। इस पर एक अंग्रेज अफसर ने पूछा कि भलकू ने कहां से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है जो हमारे काबिल कारीगरों को वो यह काम सिखा सकता है। अंग्रेज अफसर की बात का जवाब देते हुए उस व्यक्ति ने कहा कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई तो बहुत दूर भलकू ने कभी स्कूल का दरवाजा तक नहीं देखा, लेकिन उसके पास इस सारे इलाके का बहुत अनुभव है, जिससे आपकी हर परेशानी खत्म हो सकती है। कई दौर की बातचीत के बाद इस योजना से जुड़े सभी अंग्रेज अफसरों ने मिल कर यह फैसला किया कि इस रेलवे लाइन को ठीक उसी तरह बनाया जाये जैसे भलकू राह दिखाता है। काम शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद भलकू को इस सारी परियोजना का सलाहकार नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद जैसे-जैसे भलकू ने अंग्रेजों को राह के बारे में खुलासे किया, उसी राह पर चलते हुए पहाड़ों के बीचो-बीच 100 से अधिक सुरंगें बना कर इस योजना को पूरा किया जा सका। भलकू के अनुभव की बदौलत इस परियोजना के पूरा होने पर इस इलाके के लोगों ने अनपढ़ और गंवार से दिखने वाले भलकू को ‘महाराज’ और ‘भलकू बाबा’ की उपाधियों से नवाजना शुरू कर दिया।

भलकू के इतने बड़े अनुभव के बारे में यह सब कुछ सुनने के बाद पत्रकार ने संपादक साहब से कहा कि आज तक मैं पढ़ाई-लिखाई को ही सब कुछ समझता था, लेकिन आज समझ आया कि हम अपने विचारों और जीवन में होने वाली हर घटना को अनुभव के आधार पर बदल सकते हैं। आपके अनुभव से यह साफ हो गया कि हमें दूसरों की बातों में आने की बजाए स्वयं को अपने अनुभव पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि अनुभव ही सबसे बड़ा सत्य है। लेकिन एक बात यह ठीक से समझ नहीं आई कि कोई भी आदमी इतना अनुभव कैसे और कहां से ले सकता है? संपादक महोदय ने लंबी और गहरी सांस लेते हुए पत्रकार का मार्गदर्शन करते हुए कहा-‘कोई भी दो व्यक्ति जब आपस में धन का लेन-देन करते हैं तो वो उतना ही रहता है। जबकि अच्छे विचारों के आदान-प्रदान से दोनों का ज्ञान दोगुना हो जाता है। जिस तरह अंधेरे में हमें कोई भी चीज दिखाई नहीं देती उसी तरह ज्ञान और अनुभव के अभाव में हमें जीवन की परेशानियों का हल नहीं सूझता। मन में ज्ञान का दीपक जलते ही हमें हर कठिनाई का हल बिना मेहनत किये ही मिल जाता है। किसी चीज को समझने के लिए ज्ञान की जरूरत होती है, लेकिन उसे महसूस करने के लिए अनुभव की आवश्यकता होती है।

अब उस पत्रकार ने एक सवाल और खड़ा कर दिया कि बाकी सब कुछ तो आदमी अनुभव से सीख सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति के बारे में कोई राय कैसे बनाई जा सकती है? क्योंकि कोई भी आदमी किसी दूसरे के मन का भेद नहीं पा सकता कि उसके मन में क्या चल रहा है। संपादक साहब ने पत्रकार के मन की चिंता को खत्म करते हुए कहा कि जिस प्रकार सर्दी, गर्मी, बसन्त और पतझड़ में पेड़-पौधों के अलग-अलग रंग-रूप होते हैं, उसी प्रकार किसी भी व्यक्ति को केवल एक बार देखने से कोई भी राय बनाना ठीक नहीं होता। अलग-अलग समय और मौके के हिसाब से बातचीत करने पर हर व्यक्ति की असलियत खुलकर सामने आ जाती है। इस बात में भी कोई शंका नहीं है कि जीत, हार और हमारी कमियों का सामूहिक नाम ही अनुभव है, लेकिन यह भी सच है कि अनुभव के बराबर कोई शिक्षा नहीं। कार्य और उत्तरदायित्व से ही हर आदमी अनुभव पा सकता है। अनुभव के बारे में इतना अनुभव पाकर जौली अंकल इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि अनुभव इस दुनिया का सबसे अच्छा शिक्षक है, बस शर्त सिर्फ इतनी है कि जब तक जीना है तुम्हारे अंदर अनुभव पाने की लालसा खत्म नहीं होनी चाहिये।

अनुभव के बारे में सबसे अच्छी चीज यह है कि वो एक-एक दिन कर के आता है।

ये कहानी ‘कहानियां जो राह दिखाएं’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं

Kahaniyan Jo Raah Dikhaye : (कहानियां जो राह दिखाएं)